भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा टेकओवर फाइनेंसिंग के नियमों में किए गए हालिया बदलावों के बाद भारतीय बैंकों के लिए कारोबार के बड़े रास्ते खुल गए हैं। एक जुलाई से लागू हुए इन नए नियमों के बाद से घरेलू बैंकों ने एक दर्जन से ज्यादा विलय और अधिग्रहण सौदों के लिए ₹10,000 करोड़ से अधिक की फंडिंग प्रदान की है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार भारत में अधिग्रहणफंडिंग का यह संभावित बाजार लगभग ₹2 लाख करोड़ का माना जा रहा है।

पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में मर्जर एंड एक्विजिशन सौदों का सालाना औसत मूल्य 50 अरब डॉलर रहा है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हालांकि, पहले घरेलू बैंकों पर फाइनेंसिंग से जुड़ी कई पाबंदियां लागू थीं, जिसकी वजह से इस बड़े फंडिंग बाजार पर विदेशी बैंकों, प्राइवेट क्रेडिट फंडों और कंपनियों के अपने आंतरिक संसाधनों का ही कब्जा बना हुआ था। अब नए नियमों के तहत घरेलू बैंक किसी भी अधिग्रहण के स्वतंत्र मूल्यांकन का 75% तक फाइनेंस करने के लिए अधिकृत हैं। यह सुविधा लिस्टेड और अनलिस्टेड दोनों तरह की कंपनियों के अधिग्रहण पर लागू होती है, बशर्ते उधारकर्ता की पात्रता, लीवरेज और जोखिम प्रबंधन से जुड़े तय मापदंडों का पूरी तरह पालन किया जाए।

बैंकर्स के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में इस तरह की फंडिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। सूत्रों का कहना है कि देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया , इस सेगमेंट में सबसे अधिक सक्रिय रहा है और उसने लगभग एक दर्जन सौदों में अपनी भागीदारी निभाई है। इनमें से कई सौदे पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ अलगअलग प्रक्रियाओं से गुजर रहे हैं।

एसबीआई के अलावा एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और आरबीएल बैंक जैसे प्रमुख घरेलू बैंकों ने भी हाल के महीनों में इन सौदों में हिस्सा लिया है। इनके साथसाथ एचएसबीसी, सिटीबैंक, एमयूएफजी और बार्कलेज जैसे विदेशी बैंक भी अधिग्रहणफंडिंग की प्रक्रिया में शामिल रहे हैं। यह उभरता हुआ कारोबार भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए ऋण देने का एक बड़ा और आकर्षक अवसर बनकर उभरा है।

कोटक महिंद्रा बैंक में कॉर्पोरेट और ट्रांजैक्शन बैंकिंग की प्रमुख अनु अग्रवाल ने बताया कि जुलाई के बाद से अलगअलग बैंकों के सहयोग से एक दर्जन से अधिक सौदे पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सौदे के आकार के हिसाब से कोटक महिंद्रा बैंक या तो अपनी बैलेंस शीट से पूरी राशि की फंडिंग करता है या फिर इसे अंडरराइट और सिंडिकेट करता है।

हाल ही में बैंकों द्वारा फाइनेंस किए गए बड़े M&A सौदों में कुछ प्रमुख नाम शामिल हैं। इनमें क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन द्वारा एफएमसी कॉर्पोरेशन के भारतीय कारोबार का ₹2,268 करोड़ में अधिग्रहण, वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज द्वारा एसोसिएटेड पावर स्ट्रक्चर्स में 55% हिस्सेदारी का ₹1,225 करोड़ में अधिग्रहण और टाटा ऑटोकॉम्प सिस्टम्स से जुड़ी अधिग्रहण फाइनेंसिंग विशेष रूप से शामिल हैं।