Kolkata Stampede News: कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी की रात हुई खौफनाक त्रासदी केवल अव्यवस्था की कहानी नहीं है, बल्कि सैकड़ों परिवारों के कभी न भरने वाले जख्मों का दर्दनाक गवाह बन चुकी है. पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए वह रात जिंदगी का सबसे बड़ा दुस्वप्न साबित हुई. कहीं पति के सामने पत्नी दबकर मर गई, तो कहीं बूढ़े दादा के सामने 7 साल की पोती छूट गई. प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिजनों ने उस भयानक रात की जो आपबीती सुनाई है, उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप उठेगी.

अगरपारा से मातापिता के साथ खुशियां मनाने आई 13 साल की बच्ची की सांसें पंडाल की अव्यवस्था की चढ़ चढ़ गईं. 13 वर्षीय प्रांजल सरकार अपने परिवार के साथ अगरपारा से ठाकुर जी के दर्शन के लिए आई थी. अचानक मची भगदड़ में वह नीचे गिर गई और भीड़ उसे कुचलती हुई निकल गई. प्रांजल के चाचा ने रोते हुए बताया कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो वहां लाशों की लंबी कतारें लगी थीं. उन्होंने जब शवों के चेहरे देखे तो उनके होश उड़ गए. भीड़ के नीचे कुचले जाने के कारण प्रांजल और कई अन्य मृतकों के चेहरों पर लोगों के जूतों और बूटों के निशान साफ छपे हुए थे.

“रील्स देखकर आए थे, बारिश और पुलिस की सीटी ने मचाई तबाही”

नादिया से आए एक पीड़ित ने बताया कि किस तरह चंद मिनटों में खुशियां मातम में बदल गईं. नादिया के निवासी एक व्यक्ति अपनी पत्नी और साली की बेटी को लेकर कोलकाता के चोरबागान पंडाल पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि जैसे ही अचानक तेज बारिश शुरू हुई, आयोजकों ने बैरिकेडिंग की रस्सी उठाकर भीड़ को अंदर भागने दिया. अंदर लोग ठसाठस भर गए तो सीटी बजाकर अचानक बाहर निकलने को कहा गया. संकरे रास्ते पर धक्कामुक्की हुई और उनकी पत्नी सबके नीचे दब गई. पीड़ित ने बेबसी बयां करते हुए कहा “मेरे हाथ असहाय फैले रहे, मैं दूर जाकर गिरा और अपनी पत्नी को बचा नहीं सका.”

मां के हाथों से फिसली 7 साल की मासूम, बेटे के सामने मां की मौत

भगदड़ के बीच कई परिवारों के चिराग बुझ गए और मासूम बच्चे जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. अपनी मां का हाथ पकड़कर ठाकुर जी को देखने आई 7 साल की मासूम भगदड़ में मां की पकड़ से छूटकर नीचे गिर गई. बच्ची को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल के आईसीयू में ऑक्सीजन सपोर्ट और एक्सरे जांच पर रखा गया है. बच्ची के दादा ने बताया कि रास्ता संकरा और बेहद अंधेरा था. 25 वर्षीय सोनू पाल अपनी मां के साथ पंडाल के अंदर थे. उनकी मां भीड़ के नीचे गिर गईं और देखते ही देखते बेटे की आंखों के सामने उन्होंने दम तोड़ दिया. खौफ से कांपते सोनू ने कहा “अगर मैं भी थोड़ा सा और नीचे गिरता तो शायद आज जीवित न बचता.”

‘एक परिवार की बेटी चली गई, जिम्मेदार कौन है?’

इस हादसे में जान गंवाने वाली एक नर्स की मां अपनी इकलौती बेटी को खोने के गम में टूट गई हैं. बेटी की मौत के बाद मां ने रोते हुए कहा कि घरघर की दुर्गा चली गई. मेरी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वो मेरी इकलौती बेटी थी. दरअसल, उनकी बेटी टाटा ऑन्कोलॉजी में नर्स के तौर पर काम करती थी. परिवार के लिए वह सिर्फ बेटी नहीं, बल्कि उनकी पूरी दुनिया थी.

बेटी को खोने का दर्द बयां करते हुए मां ने पंडाल में हुए हादसे पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं. इसके बावजूद दुर्गा पूजा जैसे बड़े आयोजन में ऐसा हादसा कैसे हो गया? उन्होंने कहा कि जिन लोगों की जिम्मेदारी सुरक्षा व्यवस्था संभालने की थी, उन्हें जवाब देना होगा. मां ने सवाल किया कि आखिर इस घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा, जिसने एक परिवार से उसकी इकलौती बेटी छीन ली.

संकरी सड़क, अंधेरा और वीआईपी कल्चर पर फूटा आम जनता का गुस्सा

हादसे के बाद स्थानीय लोगों और पीड़ितों ने पुलिस व पूजा समिति के प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि चोरबागान के सामने की सड़क बेहद संकरी है और वहां हजारों की भीड़ उमड़ी थी. पुलिस बल केवल वीआईपी गेट पर तैनात था, जबकि आम लोगों के रास्तों पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं था. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि भगदड़ के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए कोई एम्बुलेंस या प्रशासनिक गाड़ी आगे नहीं आई. स्थानीय निवासियों ने खुद अपनी गाड़ियों और हाथों में उठाकर घायलों को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया. इस हादसे में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है. कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं.