मंडी। हिमाचल प्रदेश में नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के मंदिरों में भक्तों की खास भीड़ देखने को मिलती है। देवभूमि में कई ऐसे प्राचीन शक्तिपीठ और देवी धाम हैं, जिनसे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल की मुंदलीधार चोटी पर स्थित मां भद्रकाली धाम भी ऐसा ही एक पवित्र स्थल है। यहां माता खुले आसमान के नीचे विराजमान हैं। नवरात्रि में माता के दर्शन, पुरानी लोक मान्यताएं और सदियों से चली आ रही देव परंपराएं इस धाम को खास बनाती हैं। प्राकृतिक सुंदरता से घिरे इस धार्मिक स्थल को अब पर्यटन के रूप में विकसित करने की मांग भी उठने लगी है।

राक्षस का वध कर माता ने बनाया था इस जगह को अपना धाम
सुकेत संस्कृति साहित्य एवं जनकल्याण मंच पांगणा के अध्यक्ष डॉ. हिमेंद्र बाली के अनुसार, मुंदलीधार से जुड़ी एक पुरानी लोक मान्यता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में इस इलाके में एक अत्याचारी राक्षस का आतंक था।
परेशान लोगों ने जब देवी से मदद की गुहार लगाई तो माता ने भद्रकाली का उग्र रूप धारण कर राक्षस का वध कर दिया। मान्यता है कि इसके बाद भक्तों के आग्रह पर माता ने मुंदलीधार की इस चोटी को अपना धाम बनाया। तभी से लोग यहां माता की पूजा करते आ रहे हैं।
माता के दरबार में हर महीने संक्रांति पर होते हैं धार्मिक आयोजन
मुंदलीधार में मां भद्रकाली की विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो खुले आसमान के नीचे विराजमान है। माता के चरणों में शिवलिंग भी स्थापित है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। नवरात्रों के दौरान यहां भक्तों की आवाजाही रहती है। इसके अलावा हर महीने संक्रांति के अवसर पर भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। श्रद्धालु यहां पहुंचकर सुख-शांति, खुशहाली और परिवार की समृद्धि की कामना करते हैं।
पीढ़ियों से निभाई जा रही है गूर परंपरा
मुंदलीधार धाम की पहचान सिर्फ माता के मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की पुरानी देव परंपराएं भी इसकी खासियत हैं। संस्कृति मर्मज्ञ डॉ. जगदीश शर्मा के अनुसार, यहां गूर परंपरा का विशेष महत्व है। गूर को देवता का प्रतिनिधि माना जाता है। मुख्य गूर दौलतराम सहित देवी के गण माने जाने वाले अन्य देवताओं से जुड़ी मान्यताएं लंबे समय से चली आ रही हैं। स्थानीय लोग आज भी इन परंपराओं को निभा रहे हैं, जिससे क्षेत्र की देव संस्कृति जीवंत बनी हुई है।
फेगड़ू से सिर्फ 3 किलोमीटर दूर है मुंदलीधार धाम
मां भद्रकाली धाम धार्मिक महत्व के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। पहाड़ों के बीच स्थित यह जगह शांत वातावरण और मनमोहक नजारों के कारण लोगों को आकर्षित करती है। निहरी तहसील मुख्यालय फेगड़ू से दाईं ओर जाने वाली सड़क से करीब 3 किलोमीटर का सफर तय करके छोटे वाहनों से यहां पहुंचा जा सकता है। हालांकि, यहां जाने से पहले सड़क की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
सड़क, पानी और दूसरी सुविधाएं विकसित करने की मांग
स्थानीय युवा समाजसेवी तोमेश, भाग चंद ठाकुर और दिलेराम सहित अन्य लोगों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से मुंदलीधार धाम को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सड़क, पीने के पानी, साफ-सफाई, बैठने और आराम करने की जगह तथा रास्ते की जानकारी देने वाले संकेतक जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे लोगों को यहां पहुंचने में आसानी होगी और इलाके में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
लोक कथाओं और देव संस्कृति को सहेजने की भी जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुंदलीधार धाम से जुड़ी लोक कथाएं और देव परंपराएं क्षेत्र की अनमोल सांस्कृतिक विरासत हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए इनका लिखित और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनके बारे में जान सकें।
लोगों को उम्मीद है कि अगर सरकार इस धार्मिक स्थल की ओर ध्यान देती है और जरूरी सुविधाएं विकसित करती है, तो मुंदलीधार धाम को प्रदेश में एक खास पहचान मिल सकती है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिलने की संभावना है।
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