ज़िंदगी में परेशानियां कभी तारीख तय करके नहीं आतीं. अचानक नौकरी छूट जाए, घर में किसी की तबीयत बिगड़ जाए या फिर कोई बड़ा बिल सामने आ खड़ा हो, ऐसे वक्त में इंसान सबसे पहले अपनी बचत की तरफ देखता है. मुसीबत की इस घड़ी में वही पैसा असल में काम आता है, जिसे बिना किसी नुकसान के फौरन निकाला जा सके. वित्तीय मामलों के जानकार अक्सर कहते हैं कि इमरजेंसी फंड का असली मकसद भारी मुनाफा कमाना नहीं होता. इसका काम सिर्फ इतना है कि जब आपको रुपयों की सख्त जरूरत हो, तो वो पैसा बिना किसी रुकावट के आपके हाथ में आ जाए. अब बड़ा सवाल ये उठता है कि इस इमरजेंसी फंड को किस जगह संभालकर रखा जाए? क्या इसे बैंक एफडी में डालना चाहिए, म्यूचुअल फंड में लगाना ठीक रहेगा या फिर शेयर बाजार में रखना बेहतर होगा?

शेयर बाजार में इमरजेंसी फंड रखना जोखिम भरा

कई लोग ज्यादा रिटर्न के लालच में इमरजेंसी का पैसा भी शेयर बाजार में लगा देते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे बेहद गलत कदम मानते हैं. शेयर बाजार की चाल कभी एक जैसी नहीं रहती. यहां कीमतें हर दिन तेजी से ऊपरनीचे होती हैं. मान लीजिए आपको आज किसी मेडिकल इमरजेंसी के लिए पैसों की सख्त जरूरत है, और उसी दिन बाजार में भारी गिरावट आ जाए. ऐसी स्थिति में आपका जमा किया हुआ पैसा काफी कम हो चुका होगा.

लाचारी में आपको अपने शेयर भारी नुकसान उठाकर बेचने पड़ेंगे. हाल के दिनों में बाजार में जो तेज गिरावट देखने को मिली है, उसने साफ कर दिया है कि जरूरत के वक्त शेयरों पर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है. इसलिए आपातकालीन बचत को कभी भी शेयर बाजार के उतारचढ़ाव वाले जोखिम में नहीं डालना चाहिए.

यही बात इक्विटी म्यूचुअल फंड पर भी लागू होती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हालांकि लंबे समय में इक्विटी फंड से एफडी या बचत खाते से ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन इनका सीधा नाता भी शेयर बाजार से ही होता है. जब अचानक पैसे निकालने का समय आएगा, तब आपके फंड की वैल्यू कितनी होगी, इसकी कोई गारंटी नहीं दे सकता.

बैंक एफडी सबसे बेहतर विकल्प क्यों?

शेयरों और म्यूचुअल फंड की तुलना में बैंक एफडी कहीं ज्यादा सुरक्षित रास्ता है. खासकर छोटी अवधि की एफडी इमरजेंसी फंड के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है. इसमें सबसे बड़ा फायदा ये रहता है कि आपका मूलधन पूरी तरह सुरक्षित रहता है और उस पर बाजार के उतारचढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता.

इसके अलावा, अगर आप पूरा पैसा सामान्य बचत खाते में छोड़ देते हैं, तो उस पर बहुत कम ब्याज मिलता है. वहीं छोटी अवधि की एफडी में रखने से आपको बचत खाते से थोड़ा बेहतर ब्याज भी मिल जाता है और जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत तोड़ा भी जा सकता है. इससे एक तरफ आपका पैसा सुरक्षित रहता है और दूसरी तरफ जरूरत के वक्त आसानी से उपलब्ध भी रहता है.

बचत खाता, छोटी एफडी का सही तालमेल

हालांकि, जानकारों का ये भी कहना है कि इमरजेंसी फंड का पूरा पैसा किसी एक लंबी अवधि की साधारण एफडी में बंद नहीं कर देना चाहिए. सबसे समझदारी भरा तरीका ये है कि इस फंड को दो हिस्सों में बांट दिया जाए.

फंड का एक छोटा हिस्सा बचत खाते में या स्वीपइन एफडी सुविधा के साथ रखना चाहिए. इससे अचानक आने वाले छोटेमोटे खर्च तुरंत पूरे किए जा सकते हैं, जिसके लिए बैंक जाने या एफडी तोड़ने की भी नौबत नहीं आती. वहीं फंड का बाकी बड़ा हिस्सा कम समय वाली एफडी में रखा जा सकता है. इस तरीके से पैसों की तत्काल उपलब्धता भी बनी रहती है और जमा पूंजी पर ठीकठाक ब्याज भी मिलता रहता है.

इमरजेंसी फंड सामान्य निवेश से अलग

एक बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि इमरजेंसी फंड को कभी भी आम निवेश पोर्टफोलियो की तरह नहीं देखना चाहिए. दोनों का मकसद बिल्कुल अलग होता है. निवेश पोर्टफोलियो भविष्य में संपत्ति बनाने और ज्यादा रिटर्न कमाने के लिए तैयार किया जाता है, जबकि इमरजेंसी फंड सिर्फ और सिर्फ अचानक आई आर्थिक मुश्किलों से बचने की ढाल होता है.

अगर प्राथमिकताओं की बात करें, तो इस फंड के लिए सबसे पहली पसंद बैंक एफडी होनी चाहिए. इसके बाद काफी पीछे म्यूचुअल फंड आते हैं, वो भी सिर्फ उस रकम के लिए जिसकी फौरन जरूरत पड़ने की संभावना न हो. वहीं शेयरों को इमरजेंसी फंड की लिस्ट में सबसे आखिरी पायदान पर ही रखना चाहिए. आपातकालीन फंड वही सबसे बेहतरीन है, जो जरूरत पड़ने पर बिना किसी मानसिक तनाव या आर्थिक नुकसान के आपके काम आ सके.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.