Satna News: सतना जिले की चित्रकूट विधानसभा में वन विभाग द्वारा एक आदिवासी किसान का ट्रैक्टर जब्त किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. ट्रैक्टर जब्ती के विरोध में चित्रकूट से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार 200 से ज्यादा आदिवासी ग्रामीणों के साथ मझगवां वन विभाग कार्यालय पहुंच गए और धरने पर बैठ गए. विधायक करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक कार्यालय परिसर में डटे रहे. इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि ट्रैक्टर नहीं छोड़ा गया तो रात भी यहीं बिताएंगे. मामला बढ़ने के बाद विधायक की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से फोन पर बातचीत हुई. इसके बाद देर रात सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह मौके पर पहुंचे. निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई के भरोसे के बाद करीब आधी रात विधायक ने धरना खत्म कर दिया. हालांकि, ट्रैक्टर अभी वन विभाग की अभिरक्षा में है.

क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद मझगवां वन परिक्षेत्र की कररिया बीट के चुनहाहार इलाके का है. वन विभाग के मुताबिक, कक्ष क्रमांक पी830 में वन भूमि पर ट्रैक्टर से जुताई किए जाने की सूचना मिली थी. सूचना मिलने के बाद वन अमला मौके पर पहुंचा. अधिकारियों ने मौके पर मौजूद किसानों से जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज दिखाने को कहा. वन विभाग का दावा है कि किसान मौके पर जमीन के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके. इसके बाद वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत वन अपराध का प्रकरण दर्ज किया और जुताई में इस्तेमाल किए जा रहे बिना नंबर के ट्रैक्टर को जब्त कर लिया.

ट्रैक्टर जब्त हुआ तो मौके पर पहुंचे विधायक

ट्रैक्टर जब्त किए जाने की जानकारी जैसे ही चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार को मिली, वह मझगवां रेंज कार्यालय पहुंच गए. उनके साथ 200 से ज्यादा आदिवासी ग्रामीण भी वहां पहुंच गए. विधायक ने वन अधिकारियों से ट्रैक्टर तत्काल छोड़ने की मांग की, लेकिन अधिकारियों ने इसे छोड़ने से इनकार कर दिया. इसके बाद विधायक कार्यालय परिसर में ही धरने पर बैठ गए. उनका आरोप था कि गरीब और आदिवासी किसानों को बेवजह परेशान किया जा रहा है. विधायक ने अधिकारियों से कहा कि जब तक किसान का ट्रैक्टर वापस नहीं किया जाता, तब तक वह धरने से नहीं उठेंगे.

विधायक और वन अधिकारियों में तीखी बहस

धरने के दौरान विधायक और वन विभाग के अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई. वन विभाग की ओर से रात के समय ट्रैक्टर चलाए जाने का मुद्दा उठाया गया. इस पर विधायक ने सवाल किया कि किसान अपनी जरूरत के हिसाब से दिन या रात खेत में ट्रैक्टर चला सकता है. केवल रात में ट्रैक्टर चलाने के आधार पर किसान के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती.

हालांकि, वन विभाग ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई रात में ट्रैक्टर चलाने की वजह से नहीं की गई. विभाग का कहना है कि वन भूमि पर अवैध जुताई और अतिक्रमण के प्रयास की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गई. अधिकारियों के मुताबिक, जमीन के संबंध में वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर वन अपराध का प्रकरण दर्ज किया गया और ट्रैक्टर जब्त किया गया.

विधायक ने लगाया मनमानी का आरोप

विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार ने वन विभाग की कार्रवाई को मनमाना बताया. उन्होंने दावा किया कि किसान करीब 40 साल पुरानी पुश्तैनी और वैध पट्टे की जमीन पर परिवार के भरणपोषण के लिए खेती कर रहा था. विधायक के मुताबिक, किसान ने जमीन से जुड़े दस्तावेज भी दिखाए थे, इसके बावजूद वन अधिकारियों ने ट्रैक्टर जब्त कर लिया. विधायक ने कहा कि नियमकायदों के नाम पर गरीब और आदिवासी किसानों को डराना या परेशान करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार गरीब, वंचित और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.

मामला भोपाल पहुंचा, CM से हुई फोन पर बात

विधायक का धरना करीब 10 घंटे तक चलता रहा. मामला बढ़ने के बाद यह स्थानीय स्तर से निकलकर भोपाल तक पहुंच गया. विधायक की मुख्यमंत्री डॉ. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मोहन यादव से फोन पर बातचीत हुई. इसके बाद देर रात सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह मझगवां रेंज कार्यालय पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने विधायक से बातचीत की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया. अधिकारियों ने कहा कि मामले में नियमानुसार और विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद विधायक ने आधी रात के करीब धरना खत्म करने का ऐलान किया.