भारत में अब कारें पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट हो रही हैं. नई गाड़ियों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, एडवांस ड्राइविंग फीचर्स और सॉफ्टवेयर के जरिए कई सुविधाएं मिल रही हैं. लेकिन कारें जितनी स्मार्ट हो रही हैं, उतना ही साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ रहा है. अब किसी कार के सॉफ्टवेयर को हैक करने या उसमें वायरस डालने का खतरा भी सामने आने लगा है. इसी चुनौती को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ऐसे वाहनों के लिए साइबर सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर अपडेट मैनेजमेंट सिस्टम को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा है. सरकार ने पहली बार इस संबंध में ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं. इन नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आधुनिक कारों का सॉफ्टवेयर सुरक्षित रहे और कोई हैकर वाहन के सिस्टम में सेंध न लगा सके.

इन वाहनों पर लागू होना नया नियम

प्रस्तावित नियम उन पैसेंजर वाहनों, कमर्शियल वाहनों और ट्रैक्टरों पर लागू होंगे जिनमें कम से कम एक इलेक्ट्रिक कंट्रोल यूनिट लगा होगा और जो Level3 या उससे ज्यादा ऑटोमेटेड ड्राइविंग क्षमता रखते हैं. ECU वह इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होता है जो इंजन, ब्रेक, बैटरी और अन्य महत्वपूर्ण फीचर्स को नियंत्रित करता है.

पहले इन कारों लिए होगा जरूरी

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, अक्टूबर 2026 से MercedesBenz SClass, Audi A8 और BMW 7 Series जैसी नई Level3 ऑटोमेशन वाली गाड़ियों के लिए साइबर सिक्टोरिटी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा. वहीं, इन मॉडलों के पहले से बाजार में मौजूद संस्करणों पर यह नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे.

क्यों जरूरी हुआ ये फैसला?

इसके बाद सरकार सिलसिलेबार तरीके से अन्य गाड़ियों को भी इसमें शामिल करेगी. अप्रैल से अक्टूबर 2028 के बीच उन वाहनों पर ये नियम लागू होंगे, जिनमें ऑवरदएयर सॉफ्टवेयर अपडेट की सुविधा है. इसके बाद अक्टूबर 2029 से सभी ऐसी गाड़ियों पर यह नियम लागू होंगे, जिनमें सॉफ्टवेयर अपडेट करने की सुविधा मौजूद है. OTA अपडेट का मतलब है कि कार का सॉफ्टवेयर मोबाइल फोन की तरह इंटरनेट के जरिए अपडेट हो जाता है. इसके लिए सर्विस सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. कंपनी सीधे WiFi या मोबाइल नेटवर्क से कार में नया सॉफ्टवेयर, सुरक्षा अपडेट या नए फीचर भेज सकती है. यही सुविधा जितनी सुविधाजनक है, उतना ही साइबर सुरक्षा का जोखिम भी बढ़ाती है.