Hospital Stocks Fall: शेयर बाजार में 30 सितंबर का दिन कॉरपोरेट अस्पतालों के लिए काफी भारी रहा. सुप्रीम कोर्ट की एक बेहद सख्त टिप्पणी के बाद बड़े अस्पतालों के शेयरों में 6 फीसदी तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली. अदालत ने अस्पतालों द्वारा दवाओं पर वसूले जा रहे भारीभरकम मुनाफे पर गहरी चिंता जताई है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कोर्ट का गुस्सा मुख्य रूप से इस बात पर था कि मरीजों को अस्पताल के ही मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे आम आदमी बुरी तरह पिस रहा है.

दवाओं के दाम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
जस्टिस विक्रम नाथ तथा जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दवाओं की कीमतों को लेकर सुनवाई करते हुए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया. अदालत ने कहा कि कॉरपोरेट अस्पताल किसी को नहीं छोड़ते. बेंच ने यहां तक कह दिया कि ये लोग शव तक बाहर नहीं ले जाने देते. कोर्ट ने कैंसर की दवा का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे 2,700 रुपये की कीमत वाली दवा मरीजों को 27,000 रुपये में बेची जा रही है. अदालत ने इसे साफ तौर पर ‘नरसंहार’ करार दिया है.
इन अस्पतालों के शेयरों में आई गिरावट
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख का असर शेयर बाजार पर तुरंत दिखाई दिया. सुबह के कारोबार में अपोलो हॉस्पिटल्स, यथार्थ हॉस्पिटल तथा मैक्स हेल्थकेयर के शेयर 4 से 6 फीसदी तक टूट गए. वहीं फोर्टिस हेल्थकेयर 5.2 फीसदी, कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज 3.8 फीसदी तथा एस्टर डीएम के शेयर 4.2 फीसदी नीचे आ गए. इसका असर पूरे हेल्थकेयर सेक्टर पर पड़ा. निफ्टी फार्मा इंडेक्स 1 फीसदी तो बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स 2 फीसदी गिरकर कारोबार कर रहा था.
दवाओं पर 16 प्रतिशत मार्जिन का सुझाव
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि सभी दवाओं की एमआरपी पर 16 फीसदी का एक समान मार्जिन क्यों नहीं तय किया जा सकता. कोर्ट का कहना था कि जरूरी या गैरजरूरी दवाओं का भेद नहीं होना चाहिए क्योंकि अंत में इसका नुकसान टैक्स चुकाने वालों को ही उठाना पड़ता है. अदालत की इन चिंताओं पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सहमति जताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है तथा वे अधिकारियों के साथ इस पर चर्चा करेंगे.
मुनाफे पर कितना पड़ेगा असर
मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक इस मामले से अस्पतालों की कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है. दवाओं तथा मेडिकल उपकरणों से अस्पतालों की कुल कमाई का 20 से 35 फीसदी हिस्सा आता है. बोनान्ज़ा के रिसर्च एनालिस्ट नितांत दरेकर का कहना है कि अगर दवाओं पर 16 फीसदी का मार्जिन लागू होता है तो अपोलो, मैक्स, एस्टर डीएम, मेदांता तथा फोर्टिस जैसे फार्मेसी आधारित अस्पतालों के मुनाफे में गिरावट आ सकती है. इसमें अपोलो सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है क्योंकि उसका रिटेल फार्मेसी का बड़ा नेटवर्क है. वहीं क्लिनिकल आधारित अस्पताल जैसे नारायण तथा जुपिटर पर इसका असर कम होगा. हालांकि ये अभी सिर्फ एक सुझाव है तथा कोई अंतिम आदेश नहीं आया है. इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को तय की गई है.



