शेयर बाजार में डिफेंस कंपनियों का प्रदर्शन लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. इसी बीच, अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के निवेशकों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है. शुक्रवार को इस डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनी के शेयरों में 2.39 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई. बाजार में इस तेजी की मुख्य वजह 6 जुलाई 2026 को होने वाली कंपनी की एक महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक है. बीते पांच सालों में अपने निवेशकों को 3,847 प्रतिशत का बंपर रिटर्न देने वाली यह कंपनी अब प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए नई पूंजी जुटाने की बड़ी योजना बना रही है. सोमवार को जब बाजार खुलेगा, तो आम निवेशकों से लेकर बड़े संस्थानों तक की नजर इसी शेयर पर रहने वाली है.

6 जुलाई की बैठक में होगा बड़ा फैसला

कंपनी प्रबंधन ने शेयर बाजार को आधिकारिक तौर पर सूचित किया है कि 6 जुलाई 2026 को हैदराबाद स्थित उनके पंजीकृत कार्यालय में निदेशक मंडल की अहम बैठक होने जा रही है. इस बैठक का मुख्य एजेंडा प्रेफरेंशियल आधार पर इक्विटी शेयर, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज या वारंट जारी करके फंड जुटाना है. आसान भाषा में समझें तो कंपनी अपने कारोबार को रफ्तार देने के लिए बाजार से पैसा उठाना चाहती है. शेयर की कीमत और फंड जुटाने की अन्य शर्तें सेबी रेगुलेशन, 2018 के सख्त नियमों के तहत तय की जाएंगी. इस पूरी प्रक्रिया के लिए शेयरधारकों के साथसाथ नियामकों की हरी झंडी भी अनिवार्य होगी.

विदेशी निवेशकों ने खोला खजाना

किसी भी कंपनी में विदेशी संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी उसके मजबूत भविष्य का संकेत होती है. जून 2026 के ताजा शेयरहोल्डिंग पैटर्न के मुताबिक, प्रमोटर्स के पास कंपनी की 50.27 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार है. वहीं, विदेशी निवेशकों ने अपना भरोसा जताते हुए अपनी हिस्सेदारी को मार्च 2026 तिमाही के 3.63 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 6.21 प्रतिशत कर दिया है. घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास भी 1.76 प्रतिशत शेयर मौजूद हैं.

अगर रिटर्न की बात करें, तो इस शेयर ने निवेशकों की झोली भर दी है. महज 3 महीने में 128 प्रतिशत, एक साल में 136 प्रतिशत और 3 साल में 803 प्रतिशत का शानदार रिटर्न इस बात की गवाही देता है. वहीं, 5 साल की अवधि में 3847 प्रतिशत का उछाल इसे मल्टीबैगर शेयरों की लिस्ट में सबसे ऊपर खड़ा करता है.

दमदार ऑर्डर बुक से भविष्य सुरक्षित

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स सिर्फ शेयर बाजार में ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी मजबूत कारोबार कर रही है. यह कंपनी मुख्य रूप से रक्षा, अंतरिक्ष और होमलैंड सिक्योरिटी के लिए बेहद संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और मिशनक्रिटिकल समाधान तैयार करती है. इनके क्लाइंट लिस्ट में रक्षा मंत्रालय, डीआरडीओ , इसरो , बीईएल और एचएएल जैसी देश की सबसे भरोसेमंद सरकारी संस्थाएं शामिल हैं. वर्तमान में कंपनी के पास 1,432 करोड़ रुपये की भारीभरकम ऑर्डर बुक है, जो यह सुनिश्चित करती है कि आने वाले समय में इनका राजस्व लगातार बढ़ता रहेगा.

इनसाइडर ट्रेडिंग पर सख्त पहरा

फंड जुटाने जैसी संवेदनशील जानकारी के बीच बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कंपनी ने कड़े कदम उठाए हैं. इनसाइडर ट्रेडिंग के नियमों का सख्ती से पालन करते हुए 1 जुलाई 2026 से कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ट्रेडिंग विंडो पूरी तरह से बंद कर दी गई है. यह पाबंदी 30 जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित होने के 48 घंटे बाद तक लागू रहेगी, ताकि आम निवेशकों का हित सुरक्षित रहे.

वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो 16,336 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली इस कंपनी का पी/ई अनुपात 152.11 है, जो उद्योग के औसत 48.73 से अधिक है. हालांकि, 0.41 का कम डेटटूइक्विटी अनुपात बताता है कि कंपनी पर कर्ज का बोझ बहुत मामूली है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.