केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. छह दशक पुरानी ईपीएफ योजना 1952 को खत्म कर अब ‘ईपीएफ स्कीम 2026’ लागू कर दी गई है. सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत लाई गई इस नई योजना में पीएफ खाते से आंशिक निकासी को पहले से ज्यादा पारदर्शी और आसान बनाया गया है. सबसे बड़ी राहत उन कर्मचारियों को दी गई है, जिन्हें नई नौकरी जॉइन किए हुए एक साल भी पूरा नहीं हुआ है और वे काम छोड़ देते हैं. अब वे भी आसानी से अपने पीएफ का पैसा निकाल सकेंगे. हालांकि, कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने 25 प्रतिशत ‘मिनिमम बैलेंस’ का एक नया और अनिवार्य नियम भी इसमें जोड़ दिया है.

खाते में 25 फीसदी रकम छोड़ना अनिवार्य
नई स्कीम के तहत अब हर पीएफ खाताधारक को अपने अकाउंट में एक न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य होगा. आसान भाषा में समझें तो आपके खाते में जमा कुल रकम का 25 प्रतिशत हिस्सा हमेशा खाते में ब्लॉक रहेगा. इसे ‘मिनिमम बैलेंस’ कहा गया है. इस 25 फीसदी रकम को छोड़कर जो 75 प्रतिशत पैसा बचता है, उसे ‘एलिजिबल मेंबर बैलेंस’ का नाम दिया गया है. कर्मचारी अपनी जरूरत के वक्त केवल इसी हिस्से को निकाल सकते हैं. इस नियम का मुख्य मकसद यह है कि आपके रिटायरमेंट के वक्त आपके पास एक सुरक्षित फंड जरूर बचा रहे.
इन जरूरतों के लिए निकाल सकेंगे एलिजिबल फंड
अगर आपने ईपीएफ सदस्य के रूप में 12 महीने यानी एक साल पूरे कर लिए हैं, तो आप अपनी पारिवारिक या व्यक्तिगत जरूरतों के लिए अपने ‘एलिजिबल मेंबर बैलेंस’ का 100 प्रतिशत तक हिस्सा निकाल सकते हैं. नई योजना में स्पष्ट किया गया है कि यह पैसा किन कामों के लिए निकाला जा सकता है:
- खुद या परिवार के किसी सदस्य का इलाज
- बच्चों की शिक्षा
- खुद की या परिवार में किसी की शादी
- नया घर या फ्लैट खरीदना
- मकान बनाने के लिए जमीन लेना या घर का निर्माण करना
- होम लोन चुकाना या पुराने घर की मरम्मत कराना
विशेष परिस्थितियों में भी एक साल की सदस्यता के बाद इस निकासी की अनुमति मिलेगी. इसके लिए ईपीएफओ के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसे खाते में न्यूनतम बैलेंस की शर्त पूरी होने पर कमिश्नर द्वारा मंजूरी दी जाएगी.
एक साल से पहले नौकरी छूटने पर क्या होगा
अक्सर देखा जाता है कि कई लोग नई नौकरी जॉइन करने के कुछ महीनों बाद ही किसी कारणवश काम छोड़ देते हैं. पुरानी योजना में ऐसे कर्मचारियों को पीएफ का पैसा निकालने में काफी दिक्कतें आती थीं. ‘ईपीएफ स्कीम 2026’ ने इस परेशानी को दूर कर दिया है. नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई कर्मचारी 12 महीने पूरे होने से पहले ही नौकरी छोड़ देता है, तब भी वह आंशिक निकासी का पूरा हकदार होगा. हालांकि, वह कर्मचारी उसी दिन तक उपलब्ध अपने ‘एलिजिबल मेंबर बैलेंस’ की सीमा तक ही रकम निकाल पाएगा. यह कदम कम अवधि की नौकरी करने वालों के लिए एक बड़ी आर्थिक राहत है.
किस काम के लिए कितनी बार निकाल सकते हैं पैसा
पीएफ की रकम को कर्मचारी अपनी जीवनभर की बचत के रूप में देखते हैं. लोग बारबार पैसा निकालकर अपना फंड खाली न कर दें, इसके लिए नई योजना में निकासी की कुछ सीमाएं तय की गई हैं.
- शिक्षा: एक कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल के दौरान बच्चों की पढ़ाई के लिए अधिकतम 10 बार पैसा निकाल सकता है.
- शादी: विवाह संबंधी खर्चों के लिए पूरी सदस्यता के दौरान अधिकतम 5 बार निकासी की जा सकती है.
- आवास: घर खरीदने या बनवाने से जुड़े कामों के लिए भी अधिकतम 5 बार ही आंशिक निकासी की अनुमति है.
- विशेष परिस्थितियां: अगर कोई विशेष इमरजेंसी आती है, तो एक वित्तीय वर्ष में ज्यादा से ज्यादा 2 बार पैसे निकालने की छूट मिलेगी.



