कासगंज के सदर कोतवाली के अशोक नगर में नेहा की उसके ही प्रेमी समीर ने हत्या कर दी। समीर ने रुपये और जेवर के लालच में अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया और युवती का गला रेतकर शव को निर्वस्त्र कर छोड़ दिया। मूल रूप से जामा मस्जिद के पास का रहने वाला मुख्य आरोपी समीर बाइक चोरी के मामले में पहले भी जेल जा चुका है। पुलिस से बचने के लिए वह ठिकाना बदलकर अशोक नगर में किराये के एक मकान में रह रहा था।

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करीब तीन महीने पहले उसकी मुलाकात पड़ोस में रहने वाली नेहा से हुई जो पिछले तीन-चार साल से उसके दोस्त अरसद को जानती थी। बातचीत और मेल-जोल बढ़ने के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं।

पुलिस गिरफ्त में आरोपी – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

इसी बीच समीर को पता चला कि नेहा के घर में कैश और जेवर रखे हैं। लालच में अंधे होकर उसने साथियों के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई और आधी रात को जेवर व रुपये लेकर मिलने के बहाने बुलाकर उसकी गला रेतकर हत्या कर दी। वे शव को भी ठिकाने लगाने की फिराक में थे लेकिन अचानक किसी वाहन के आने और रोशनी होने से घबराकर वे शव को ट्यूबवेल की छत पर ही छोड़कर भाग निकले।

मृतका के घर पर मौजूद पुलिस – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

घर में थी सबकी लाडली
मृतका नेहा अपने परिवार में सबसे छोटी और पांचों भाइयों की लाडली बहन थी। उसके दो भाई दिल्ली और एक भाई मुंबई में रहकर काम करते हैं। घटना के बाद मां जाहिदा बेगम और बड़ी बहन निशा समेत पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। एसपी ओपी सिंह ने बताया कि आरोपी समीर पूर्व में जेल जा चुका है। रुपये और जेवर के लालच में उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस हत्या को अंजाम दिया है। पुलिस अग्रिम वैधानिक कार्रवाई में जुटी है। –

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जानकारी जुटाती पुलिस – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बहन के मंगेतर को फंसाने की थी तैयारी
एसपी ओपी सिंह ने बताया कि आरोपी समीर ने वारदात से दो दिन पहले एक नया सिम एक्टिवेट कर युवती को दिया था। यह सिम मृतका की बहन निशा के मंगेतर बदायूं के सहसवान निवासी वसीम के नाम पर रजिस्टर्ड था ताकि हत्या के बाद शक की सुई वसीम की तरफ घूम जाए। मामले में वसीम से पूछताछ भी की गई थी। हालांकि, पुलिस जल्द ही इस पैंतरे को भांप गई।

दो दिन तक की पूरे इलाके की रेकी
आरोपियों ने हत्या के लिए दो दिन तक पूरे इलाके की रेकी की थी। आबादी से दूर, पुरानी रेलवे लाइन के पास फतेह सिंह के खेत की सूखी और सुनसान जगह को इसके लिए चुना गया। जहां रात में आवाजाही नहीं होती थी और आसपास मकान भी माैजूद नहीं थे।

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