
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद की सोनिका चौहान और उसके मुस्लिम पति अकबर खान से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है. पिता का आरोप था कि अकबर खान ने सोनिका को अपहरण करके शादी की थी. 22 सितंबर को कोर्ट में पेश हुई सोनिका ने बताया कि वह बालिग हैं और उन्होंने अपनी मर्जी से शादी की है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता ने उन्हें घर में कैद करके रखा था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने सोनिका को अपनी इच्छा के अनुसार पति के साथ रहने की आजादी दे दी. जानिए पूरा मामला.
युवती ने कोर्ट के सामने रखी राय
राज्य सरकार की ओर से सोनिका चौहान को इलाहाबाद कोर्ट के सामने पेश किया गया. कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश के बाद 22 सितंबर को न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने महिला से अलग से बातचीत कर उसकी इच्छा जानी. महिला ने बताया कि वह 26 साल की है और उसने अपनी मर्जी से शादी की है. उसने आरोप लगाया कि पिता उसे घर में रहने के लिए मजबूर कर रहे थे. महिला ने पति के साथ रहने की इच्छा जताई, वहीं उसके पति ने भी उसके साथ रहने की बात कही.
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने और अपनी इच्छा से जीवन जीने का अधिकार है. इस फैसले में माता-पिता या परिवार के सदस्य हस्तक्षेप नहीं कर सकते. न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने यह आदेश गाजियाबाद की युवती से जुड़ी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया.
युवती के पिता ने क्या तर्क दिया?
युवती के पिता ने कोर्ट में दावा किया कि उनकी बेटी पर उसके पति का दबाव और अनुचित प्रभाव है. उन्होंने अंतरधार्मिक विवाह की वैधता पर भी सवाल उठाया. हालांकि, युवती से सीधे बातचीत के बाद कोर्ट ने पाया कि वह बालिग है और अपने फैसले को समझने में सक्षम है. अदालत को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि वह किसी दबाव में है. कोर्ट ने कहा कि अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनना बालिग व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है.
कोर्ट ने महिला को उसके पिता की कस्टडी से फ्री करने का आदेश दिया. साथ ही उसे अपनी इच्छा के अनुसार पति के साथ रहने की अनुमति दी.



