
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पत्नी समेत तीन लोगों की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी अरविंद और पुलिस के बीच करीब सात घंटे तक चला गतिरोध आखिरकार मुठभेड़ में खत्म हुआ. पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने अपने घर के अंदर से पुलिसकर्मियों पर गोली चला दी, जिसके बाद पुलिस टीम ने परिसर में दाखिल होकर जवाबी कार्रवाई की. इस कार्रवाई में अरविंद को गोली लगी और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई गई. बाद में आजमगढ़ के एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के ताजा बयान के मुताबिक, अरविंद और उसके बेटे दोनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
इस पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने घर के अंदर मौजूद तीन बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने पर प्राथमिकता दी. इनमें अरविंद का बेटा और दो बेटियां शामिल थीं. पुलिस के मुताबिक, बेटे को पहले बाहर निकाला गया, जबकि दोनों बेटियों को उसके बाद सुरक्षित बाहर लाया गया. तीनों बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया था.
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुई गोलीबारी…
पुलिस के अनुसार, अरविंद ने अपने घर पर आयोजित एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कथित तौर पर गोलीबारी की थी. इस घटना में उसकी पत्नी और दो अन्य लोगों की मौत हो गई. आजमगढ़ के एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि अरविंद परिवार के सदस्यों के साथ आक्रामक व्यवहार करता था. उसकी मां और पत्नी ने कथित तौर पर उसके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करने की शिकायत भी की थी.
क्या है मामला?
एसएसपी के अनुसार, अरविंद की मां और पत्नी को शक था कि वह किसी ‘बुरी आत्मा’ के प्रभाव में है. इसी वजह से दोनों ने घर पर धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया था. पुलिस के मुताबिक, अरविंद इस अनुष्ठान के खिलाफ था और इसे लेकर अपने परिवार से नाराज था. कुमार ने कहा कि जब अरविंद की पत्नी ने उसे अनुष्ठान करा रहे पुजारी का अपमान करने से रोका, तो वह गुस्से में आ गया और उसने अपनी पत्नी तथा दो अन्य लोगों को गोली मार दी.
एक स्थानीय निवासी के मुताबिक, धार्मिक अनुष्ठान के लिए घर में पांच पुजारी पहुंचे थे. निवासी ने बताया कि अरविंद ने पूजा कराने का कारण पूछा और इसके बाद उसके साथ बहस शुरू हो गई. आरोप है कि उसने पहले अपनी पत्नी को गोली मारी और फिर पुजारियों पर फायरिंग कर दी. स्थानीय निवासी के अनुसार, दो पुजारियों की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि तीन अन्य वहां से भागने में सफल रहे.
बच्चों को कमरे में बंद कर खुद अंदर रहा आरोपी
गोलीबारी के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों को लेकर एक कमरे में चला गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. इन बच्चों में उसके दो बच्चे और उसकी साली का बच्चा शामिल था. इसके बाद वह पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार नहीं हुआ.
पुलिस के पहुंचने के बाद करीब सात घंटे तक घर को घेरकर आरोपी को बाहर निकालने की कोशिश की गई. पुलिस ने शुरुआत में संयम बरतते हुए अरविंद से बातचीत के जरिए आत्मसमर्पण कराने की कोशिश की. परिवार के सदस्यों को भी बातचीत में शामिल किया गया, ताकि वह बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल दे और आत्मसमर्पण कर दे.
वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा ने बताया कि पुलिस की बार-बार कोशिशों के बावजूद अरविंद बाहर आने को तैयार नहीं था. वह पुलिस से सुबह तक इंतजार करने के लिए कह रहा था. अरोड़ा ने कहा कि करीब सात घंटे तक चले गतिरोध के बाद भी आरोपी बाहर नहीं आया और लगातार सुबह तक इंतजार करने की बात कहता रहा.
आरोपी ने पुलिस पर चलाई गोली
स्थिति उस समय गंभीर हो गई जब अरविंद ने घर के अंदर से पुलिसकर्मियों पर गोली चला दी. इसके बाद पुलिस ने आखिरी विकल्प के तौर पर घर के अंदर दाखिल होने का फैसला किया. एडीजी नवीन अरोड़ा के मुताबिक, एसएसपी और एसओजी टीम के तीन-चार सदस्यों ने दरवाजा तोड़कर घर में प्रवेश किया. पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. जैसे ही पुलिसकर्मी, जिनमें एसएसपी भी शामिल थे, अंदर दाखिल हुए, उन पर गोलीबारी की गई. इसके बाद पुलिस टीम ने जवाबी फायरिंग की.
अरोड़ा ने बताया कि पुलिस की जवाबी कार्रवाई सीमित थी और ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था. उनके अनुसार, पूरी कार्रवाई के दौरान केवल तीन या चार राउंड फायर किए गए. एडीजी ने कहा कि पुलिस की ट्रेनिंग की वजह से फायरिंग सटीक और सीमित रही. उनका कहना था कि ऑपरेशन में प्राथमिकता बच्चों की जान बचाना थी.
पहले घायल बेटे को निकाला गया
पुलिस के मुताबिक, घर में मौजूद बच्चों में से अरविंद का बेटा पहले बाहर निकाला गया. उसके बाद दोनों बेटियों को बाहर लाया गया. तीनों बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया.
पुलिस के अनुसार, बेटे को गोली लगी हुई थी और उसके घायल होने की जानकारी पुलिस को घर में प्रवेश करने के बाद ही मिली. वहीं, दोनों अन्य बच्चे बेहद डरे और मानसिक रूप से परेशान थे. पुलिस ने बताया कि वे खाना और पानी नहीं मिलने के कारण डिहाइड्रेशन से भी जूझ रहे थे. एडीजी अरोड़ा ने कहा कि पहली नजर में ऑपरेशन इस मायने में सफल रहा कि पुलिस तीनों बच्चों की जान बचाने में कामयाब रही.
हालांकि, बाद में आजमगढ़ के एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के ताजा बयान के अनुसार, अरविंद और उसके बेटे दोनों की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई.
पुलिस ने आत्मसमर्पण के लिए लगातार समझाया..
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, पुलिस ने अरविंद को आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित छोड़ने के लिए लगातार समझाने की कोशिश की. इस दौरान उसके परिवार के सदस्यों की मदद भी ली गई. कुमार के मुताबिक, अरविंद ने कथित तौर पर पुलिस और अपने परिवार के सदस्यों को गोली मारने की धमकी दी थी. उसने बच्चों को भी मारने की धमकी दी और इसके बाद अपने बेटे को गोली मार दी.
एसएसपी ने बताया कि पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद आरोपी ने बच्चों को कमरे में बंद कर दिया था. पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए समझाने की कोशिश की. पुलिस के अनुसार, कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई देने के बाद पुलिस टीम ने अंदर प्रवेश किया.
कुमार ने कहा कि चेतावनी दिए जाने और हवा में चेतावनी के तौर पर फायर किए जाने के बावजूद अरविंद ने पुलिस पर कथित तौर पर अंधाधुंध गोलीबारी की. इसके बाद पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें अरविंद घायल हो गया.
परिवार ने क्या कहा?
एसएसपी के मुताबिक, शुरुआती जांच में अरविंद के परिवार के साथ आक्रामक व्यवहार करने की बात सामने आई है. उसकी मां और पत्नी ने कथित तौर पर उसके द्वारा परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट किए जाने की शिकायत की थी. इसी बीच उसकी मां और पत्नी ने धार्मिक अनुष्ठान कराने का फैसला किया था. उन्हें संदेह था कि अरविंद किसी ‘बुरी आत्मा’ के प्रभाव में है.
पुलिस के मुताबिक, धार्मिक अनुष्ठान को लेकर अरविंद नाराज था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसी दौरान पत्नी द्वारा पुजारी के अपमान पर आपत्ति जताने के बाद वह कथित तौर पर भड़क गया और उसने गोली चला दी.
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि अनुष्ठान के लिए पांच पुजारी घर पहुंचे थे. अरविंद ने पूजा के उद्देश्य को लेकर सवाल किया और इसके बाद विवाद शुरू हो गया. आरोप है कि उसने पत्नी को गोली मारने के बाद पुजारियों पर भी फायरिंग की. स्थानीय निवासी के अनुसार, दो पुजारियों की मौत हो गई और तीन वहां से भागने में सफल रहे.
अब क्या हो रहा है?
एडीजी नवीन अरोड़ा ने बताया कि घटना के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया की जाएगी. मामले में जांच और एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जानी है. पुलिस के मुताबिक, अरविंद को तीन लोगों की हत्या और अपने बेटे को गोली मारने के मामले में आरोपी माना जा रहा था. मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 यानी हत्या के प्रयास का प्रावधान भी लागू बताया गया था.
हालांकि, एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के ताजा बयान के अनुसार, अस्पताल ले जाए जाने के बाद अरविंद और उसके बेटे दोनों की मौत हो गई है. पुलिस मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है.



