ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में इस समय सिर्फ एक ही नाम की गूंज है—आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस . लेकिन इस उभरती हुई तकनीक की रेस में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मोर्चे पर ग्लोबल दिग्गजों से पिछड़ने के कारण भारत, चीन और हांगकांग की सबसे बड़ी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन एशियाई देशों की शीर्ष कंपनियों ने ग्लोबल मार्केट कैप में अपनी हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा गंवा दिया है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार जहां अमेरिकी टेक कंपनियां AI बूम के रथ पर सवार होकर हर दिन नए रिकॉर्ड बना रही हैं, वहीं एशियाई बाजार इस रेस में सुस्त नजर आ रहे हैं.

कम हुई टॉप कंपनियों की हिस्सेदारी

ब्लूमबर्ग के डाटा के अनुसार, चीन और भारत दोनों देशों में, वहां की दस सबसे बड़ी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में हिस्सा अब लगभग 19 फीसदी है, जो एक साल पहले क्रमशः 26 फीसदी और 22 फीसदी था. हांगकांग का मार्केट सबसे कम ‘टॉपहैवी’ बना हुआ है, जहां बड़ी कंपनियों का कंसंट्रेशन 10 फीसदी से घटकर 9.8 फीसदी हो गया है.

यह कोई संयोग नहीं है कि इन मार्केट के बेंचमार्क का प्रदर्शन काफी खराब रहा है, खासकर ताइवान और दक्षिण कोरिया की तुलना में, जहां कुछ AI स्टार कंपनियों ने पूरे बेंचमार्क को ऊपर उठाया है. डाटा से पता चलता है कि विविधता एक ताकत हो सकती है, लेकिन जब AI जैसे तेजी से उभरते सेक्टर का प्रतिनिधित्व कम होता है, तो यह मार्केट को पीछे भी छोड़ सकती है.

सिंगापुर में सैक्सो मार्केट्स की चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट चारू चनाना ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा कि एशिया में कंसंट्रेशन की कहानी बंटी हुई है. टेकहैवी मार्केट में, AI और मेमोरी सेक्टर की विनर कंपनियां इंडेक्स कंसंट्रेशन को बढ़ा रही हैं. लेकिन भारत, चीन और हांगकांग में कंसंट्रेशन कम हो रहा है क्योंकि वहां कोई एक प्रमुख AI विनर कंपनी नहीं है.

कोरिया और ताइवान

AI सप्लाई चेन से गहराई से जुड़े कुछ ही खिलाड़ियों का दबदबा रखने वाले बाजारों में जबरदस्त तेजी आई है. ताइवान का बेंचमार्क इंडेक्स, जो मुख्य रूप से चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनी ‘ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ की बढ़त पर टिका है, इस साल 54 फीसदी बढ़ा है. वहीं, कोरिया का कोस्पी इंडेक्स, जिसे हाईबैंडविड्थ मेमोरी बनाने वाली प्रमुख कंपनियों SK Hynix Inc. और Samsung Electronics Co. से बढ़ावा मिला है, लगभग दोगुना हो गया है.

इन कंपनियों का अपने बाजारों पर असर — जो AI के मुख्य सप्लायर के तौर पर उभरने से पहले भी काफी ज्यादा था — अब और बढ़ रहा है. दक्षिण कोरिया में, टॉप 10 कंपनियों का बाजार में हिस्सा अब लगभग 65 फीसदी है, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग दोगुना है. ताइवान, जहां पहले से ही कुछ बड़ी कंपनियों का बाजार पर सबसे ज्यादा दबदबा था, वहां भी टॉप 10 कंपनियों की हिस्सेदारी एक साल पहले के 49 फीसदी से बढ़कर 56 फीसदी हो गई है.

भारत का डायवर्सिफाइड सेटअप

एशिया के कुछ ही बाजार AI की दौड़ में काफी पीछे हैं. जिसमें भारत का नाम काफी प्रमुखता से लिया जा सकता है.निफ्टी 50 बेंचमार्क, जो इस साल लगभग 8 फीसदी नीचे है, पर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और HDFC बैंक जैसी पुरानी बड़ी कंपनियों का दबदबा है. यहां तक कि इसकी प्रमुख टेक कंपनियां, जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और इंफोसिस लिमिटेड, सॉफ्ट सर्विसेज पर आधारित हैं, जिन्हें अब AI से होने वाले बदलावों से ख़तरा माना जा रहा है.

चनाना ने कहा कि ज्यादा वेटेज वाली कंपनियां अब इंडेक्स को उतनी मजबूती से आगे नहीं बढ़ा रही हैं, जबकि नेक्स्ट जेन की कंपनियों ने अभी तक कोई नया ‘इंजन’ तैयार नहीं किया है. PL कैपिटल में फंड मैनेजर और एसेट मैनेजमेंट के प्रमुख सिद्धार्थ वोरा ने कहा कि दूसरी ओर, यही डायवर्सिफिकेशन स्टेबिलिटी भी दे सकती है, अगर निवेशकों को लगे कि AI पर खर्च का दौर जरूरत से ज़्यादा बढ़ गया है और ग्लोबल निवेशक ऐसे बाजारों का रुख करें जहां कई सेक्टर में मजबूत कमाई हो रही हो. उन्होंने आगे कहा कि बाजार में बड़ी गिरावट आने पर भारत भी अछूता नहीं रहेगा, लेकिन कम कंसंट्रेशन, घरेलू लिक्विडिटी और कमाई का व्यापक आधार इसे कुछ हद तक मज़बूती दे सकता है.

चीन की स्थिति

चीन में, जहां अधिकारी और इंटरनेट की बड़ी कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने का वादा कर रही हैं, वहां स्थिति थोड़ी पेचीदा है. चीन की सबसे बड़ी कंपनियां ऐसी हैं जिनकी कमाई के कई अलगअलग ज़रीए हैं. लेकिन दूसरे एशियाई बाज़ारों की तरह, इस साल चीन में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुछ शेयर वे हैं जो सीधे AI के तेज़ी से बढ़ते दौर का फायदा उठाने की स्थिति में हैं, जिसमें इंटेलिजेंट प्रोसेसर बनाने वाली कंपनी कैम्ब्रिकॉन टेक्नोलॉजीज कॉर्प, सेमीकंडक्टर फाउंड्री SMIC और ऑप्टिकल फाइबर बनाने वाली कंपनी यांग्त्ज़ी ऑप्टिकल फाइबर एंड केबल जॉइंट स्टॉक लिमिटेड शामिल हैं.

ऑनलाइन ब्रोकरेज IG इंटरनेशनल की मार्केट एनालिस्ट फैबियन यिप ने कहा कि इसलिए निवेशकों ने अपना ध्यान उन कंपनियों की ओर लगाया है जिनका AI से साफ तौर पर संबंध है. निवेशकों का रुझान भी बदल रहा है, जो एक अच्छी बात हो सकती है. इंटरनेट की पुरानी दिग्गज कंपनियों के अलावा, पैसा बैंकों, बीमा कंपनियों, ज़्यादा डिविडेंड देने वाली सरकारी कंपनियों, हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों और AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी लग रहा है.

चनाना ने कहा कि इसी व्यापक भागीदारी की वजह से चीन ने पॉजिटिव रिटर्न दिया है, भले ही उसकी टॉप दस कंपनियों का मार्केटकैप हिस्सा कम हुआ है. CSI 300 इंडेक्स इस साल लगभग 5 फीसदी बढ़ा है. उन्होंने आगे कहा कि यह डीकंसंट्रेशन हर जगह एक जैसा नहीं है.