उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने प्रचार के आखिरी 24 घंटे में पूरी ताकत झोंक दी है. दोनों दलों का जोर मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करने और उन्हें बूथ तक पहुंचाने पर है. वाराणसी में बीजेपी ने जहां अपने विधायकों, मंत्रियों और संगठन के नेताओं को मैदान में उतारा है, वहीं समाजवादी पार्टी ने अपनी दोनों सीटें बचाने की जिम्मेदारी चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह को सौंपी है.

अब चुनाव में जीतहार का दारोमदार इस बात पर भी होगा कि दोनों पार्टियां अपने समर्थक मतदाताओं को वोट डालने के लिए कितनी सफलतापूर्वक बूथ तक पहुंचा पाती हैं. बीजेपी की रणनीति साफ है कि अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाया जाए. पार्टी के संगठन से जुड़े नेता संजय सोनकर के मुताबिक, पिछले चुनाव में पार्टी के कई मतदाताओं के वोट नहीं पड़ पाए थे. उनका दावा है कि इसी वजह से बीजेपी को स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।

संजय सोनकर ने बताया कि इस बार डोरटूडोर कैंपेन के जरिए मतदाताओं से संपर्क किया जा रहा है. पार्टी के विधायक, मंत्री और संगठन के वरिष्ठ नेता इसी रणनीति पर काम कर रहे हैं कि समर्थक मतदाता अपना वोट जरूर डालें. बीजेपी महिला मोर्चा को भी महिला मतदाताओं से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी की नजर महिला वोटर्स पर भी है, क्योंकि पिछले चुनाव में उनके कम मतदान को पार्टी के लिए चुनौती माना गया था.

सपा ने वीरेंद्र सिंह को सौंपी जिम्मेदारी

समाजवादी पार्टी भी अपनी दोनों सीटें बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है. चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने पार्टी की विभिन्न इकाइयों को मतदाताओं से संपर्क स्थापित करने में लगाया है. लोहिया वाहिनी, अंबेडकर वाहिनी और समाजवादी युवजन सभा के नेता व कार्यकर्ता घरघर जाकर मतदाताओं से मुलाकात कर रहे हैं.

सपा जिलाध्यक्ष सुजीत यादव के मुताबिक, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर जिला और महानगर इकाई के नेता तक मतदाता सूची पर काम कर रहे हैं. पार्टी की कोशिश है कि मतदाताओं की पहचान कर उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सपा की रणनीति बीजेपी सरकार से नाराज मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है. पार्टी को उम्मीद है कि ऐसे मतदाताओं की भागीदारी बढ़ने से उसे फायदा मिल सकता है.

वाराणसी में कितने मतदाता?

वाराणसी जिले में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए करीब 66 हजार मतदाता हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 7,400 मतदाता बताए जा रहे हैं. दोनों सीटों पर मतदाताओं की संख्या और मतदान प्रतिशत चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकते हैं. एमएलसी चुनाव में आम विधानसभा चुनाव की तरह सभी मतदाता वोट नहीं डालते… इसलिए राजनीतिक दलों के लिए अपने पंजीकृत मतदाताओं तक पहुंचना और उन्हें मतदान केंद्र तक लाना बेहद महत्वपूर्ण होता है.

पिछली बार सपा ने कितने वोटों से जीती थीं दोनों सीटें?

पिछले चुनाव में वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने 936 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी. वहीं, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के आशुतोष सिन्हा ने बीजेपी के केदारनाथ सिंह को 3,850 मतों से हराया था. पिछले नतीजों के ये अंतर इस बार दोनों दलों के लिए अहम हैं. बीजेपी जहां मतदान बढ़ाकर पिछली हार का हिसाब बदलना चाहती है, वहीं सपा अपने मतदाताओं को एकजुट रखकर दोनों सीटें बचाने की कोशिश में है.

आखिरी 24 घंटे में बूथ मैनेजमेंट की परीक्षा

प्रचार के अंतिम चरण में दोनों पार्टियों की रणनीति का केंद्र मतदाता संपर्क और बूथ प्रबंधन है. बीजेपी को उम्मीद है कि उसके विधायक, मंत्री और संगठन के कार्यकर्ता समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने में सफल होंगे. दूसरी तरफ सपा अपने संगठनात्मक नेटवर्क और सरकार से नाराज मतदाताओं के भरोसे मैदान में है.