आपने भी सोशल मीडिया पर ऐसे एडवर्टीजमेंट देखे होंगे, जिन्हें देखकर आपको लगभग यकीन हो गया होगा कि ये तेल लगा लिया तो बस बाल झड़ने ही बंद ही नहीं होंगे, जो बाल जा चुके हैं, वो भी लौट आएंगे. कभी देखा होगा कि एक गोली क्या तेजी से डायबिटीज जड़ से खत्म करने का दावा कर रही है, तो कहीं एक महीने में 8 किलो वजन घट रहा है. कभी ना कभी आपका भी मन ऐसे एड्स देखकर ललचाया होगा कि एक बार ट्राई करने में क्या जाता है.

लेकिन, इस मामले में ऐसे लोगों की लंबी लिस्ट है जिनका पैसा भी गया और भरोसा भी. फेक रिव्यू, पेशेंट्स की फोटो और इलाज की गारंटी देकर लोगों को क्लीनिक तक लाने वाले ऐसे प्रचार पर अब नेशनल मेडिकल कमीशन ने शिकंजा कसा है. अक्टूबर 2026 से लागू नई गाइडलाइंस में डॉक्टरों और अस्पतालों के ऑनलाइन प्रचार के लिए अब सख्त नियम तय हुए हैं.
सोशल मीडिया पर भी लागू होंगे नियम
अब डॉक्टरों और अस्पतालों के प्रचार के दायरे में सिर्फ अखबार, टीवी और होर्डिंग नहीं, इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब वीडियो, फेसबुक पोस्ट, वेबसाइट, स्पॉन्सर्ड कंटेंट और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग भी आएंगे. डॉक्टरों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर अपना नाम, क्वालिफिकेशन, मेडिकल रजिस्ट्रेशन की इन्फॉरमेशन देनी होगी. कोशिश ये कि मरीज सही जानकारी पर डॉक्टर चुने और भ्रामक दावों के जाल में न फंसें. हालांकि जनरल हेल्थ अवेयरनेस और फैक्टफुल मेडिकल जानकारी पर रोक नहीं है.
क्या हैं ऑनलाइन प्रचार के नए नियम?
डॉक्टर इलाज की 100% गारंटी, खुद को बेस्ट बताने या बिना साइंटिफिक प्रूफ के बड़ेबड़े दावे वाले ऐड नहीं कर सकते. पेड रिव्यू, फेक टेस्टिमनी और रेटिंग से पेशेंट को अट्रैक्ट करना नियमों के खिलाफ है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। डॉक्टर पब्लिसिटी के लिए पेशेंट से रिव्यू रिकमेंडेशन मांगने और यूज करने पर भी पाबंदियों का पालन करेंगे. बिफोर एंड ऑफ्टर दिखाकर सेलिब्रिटी मरीजों के जरिए अपनी सर्विसेज का प्रचार करने पर भी रोक और शर्तें लागू होंगी. केवल मरीज की सहमति से प्रतिबंधित प्रचार वैध नहीं हो जाता.
AI से तैयार फेक पेशेंट, प्रशंसापत्रों या भ्रामक तस्वीरों से लोगों इम्प्रेस नहीं किया जा सकता. जहां गाइडलाइन्स में AI कंटेट यूज करना अलाउड है वहां बताना होगा कि AI है. कूपन, कैशबैक, डिस्काउंट, फ्री इलाज और दूसरे प्रोफेशनल ऑफर देकर मरीज आकर्षित करने पर भी पाबंदियां लागू होंगी.
नियमों के उल्लघंन पर होगी कार्रवाई
- पहली बार उल्लंघन पर मामले के हिसाब से चेतावनी और अनिवार्य एथिक्स ट्रेनिंग जैसी कार्रवाई हो सकती है.
- दूसरी बार उल्लंघन पर निंदा और आर्थिक दंड जैसी कार्रवाई का प्रावधान है.
- तीसरी बार उल्लंघन पर प्रैक्टिस पर तीन से छह महीने तक निलंबन हो सकता है.
- गंभीर उल्लंघन पर छह से 12 महीने तक प्रैक्टिस निलंबित की जा सकती है.
- बारबार नियम तोड़ने पर डॉक्टर को मेडिकल रजिस्टर से एक से तीन साल तक हटाने की कार्रवाई हो सकती है.
कार्रवाई से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस और संबंधित पक्ष को जवाब देने का अवसर दिया जाना है. हर उल्लंघन पर सीधे लाइसेंस रद्द नहीं होगा. कार्रवाई की गंभीरता, उल्लंघन कैसा है, कितनी बार दोहराया गया के आधार पर संबधित मेडिकल काउंसिल फैसला करेगी .
‘शिकायत की व्यवस्था आसान होनी चाहिए’
कंज्यूमर मामलों के एक्सपर्ट बिजॉन मिश्रा कहते हैं, ‘NMC को 24 घंटे की एक हेल्पलाइन शुरू करनी चाहिए, जिससे मरीज शिकायत दर्ज कराने के साथ आगे की प्रक्रिया भी समझ सकें. पब्लिक प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव डॉक्टरों के विज्ञापनों में उनका रजिस्ट्रेशन नंबर दिखना चाहिए, ताकि लोग NMC या संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद के रिकॉर्ड से उनकी पहचान की पुष्टि कर सकें.’
‘अगर कोई डॉक्टर इलाज की 100 प्रतिशत गारंटी देता है और उसके दावे पर भरोसा करके इलाज कराने वाले मरीज को फायदा नहीं होता या नुकसान उठाना पड़ता है, तो शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था आसान होनी चाहिए. सिर्फ सफेद कोट पहनकर और गले में आला लटकाकर सोशल मीडिया पर खुद को डॉक्टर बताने वालों की भी जांच होनी चाहिए. मान्य योग्यता और रजिस्ट्रेशन का प्रमाण होना जरूरी है. टीवी और सोशल मीडिया पर दवाओं या उत्पादों को लेकर किए जाने वाले भ्रामक दावों पर भी प्रभावी निगरानी होनी चाहिए.’



