1984 के सिख नरसंहार के पीड़ित परिवारों को राहत देने की दिशा में दिल्ली सरकार ने पिछले डेढ़ साल में 150 सदस्यों को सरकारी नौकरी दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को कहा कि बाकी पात्र परिवारों को भी जल्द से जल्द सरकारी नौकरी देने का प्रयास किया जा रहा है. इसके लिए नियुक्ति प्रक्रिया को आसान बनाया गया है और शैक्षणिक योग्यता के साथ आयु सीमा में भी छूट दी गई है.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के आवास पर आयोजित संवाद1984 के सिख नरसंहार के पीड़ित परिवारों के साथ कार्यक्रम में शिरकत की. इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं, संघर्ष तथा लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा से जुड़ी बातें सुनीं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1984 की घटनाओं को याद करना आज भी बेहद पीड़ादायक है. इन परिवारों ने वर्षों तक जिन कठिन परिस्थितियों का सामना किया है, उनके दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में निर्दोष लोगों पर एकतरफा हमला किया गया था. इसे केवल दो समूहों के बीच हुआ संघर्ष या दंगा कहना उचित नहीं है.

रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया. इससे उन मामलों की जांच आगे बढ़ी, जिनमें पहले कार्रवाई नहीं हो पाई थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना सरकार की प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथसाथ नैतिक जिम्मेदारी भी है.

नौकरी के नियमों में दी गई राहत

मुख्यमंत्री ने बताया कि पीड़ित परिवारों के पात्र सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है. अब उम्र अधिक होने या निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं होने के कारण नियुक्ति में बाधा नहीं आएगी. परिवार अपनी परिस्थितियों के अनुसार किसी उपयुक्त सदस्य को नौकरी के लिए नामित कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के दस्तावेज और मामले स्पष्ट हो रहे हैं, उन्हें लगातार नियुक्तियां दी जा रही हैं. शेष पात्र परिवारों को भी जल्द नियुक्ति पत्र देने का प्रयास किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को परिवारों ने खोया है, उन्हें वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उनके परिजनों के जीवन को बेहतर बनाने और उन्हें आर्थिकसामाजिक सहारा देने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर सकती है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिल्ली सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाला कोई भी पात्र पीड़ित परिवार सहायता से वंचित न रहे.