: के ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर छिड़े विवाद के बीच लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सीएम योगी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि SIR की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस, सपा, राजद समेत विपक्षी दल हायतौबा मचा रहे हैं। ये दुर्भाग्यपूर्ण है।

लोकतंत्र को कमजोर करने की मंशा से हैरान

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ये चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और हर संवैधानिक संस्था को कटघरे में खड़ा करके भारत की बदनामी कर रहे हैं। इनकी लोकतंत्र को कमजोर करने की मंशा हैरान करने वाली है। अपनी गैरजिम्मेदाराना हरकतों को कंट्रोल करें। लोकतंत्र में हिंसा, तोड़फोड़ और दुष्प्रचार के लिए कोई जगह नहीं है।

‘जीत गए तो बढ़िया, हारे तो EVM दोषी’

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विपक्षी दल अगर चुनाव जीतें तो यह उनका पुरुषार्थ है। लेकिन भ्रष्टाचार, धांधली, घटिया नीति और अराजकता के चलते जनता इन्हें खारिज करे तो चुनाव आयोग और EVM को दोषी ठहराते हैं। इन दलों को अपने बचकाने बयानों को लेकर चिंतन करना चाहिए।

‘SIR को लेकर भ्रम फैलाया गया’

ने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग भारत की संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। इन्होंने SIR को लेकर भ्रम फैलाया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। SIR पहली बार नहीं हुआ है। 1952, 1957, 1961, 196566, 2003 में भी SIR हुआ।

‘कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रही’

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रही है। SIR के बारे में पहले से ही निर्देश दिए गए थे कि छूटे हुए मतदाताओं को फॉर्म भरने की पूरी छूट है। फॉर्म6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्रवाई को ठीक ठहराया है।

ये खबर भी पढ़ें: 

सीएम योगी बोले विपक्षी दल माफी मांगें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों ने मीडिया के सामने चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली, छूटे मतदाताओं और फॉर्म6 को लेकर स्थिति साफ कर दी है। अब कोई प्रश्न खड़े नहीं होते हैं। इसके बाद भी कांग्रेस, सपा और उनके सहयोगी दल बाल की खाल उधेड़ने में लगे हैं। ये दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत में हर वयस्क को जाति, क्षेत्र, भाषा और लिंग के भेदभाव के बिना वोट देने का अधिकार है। चुनाव से एक दिन पहले तक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का भी अधिकार है। ऐसी पूरी पारदर्शी प्रक्रिया पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने जैसा है। विपक्षी दलों को अपने रवैये के लिए आम लोगों और संवैधानिक संस्थाओं से माफी मांगनी चाहिए।