भारत में आज ज्यादातर महिलाएं का शिकार बनी हुई है. एनएफएचएस6 रिपोर्ट में भी महिलाओं की प्रजनन दर पर चिंता जाहिर की गई है. अगर ओवेरी में एग्स की संख्या और क्वालिटी नॉर्मल से कम है तो इसे लो ओवेरियन रिजर्व कहा जाता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि बिगड़े हुए लाइफस्टाइल, खानपान में कमी और लेट ऐज में प्रेगनेंसी ट्राई करने जैसे कई फैक्टर इनफर्टिलिटी का कारण बनते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको लो ओवेरियन रिजर्व से जुड़ी कई जरूरी बातें आपको बताने जा रहे हैं.

शी देल्ही हॉस्पिटल की चीफ आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. कृति तिवारी कहती हैं कि आज के समय में देर से मां बनना सामान्य बात हो गई है. शिक्षा और करियर से लेकर कई कारण हैं, जिनकी वजह से महिलाएं देरी से मां बनना चुन रही हैं. ऐसा फैसला लेना बहुत अस्वाभाविक तो नहीं है, लेकिन यह कदम बढ़ाने से पहले एक बात को समझना जरूरी है, वह है लो ओवेरियन रिजर्व. इस बारे में

क्या कहती हैं एक्सपर्ट

डॉ. कृति तिवारी ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी इस दिक्कत पर कई चीजें बताईं.उनके मुताबिक इस विषय पर बहुत कम बात होती है, जबकि इससे भविष्य में गर्भधारण की संभावना पर असर पड़ सकता है. लो ओवेरियन रिजर्व का मतलब है कि महिला की ओवरी में उसकी उम्र के हिसाब से कम एग बचे हैं. यह जरूरी नहीं है कि इससे हमेशा गर्भधारण में परेशानी हो, लेकिन गर्भधारण की संभावना थोड़ी कम जरूर हो जाती है. इसे समझाते हुए उन्होंने कहा कि हर महिला के शरीर में जन्म से ही एग की संख्या निर्धारित रहती है.

उम्र के बढ़ने पर एग्स का कम होना

एक्सपर्ट ने बताया जैसेजैसे उम्र बढ़ती है, बचे हुए एग की संख्या और क्वालिटी, दोनों में गिरावट आने लगती है. उन्होंने कहा कि उम्र सबसे अहम कारक है. 30 की उम्र के बाद से गर्भधारण की क्षमता गिरने लगती है. इसके अलावा जेनेटिक्स, सर्जरी, किसी तरह की बीमारी और कीमोथेरेपी आदि से भी एग रिजर्व पर दुष्प्रभाव पड़ता है.

आंकड़े बताते हैं कि फर्टिलिटी ट्रीटमेंट लेने वाली बहुत सी महिलाओं में 30 साल से कम उम्र में ही अनुमान से कम एएमएच लेवल पाया गया है. कुछ महिलाओं में यह उम्मीद से पहले ही होने लगता है. डॉ. कृति ने कहा कि बहुत सी महिलाओं में इसका कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता है. अनियमित पीरियड्स और गर्भधारण में परेशानी इसके संकेत हो सकते हैं.

ऐसे पता करें इस दिक्कत का

आमतौर पर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड स्कैन से ओवेरियन रिजर्व का पता चल जाता है. इसके लिए एंटीमुलेरियन हार्मोन टेस्ट किया जाता है. इससे बचे हुए एग रिजर्व का पता चलता है. इस बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, एग रिजर्व कम होने पर भी कुछ महिलाएं आसानी से मां बन जाती हैं, वहीं कुछ को इलाज की जरूरत पड़ती है. इस बारे में जानना इसलिए भी जरूरी है, ताकि समय पर सही निर्णय लिया जा सके.

एग प्रिजर्वेशन भी ऐसा ही विकल्प है. इससे भविष्य में गर्भधारण में मदद मिल सकती है. डॉ. कृति ने कहा कि खानपान और लाइफस्टाइल का एग रिजर्व से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन इससे गर्भधारण में मदद मिल सकती है.