कोलकाता के चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में शनिवार देर शाम हुई भगदड़ में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है. इस घटना के बाद बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दुख जताया तो वहीं उनकी पार्टी टीएमसी ने शुभेंदु सरकार पर जमकर निशाना साधा. टीएमसी ने घटना को लेकर पुलिस प्रशासन और शुभेंदु सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए. साथ ही जवाबदेही तय करने की मांग की है.

वहीं ममता बनर्जी ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. उन्होंने एक्स पर लिखा चोरबागान पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना के बारे में जानकर वह बेहद स्तब्ध और दुखी हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मैं मां दुर्गा से प्रार्थना करती हूं कि घायल हुए सभी लोग जल्द स्वस्थ हो जाएं और उनके परिवारों को इस कठिन समय में हिम्मत और साहस मिले.
Deeply shocked and saddened to learn about the stampede at the Chore Bagan Puja Pandal.
I pray to Maa Durga for the speedy recovery of all those injured and for strength and courage for their families during this difficult time.
— Mamata Banerjee October 17, 2026
टीएमसी ने शुभेंदु सरकार पर साधा निशाना
ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने शुभेंदु सरकार पर निशाना साधते हुए मांग की कि बचाव कार्य और चिकित्सा उपचार पूरी तत्परता के साथ किए जाएं. पीड़ितों के परिवारों को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया जाना चाहिए. टीएमसी ने कहा कि पूजा समिति के अध्यक्ष, सचिव और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए. इनमें से कुछ अभी फरार हैं, जबकि कुछ गिरीश पार्क पुलिस स्टेशन के संरक्षण में हैं. उन्हें हत्या से संबंधित कानूनी धाराओं के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए.
पुलिस कमिश्नर को पद से हटाने की मांग
इसके अलावा, जिन लोगों के नाम प्रोसेनजीत साहा ने लिए हैं, उन्हें जांच को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. टीएमसी ने कहा कि जब तक मौजूदा पुलिस कमिश्नर और ऑफिसरइनचार्ज अपने पदों पर बने रहेंगे, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है. उन्हें तुरंत उनके पदों से हटाया जाना चाहिए. एक पूरी तरह से स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि कोलकाता पुलिस के दायरे में रहते हुए ऐसा संभव नहीं है. आरोप है कि इस समिति ने पूजा पर ‘कब्जा’ कर लिया था. जांच में उन प्रभावशाली लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जिन्होंने इस कब्जे में मदद की थी, उन्हें जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए.



