Bijnor Viral Video: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला प्रकाश में आया है. यहां एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात लेडी टीचर पर स्कूल परिसर को तबेला बनाने और मासूम छात्रों से मजदूरी कराने के गंभीर आरोपों के बाद निलंबन की गाज गिरी है. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कसाना ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आधिकारिक आदेश जारी करते हुए आरोपी लेडी टीचर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. इस सख्त कार्रवाई से पूरे जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.

यह पूरा मामला बिजनौर के विकास क्षेत्र अल्हैपुर के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय भिक्कावाला का है, जहां श्रीमती काशिमा खातून नाम की अध्यापिका तैनात थीं. प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विवाद बीते 28 मई 2026 का है. आरोप है कि शिक्षिका ईदुल जुहा के अवसर पर कुर्बानी देने के लिए एक बकरा खरीद कर लाई थीं. वह बकरीद से करीब एक महीने पहले से ही स्कूल आते समय उस बकरे को अपने साथ लाती थीं और स्कूल परिसर में बांध देती थीं.
अध्यापिका पर आरोप है कि वह स्कूल में पढ़ने आने वाले मासूम बच्चों को पढ़ाने के बजाय उन्हें जंगल भेजती थीं. बच्चे वहां से बकरे के खाने के लिए पेड़ों के पत्ते और चारा काटकर लाते थे, जिसे स्कूल में बकरे को खिलाया जाता था. जब कुछ अभिभावकों को बच्चों के जरिए इस बात का पता चला, तो उन्होंने इस अमानवीय कृत्य का कड़ा विरोध किया.
बाउंड्रीवॉल के 4.40 लाख डकारने का भी आरोप, जांच में खुली पोल
शिक्षिका काशिमा खातून पर केवल बच्चों से चारा कटवाने का ही नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का भी गंभीर आरोप लगा है. शिकायत के मुताबिक, स्कूल की चारदीवारी के निर्माण के लिए विभाग की तरफ से 4 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी. आरोप है कि शिक्षिका ने इस पूरी रकम को खुर्दबुर्द कर दिया.
परेशान अभिभावकों ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत मुख्य विकास अधिकारी बिजनौर से की. सीडीओ के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने जब पूरे मामले की पड़ताल की, तो शिक्षिका पर लगे बकरा बांधने, बच्चों से चारा कटवाने और वित्तीय अनियमितता के सभी आरोप पूरी तरह सत्य पाए गए.
सरकारी आचरण नियमावली का उल्लंघन, BRC से की गईं संबद्ध
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कसाना द्वारा जारी निलंबन पत्र में शिक्षिका के इस कृत्य को बेहद गंभीर और अक्षम्य माना गया है. आदेश में साफ कहा गया है कि शिक्षिका ने विद्यालय परिसर में घोर अनुशासनहीनता बरती और अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया. उनके इस व्यवहार से समाज और शासन के सामने शिक्षा विभाग की छवि अत्यंत धूमिल हुई है, जो सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का सीधा उल्लंघन है.
निलंबन की इस अवधि के दौरान वित्तीय नियमों के तहत काशिमा खातून को आधा वेतन के बराबर जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा. हालांकि, यह भुगतान तभी होगा जब वह इस बात का प्रमाण पत्र देंगी कि वह किसी अन्य व्यापार या नौकरी में शामिल नहीं हैं. सस्पेंशन के दौरान उन्हें प्राथमिक विद्यालय भिक्कावाला से हटाकर ब्लॉक संसाधन केंद्र पुरैनी से संबद्ध कर दिया गया है.



