: दिल्ली हाईकोर्ट में CJP एक्टिविस्ट सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत बढ़ाने के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने याचिका वापस लेने का फैसला किया। इससे पहले हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब कानून में अपील का विकल्प मौजूद है, तो याचिकाकर्ता सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत क्यों पहुंचे हैं।

यह याचिका 14 और 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से पारित आदेशों को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन, जमानतदारों को अस्वीकार किए जाने और मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र से जुड़े कई कानूनी सवाल उठाए।

आज 21 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में CJP एक्टिविस्ट सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें कोर्ट ने दोनों से उनकी उम्र पूछी। जबाव में जब दोनों ने 27 और 31 बताई तो कोर्ट ने कहा कि वे नहीं हैं।

किस उम्र के लोग कहलाते हैं मिलेनियल्स 

आपको बता दें कोर्ट ने यह भी सवाल पूछा कि किस उम्र के लोग मिलेनियल्स कहलाते हैं? प्रदर्शन में बच्चे भी शामिल थे। लेकिन अब मामला कुछ और हो गया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस पूरी सुनवाई में कोर्ट ने पूछा कि लोग वहीं हैं लेकिन मुद्दा बदल गया है।

कौन लोग हैं संगठन क्या है 

इस पूरे मामले में मामले में सौरव दास औश्र आशुतोष रांका को फटकार लगाते हुए पूछा कि कि आखिर ये लोग कौन हैं, क्या हैं, इनका संगठन क्या है और इसका उद्देश्य है? ने कहा कि जब शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका हो तो ये सभी सवाल अहम हो जाते हैं।

 

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