देश में डीजल खरीदने को लेकर नया बदलाव देखने को मिल सकता है. अगर आप पेट्रोल पंप से जरूरत के हिसाब से ज्यादा डीजल भरवाते हैं तो आने वाले दिनों में इस पर लिमिट लग सकती है. प्राइवेट फ्यूल कंपनियां जियोबीपी और नायरा एनर्जी ने कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल खरीद की मात्रा सीमित कर दी है. इंडस्ट्री और बल्क में खरीदारों की ओर से रिटेल स्टेशनों पर सस्ते में डीजल खरीदने की घटनाओं के बाद ऐसा किया. क्योंकि रिटेल में डीजल बल्क के मुकाबले सस्ता मिल रहा है. प्राइवेट कंपनियों के बाद अब सरकारी तेल कंपनियां भी इसी तरह का कदम उठा सकती हैं.

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जियोबीपी के पेट्रोल पंपों पर एक ग्राहक को रोजाना अधिकतम 50 लीटर डीजल देने की लिमिट लगाई गई है. वहीं, नायरा एनर्जी के पंपों पर यह लिमिट 70 लीटर से 200 लीटर तक है. अलगअलग पंपों पर लिमिट अलग हो सकती है. अब इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन यानी आईओसी, भारत पेट्रोलियम यानी बीपीसीएल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम यानी एचपीसीएल भी डीजल की बिक्री पर मात्रा की लिमिट लगा सकती हैं.
आखिर डीजल पर लिमिट लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले डीजल और बल्क कंज्यूमर को मिलने वाले डीजल की कीमत में बड़ा अंतर आ गया है. पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत मई से नहीं बदली है, जबकि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.
वहीं, बड़े यानी बल्क कंज्यूमर को मिलने वाले डीजल की कीमत इंटरनेशनल क्रूड की कीमतों के हिसाब से ज्यादा तेजी से बदली है. दोनों के बीच कीमत का अंतर करीब 40 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. ऐसे में बड़े ग्राहक पेट्रोल पंप से सस्ता डीजल खरीदने लगे हैं. सस्ते में डीजल मिलने से जमाखोरी भी बढ़ने की आशंका रहती है. इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए प्राइवेट कंपनियों ने ये कदम उठाए हैं.
कौनकौन खरीद रहा है ज्यादा डीजल?
बल्क कंज्यूमर में फैक्ट्रियां, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, टेलीकॉम कंपनियां, होटल, मॉल, डेटा सेंटर और अस्पताल शामिल हैं. इनमें से कई जगह मशीनरी या बिजली के बैकअप के लिए डीजल जनरेटर का इस्तेमाल होता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बड़े ग्राहक पेट्रोल पंपों से एक बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल खरीद रहे हैं. यह मात्रा सामान्य कार या दूसरे वाहन मालिकों की जरूरत से कई गुना ज्यादा है.
पेट्रोल पंपों पर स्टॉक का दबाव
जब बड़े ग्राहक पेट्रोल पंपों से इतनी ज्यादा मात्रा में डीजल खरीदते हैं तो वहां मौजूद स्टॉक तेजी से कम हो जाता है. हर पेट्रोल पंप पर डीजल रखने की क्षमता तय होती है और नया स्टॉक पहुंचने में कम से कम कुछ दिन लग सकते हैं.
इसी वजह से जियोबीपी और नायरा एनर्जी ने बिक्री की मात्रा सीमित करना शुरू किया है. कंपनियों का कहना है कि इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों के लिए डीजल की उपलब्धता बनाए रखना है.
देश में सबसे ज्यादा पंप सरकारी कंपनियों के भारत में कुल करीब 1.04 लाख पेट्रोल पंप हैं. इनमें सरकारी तेल कंपनियों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. इंडियन ऑयल के करीब 43,289 पेट्रोल पंप हैं. बीपीसीएल के करीब 25,587 और एचपीसीएल के करीब 25,238 आउटलेट हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वहीं जियोबीपी के 2,227 और नायरा एनर्जी के करीब 7,105 आउटलेट हैं.
अगर डीजल का सस्ता रिटेलबुल्क प्राइस गैप आगे भी बना रहता है तो सरकारी कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर भी बड़े ग्राहकों की डीजल खरीद बढ़ सकती है. ऐसे में इन कंपनियों के सामने भी बिक्री की मात्रा सीमित करने का विकल्प आ सकता है.
जियोबीपी ने क्या कहा?
जियोबीपी ने कहा है कि उसके सभी मोबिलिटी स्टेशन चल रहे हैं और वहां पर्याप्त फ्यूल स्टॉक मौजूद है. कंपनी के मुताबिक, मौजूदा डिमांड को देखते हुए फ्यूल की उपलब्धता को मैनेज करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
कंपनी ने कहा कि खासकर इंडस्ट्रियल और नॉनट्रांसपोर्ट इस्तेमाल के लिए डिमांड बढ़ने को देखते हुए ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि मोबिलिटी और ट्रांसपोर्ट के लिए आने वाले ग्राहकों को भी फ्यूल उपलब्ध कराया जा सके.
आम ग्राहक पर क्या असर होगा?
फिलहाल यह लिमिट मुख्य रूप से ज्यादा मात्रा में डीजल खरीदने वाले ग्राहकों के लिए चिंता का विषय है. सामान्य वाहन मालिकों की रोजमर्रा की डीजल जरूरत आमतौर पर इन लिमिट से काफी कम होती है.
हालांकि, अगर बड़े ग्राहक लगातार पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदते रहे तो कंपनियां बिक्री पर और सख्त लिमिट लगा सकती हैं. इसका मकसद पेट्रोल पंपों पर डीजल का स्टॉक बनाए रखना और आम ग्राहकों के लिए फ्यूल की उपलब्धता सुनिश्चित करना होगा.



