भारततिब्बत सीमा पुलिस यानी ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर की टिप्पणी के बीच भारत के पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का एक बयान चर्चा में है. भारतचीन सीमा विवाद को लेकर जनरल नरवणे ने कहा कि गलवान संघर्ष ने चीन को यह संदेश दे दिया कि सीमा विवाद का सैन्य समाधान उसके लिए अब विकल्प नहीं रह गया है. उनके मुताबिक, भारत ने साफ कर दिया है कि बल प्रयोग के जरिए एकतरफा तरीके से सीमा बदलने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी.

22 अक्टूबर 2026 को पुणे में आईटी और बैंकिंग क्षेत्र के पेशेवरों की एक सभा को संबोधित करते हुए पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा का निर्धारण अब भी विवादित है… दोनों देशों के बीच करीब 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर अलगअलग धारणाएं हैं… ऐसे में जिन इलाकों में दोनों देशों की सीमा संबंधी समझ अलगअलग है, वहां टकराव की आशंका बनी रहती है और बनी रहेगी.

गलवान संघर्ष से क्या सबक मिला?

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि गलवान की घटना भारतचीन सीमा पर हुए टकरावों में से एक थी, लेकिन इसके बाद भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी. उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी जगह पर डटे रहकर यह संदेश दिया कि सीमा को एकतरफा तरीके से बदलने के लिए बल प्रयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा.

जनरल नरवणे के मुताबिक, गलवान के बाद भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और स्थिति को सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर मजबूती मिली. नरवणे ने इस बात पर भी जोर दिया कि सीमा विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए तलाशना चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि बल प्रयोग को पहला विकल्प नहीं, बल्कि आखिरी रास्ता होना चाहिए.

बॉर्डर और बाउंड्री में क्या है अंतर?

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारतचीन सीमा विवाद को समझाते हुए बॉर्डर और बाउंड्री के बीच अंतर बताया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा आम तौर पर स्पष्ट रूप से निर्धारित और मान्यता प्राप्त होती है, जबकि भारत और चीन के बीच सीमा का निर्धारण पूरी तरह स्पष्ट और दोनों देशों को समान रूप से स्वीकार नहीं है.. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसी वजह से कई इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC को लेकर दोनों देशों की धारणाएं अलगअलग हैं.

जनरल नरवणे के मुताबिक, इतनी लंबी सीमा पर ऐसे क्षेत्र होना स्वाभाविक है, जहां दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा कहां से गुजरती है.. ऐसे इलाकों में आमनासामना और टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है.

बातचीत के जरिए समाधान पर जोर

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की व्यवस्था का भी जिक्र किया.. भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी इस प्रक्रिया में विशेष प्रतिनिधि हैं.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत पहले होती रही थी, लेकिन लंबे समय तक यह प्रक्रिया ठहर गई थी…अब इसे फिर से गति मिली है. नरवणे ने हालिया बातचीत में डिलिमिटेशन यानी सीमा के स्पष्ट निर्धारण से जुड़े मुद्दे का जिक्र होने को महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में डिलिमिटेशन पहला कदम है.

ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत ने इस कार्रवाई के जरिए यह संदेश दिया कि वह अपनी सुरक्षा से जुड़े मामलों में जरूरत पड़ने पर निर्णायक कदम उठा सकता है… भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को इसलिए रोका, क्योंकि उसने अपने निर्धारित उद्देश्य हासिल कर लिए थे. उन्होंने कहा कि अभियान को आगे जारी रखना संभव था, लेकिन तब उसे कब रोकना है, यह फैसला पूरी तरह भारत के नियंत्रण में नहीं रहता.

ITBP DG ने क्या कहा था?

पूर्व सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमनासामना होने की खबरें सामने आई हैं. ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में ITBP कर्मियों के सम्मान समारोह के दौरान कहा कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमनेसामने आए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति अब भी जारी है.

ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने सीमा पर तैनात ITBP की नवगठित शौर्य कमांडो बटालियन की भूमिका की सराहना की. उन्होंने कहा कि इन कमांडो ने मौजूदा टकराव के दौरान प्रभावी भूमिका निभाई है. उनके मुताबिक, ITBP की ताकत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है और इस क्षमता को आगे बढ़ाने की जरूरत है.