तारिक रहमान का पीएम बनते ही बांग्लादेश में जो कुछ भी बदलाव देखने को मिल रहा है वो इस बात की ओर साफ इशारा कर रहा है कि जल्द ही बांग्लादेश से भारत विरोधी और नफरती एजेंडा खत्म होने वाला है। खासकर जिस तरह से अंतरिम सरकार का मुखिया बनकर यूनुस ने भारत विरोधी माहौल को हवा दी और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने का काम किया है। उस पर नकेल कसने का काम शुरू हो गया है। खासकर तारिक रहमान ने यूनुस के उन फैसलों को पलटना शुरू कर दिया है जिन्होंने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में खटास पैदा की है। अब खबर है कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान लिए गए 100 से ज्यादा फैसले रद्द करने की बड़ी तैयारी कर ली गई है। यूनुस सरकार ने अंतरिम पावर का इस्तेमाल करते हुए डेढ़ साल में 132 अध्यादेश जारी किए। अब इन अध्यादेशों को अगर 25 दिन के भीतर पास नहीं कराया जाता तो वह सभी रद्द हो जाएंगे।
बांग्लादेश में जिन अध्यादेश के रद्द होने की बात कही जा रही है उनमें कुछ भारत तो कुछ शेख हसीना को लेकर है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक तारिक रहमान की नई सरकार कुछ फैसलों को संसद से पास कराने की तैयारी में है। ऐसे में अधिकांश फैसले अपने आप रद्द हो जाएंगे। इधर यूनिस के जाते ही भारत ने भी बांग्लादेश से संबंध सुधारने की कायमत शुरू कर दी है। इसी कड़ी में भारत ने वीजा सर्विस फिर से शुरू करने का फैसला किया है। 17 दिसंबर को भारत ने वीजा सर्विस बंद कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद यूनुस की सरकार ने सुधार शक्ति और विदेशी रिश्तों में संबंधित कुल 132 अध्यादेश जारी किए थे। अब तारिक रहमान की पार्टी इन सभी अध्यादेशों की समीक्षा कर रही है। सुधार से जुड़े सभी अध्यादेश रद्द किए जाएंगे। इसके अलावा उन अध्यादेशों को भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा जिसके कारण विवाद होंगे।
शेख हसीना की पार्टी से बैन को भी हटाया जा सकता है क्योंकि चुनाव के बाद आवामी लीग की कई जिलों में एक्टिविटी फिर से शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि आवामी लीग विपक्षी राजनीति में सक्रिय रहेगी। जुलाई विद्रोह से जुड़े कुछ अध्यादेशों की भी समीक्षा की जा रही है। इसे भी बदला जा सकता है। पार्टी के सांसदों ने शपथ ग्रहण के दौरान संविधान सुधार सदस्य के रूप में शपथ नहीं ली। जुलाई चार्टर को लागू करने की यह पहली कवायद थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ जो कि यूनस के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहाउद्दीन चौधरी के मुताबिक बीएनपी के सदस्य सांसद चुनकर आए हैं। फैसला संसद में होगा। जुलाई चार्टर संविधान में संशोधन का एक प्रस्ताव है। इसके तहत बांग्लादेश में कोई भी शख्स दो बार से ज्यादा या 10 साल से ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठ सकता।





