सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस और प्रशासन के खिलाफ कई सीनियर वकील एक साथ खड़े हुए हैं. मामला 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन, लोगों को हिरासत में लेने, मेट्रो स्टेशन बंद करने और इंटरनेट सेवाएं रोकने से जुड़ा है. इस मामले में 11 अक्टूबर को जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने विशेष सुनवाई हुई. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस कानूनी लड़ाई में पुलिस के खिलाफ 146 वकील शामिल हुए.

याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट के.के. वेणुगोपाल, कपिल सिब्बल, एन. हरिहरन, गोपाल शंकरनारायणन, डॉ. मेनका गुरुस्वामी, शादान फरासत, डॉ. मोनिका गुसाईं, शोएब आलम, संजय हेगड़े और अरुंधति काटजू समेत कई बड़े वकील पेश हुए. इनके अलावा शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, चांदनी कुरैशी, अनस तनवीर, अपराजिता जामवाल, अपार गुप्ता, पी.वी. दिनेश और अवनी सिंह समेत अन्य अधिवक्ताओं ने भी याचिकाकर्ताओं और मामले में दखल देने वालों की ओर से पक्ष रखा. वहीं, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू समेत 11 वकीलों ने पक्ष रखा.

दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले प्रमुख वकील

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकीलों और सीनियर एडवोकेटओं की एक लंबी फौज कोर्ट में मौजूद रही:

  1. डॉ. मेनका गुरुस्वामी : इन्होंने मुख्य रूप से अवमानना और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं की अगुआई की.
  2. कपिल सिब्बल : पुलिसिया कार्रवाई और नागरिक अधिकारों के हनन के खिलाफ बहस की.
  3. के.के. वेणुगोपाल : कोर्ट के आदेशों की अवहेलना और पाबंदियों पर सवाल उठाए.
  4. गोपाल शंकरनारायणन : सार्वजनिक परिवहन पर पूरी तरह रोक लगाने का विरोध किया.
  5. एन. हरिहरन : दिल्ली में आवाजाही पर लगी रोक को असंवैधानिक बताया.
  6. शादान फरासत, शोएब आलम, संजय हेगड़े, डॉ. मोनिका गुसैन और अरुंधति काटजू : इन्होंने भी नागरिकों की स्वतंत्रता और अवैध हिरासत के खिलाफ दलीलें दीं.
  7. याचिकाकर्ता खुद: शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने इनपर्सन याचिका पेश की.

इसके अलावा 139 अन्य वकील याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में पेश हुए.

सभी वकीलों की लिस्ट

  1. डॉ. मेनका गुरुस्वामी
  2. चांद कुरैशी
  3. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी
  4. राकेश कुमार
  5. प्रदीप कुमार यादव
  6. पूजा शिल्पकार
  7. प्रियेंदु राघव मिश्रा
  8. विशाल कुमार
  9. तैयब खान सलमानी
  10. हरीश लोढ़ी
  11. मुजाहिद अहमद
  12. मोहित यादव
  13. इमरान सिद्दीकी
  14. शाहिद अली सिद्दीकी
  15. गौरव यादव
  16. दविंदर पाल कौर
  17. मोहम्मद शहजाद अंसारी
  18. शहजाद नकवी
  19. आरिफ अली
  20. अंजलि कुमारी
  21. दीपक यादव
  22. संजय हेगड़े
  23. देवव्रत
  24. युगंधरा पवार झा
  25. खुशबू साहू
  26. निवेदिता नायर
  27. मीनाक्षी कालरा
  28. अनस तनवीर
  29. गौरव कुमार
  30. एस. मिश्रा
  31. नमन श्रेष्ठ
  32. विशाल तिवारी
  33. अनुज सक्सेना
  34. कपिल सिब्बल
  35. एन. हरिहरन
  36. पी.वी. दिनेश
  37. सुभाष चंद्रन
  38. अनिरुद्ध के.पी.
  39. असीमा मंडला
  40. अपराजिता जामवाल
  41. सिद्धार्थ के.
  42. सुमेध सरकार
  43. निखिल पाहवा
  44. अर्जन सिंह मंडला
  45. मंदाकिनी सिंह
  46. फिडेल टॉम
  47. ध्रुव कुमार
  48. सुनीता मजूमदार
  49. रंजीत कुमार बिस्वास
  50. शाह मोहम्मद
  51. के.के. वेणुगोपाल
  52. गोपाल शंकरनारायणन
  53. पूजा धर
  54. चिन्मयी चंद्रा
  55. विशाल सिन्हा
  56. शौर्य दासगुप्ता
  57. सिद्धार्थ वेणुगोपाल
  58. तुषार श्रीवास्तव
  59. बिजहारिणी गोपाल कृष्णन
  60. ऋषव रंजन
  61. समृद्धि अग्रवाल
  62. दिव्यांश ठाकुर
  63. गंतव्य वशिष्ठ
  64. निवेदिता रानी
  65. अर्पित मालवीय
  66. प्रतिष्ठा अग्रवाल
  67. अपार गुप्ता
  68. आदित्य मिश्रा
  69. आदित्य दुबे
  70. धंडापानी एम.
  71. शोएब आलम
  72. फौजिया शकील
  73. रश्मि सिंह
  74. उज्ज्वल सिंह
  75. खालिद अली
  76. नाजमीन अहमद
  77. सुरित चौबे
  78. इश्ता सिंह
  79. अवि सिंह
  80. अरुंधति काटजू
  81. लवकेश भंभानी
  82. रितिका मीणा
  83. स्पृहा पचौरी
  84. शाश्वती परही
  85. अनमोल गुप्ता
  86. भूमिका यादव
  87. अल्जो जोसेफ
  88. पल्लवी बरुआ
  89. रीना पांडे
  90. नरेंद्र मिश्रा
  91. आकांक्षा तिवारी
  92. तनुश्री भल्ला
  93. आशीष पांडे
  94. मीनू पाधा
  95. मोहसिन आलम
  96. शादान फरासत
  97. डॉ. मोनिका गुसाईं
  98. विपिन
  99. हेमराज मुर्मू
  100. अजीत कुमार एक्का
  101. सुनील रॉय
  102. डिंपल सिंह
  103. कैफी बेनीवाल
  104. प्रणीत प्रणव
  105. भास्कर गौतम
  106. वी.सी. शुक्ला
  107. लक्ष्य एस. पांडे
  108. आस्था सिंह
  109. ईशा बी.
  110. सौरभ मिश्रा
  111. संतोष कुमार
  112. ताडिमल्ला भास्कर गौतम
  113. अलभ्य धमीजा
  114. विशाल कुमार सिंह
  115. विवेक कुमार पांडे
  116. ज्योति तिवारी
  117. कृष्ण कांत दुबे
  118. गोपाल झा
  119. जाह्नवी वर्मा
  120. जैनेंद्र कुमार
  121. महिमा पांडे
  122. सूर्य प्रताप त्यागी
  123. सुनील कुमार
  124. श्रेय रवि दंभारे
  125. धीरज
  126. संजीव कुमार
  127. कुणाल मेहरा
  128. पवन नारंग
  129. पीयूष बेरिवाल
  130. रुचिता श्रीवास्तव
  131. स्पर्श जैन
  132. कीर्ति उप्पल
  133. नीरज
  134. सत्य रंजन स्वैन
  135. शौमेंदु मुखर्जी
  136. राजेश सिंह चौहान
  137. कौटिल्य बिराट
  138. तुषार हजरती
  139. बी.एल. शिवहरे
  140. शिवम कुमार
  141. हिमांशु पाठक
  142. वेदांश आनंद
  143. राहुल जी. तंवर
  144. निशांत कुमार
  145. रचना श्रीवास्तव
  146. आकाश वाजपेयी

वकीलों ने दिल्ली पुलिस पर क्या आरोप लगाए?

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया. आरोपों के मुताबिक, दिल्ली में 45 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन बंद किए गए. इनमें जीटीबी नगर और विश्वविद्यालय जैसे स्टेशन भी शामिल थे. नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन बंद रखने, इंटरनेट सर्विस ठप करने और शहर में कर्फ्यू जैसा माहौल बनाने के आरोप भी लगाए गए.

डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने करीब 7,000 लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने का दावा किया. वकीलों ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू करने का नोटिस बोर्ड लगाया गया था. इससे वकीलों और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई गई.

सरकार ने क्या सफाई दी?

सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया. उसका कहना था कि कानूनव्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली के 303 में से 45 मेट्रो स्टेशन अस्थायी रूप से बंद किए गए थे. सरकार के मुताबिक, बाद में मेट्रो स्टेशन खोल दिए गए और इंटरनेट सेवाएं भी बहाल कर दी गईं.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने पहली नजर में अवमानना का मामला बनता हुआ मानते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया और 13 अक्टूबर तक जवाब मांगा. अदालत ने निर्देश दिया कि मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से चलें, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में न लिया जाए और सुप्रीम कोर्ट के बाहर लगा धारा 163 का बोर्ड हटाया जाए. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपना काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए. मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी.