दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के 3 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान दो पत्रकारों के खिलाफ दर्ज FIR के मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. यह FIR सहायक पुलिस आयुक्त विवेक भगत की शिकायत पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी. पत्रकारों पर कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप है.

जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई. बेंच ने एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर महिला पत्रकार और एक अन्य पुरुष पत्रकार के खिलाफ दर्ज एससी/एसटी एक्ट के मामले में जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. याचिकाकर्ता पत्रकारों ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी है. हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की पुलिस जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

पत्रकारों का याचिका पर नोटिस

सुनवाई के दौरान जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि फिलहाल कोर्ट केवल नोटिस जारी कर रही है. दिल्ली पुलिस का जवाब आने के बाद मामले के गुणदोष के आधार पर सुनवाई की जाएगी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस बीच आपराधिक मामले की जांच जारी रहेगी. जस्टिस मिनी पुष्करणा ने महिला पत्रकार और एक अन्य पुरुष पत्रकार द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी किया. हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी और मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर के लिए तय की है.

क्या है मामला

यह विवाद 3 अक्टूबर को जंतरमंतर / बूटा सिंह चौक के पास एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुआ था, जहां महिला पत्रकार ने एक कार्यकर्ता की हिरासत का वीडियो बनाते समय एसीपी विवेक भगत पर अभद्र व्यवहार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

एसीपी विवेक भगत ने दर्ज कराई FIR

इसके जवाब में एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में महिला और एक पुरुष पत्रकार के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम एवं बीएनएस की धाराओं 221, 356 और 3 के तहत FIR दर्ज की गई थी. उन पर अधिकारी के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का आरोप है. पत्रकारों के वकीलों का तर्क है कि एसीपी द्वारा दर्ज कराई गई यह FIR सिर्फ महिला पत्रकार को डराने और उसके द्वारा दर्ज कराई गई यौन उत्पीड़न की शिकायत से पीछे हटने के लिए दबाव बनाने के मकसद से की गई है.

17 नवंबर को होगी सुनवाई

मंगलवार को जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने दिल्ली पुलिस और एसीपी विवेक भगत को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर तय की है. कोर्ट ने फिलहाल जांच पर रोक लगाने या राहत देने से इनकार करते हुए कहा है कि पुलिस का पक्ष सुनने के बाद ही मामले की सुनवाई गुणदोष के आधार पर की जाएगी.