प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 31 अगस्त और एक सितंबर तक किर्गिस्तान के दौरे पर रहेंगे. वो बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन और वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे. किर्गिस्तान सिर्फ कूटनीति या खेलों के कारण खास नहीं है. यह देश बर्फीले पहाड़ों, नीली झीलों, जंगली जीवों, पुराने सिल्क रूट और खानाबदोश संस्कृति के लिए जाना जाता है.

यह देश कई चीजों के लिए जाना जाता है. जैसे अखरोट का सबसे बड़ा जंगल, बर्फीले तेंदुए और ईगल हंटिंग. आइए, पीएम नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय किर्गिस्तान दौरे के बहाने यहां की 10 बड़ी खूबियां जानते हैं.

1 पहाड़ों का देश

किर्गिस्तान को पहाड़ों का देश कहना गलत नहीं होगा. देश का करीब 94 प्रतिशत हिस्सा पहाड़ी इलाकों से ढका है. यहां की ज्यादातर भूमि तिआन शान पर्वत शृंखला में आती है. तिआन शान का अर्थ है, स्वर्गीय पहाड़. यहां ऊंचेऊंचे बर्फ से ढके पर्वत हैं. गहरी घाटियां हैं. तेज बहती नदियां हैं. गर्मियों में भी कई चोटियों पर बर्फ दिखाई देती है. इसी कारण यह देश ट्रेकिंग, पर्वतारोहण और एडवेंचर टूरिज्म के लिए मशहूर है. किर्गिस्तान में सात हजार मीटर से अधिक ऊंची कई चोटियां हैं. इनमें जेंगिश चोकुसू या विक्ट्री पीक सबसे प्रसिद्ध है. खान तेंगरी और लेनिन पीक भी पर्वतारोहियों को आकर्षित करती हैं. यह इलाका प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी खुले संग्रहालय जैसा है.

देश का करीब 94 प्रतिशत हिस्सा पहाड़ी इलाकों से ढका है. फोटो: Pexels

2 तिआन शान रेंज की बर्फीली दुनिया

तिआन शान पर्वतमाला केवल किर्गिस्तान तक सीमित नहीं है. इसका विस्तार चीन और कजाकिस्तान समेत मध्य एशिया के बड़े हिस्से में है. लेकिन किर्गिस्तान इसका एक प्रमुख केंद्र है. यहां की चोटियां, ग्लेशियर और अल्पाइन घास के मैदान बेहद सुंदर हैं. ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम जल्दी बदल जाता है. एक तरफ तेज धूप होती है. कुछ ही देर में बर्फ या बारिश शुरू हो सकती है.

किर्गिस्तान का अकतला जिला. फोटो: Pexels

तिआन शान के पहाड़ों ने किर्गिस्तान के लोगों की जीवनशैली भी तय की है. यहां के गांवों, पशुपालन, रास्तों और घरों पर पहाड़ी भूगोल का साफ असर दिखता है. कई लोग गर्मियों में ऊंचे चरागाहों की ओर चले जाते हैं. इसे स्थानीय जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है.

3 इस्सिककुल झील: जो जमती नहीं

किर्गिस्तान की सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक पहचान है इस्सिककुल झील. यह विशाल झील पहाड़ों से घिरी हुई है. इसका पानी हल्का खारा है. यह बहुत ऊंचाई पर स्थित है, फिर भी सर्दियों में पूरी तरह नहीं जमती. इसी वजह से इसका नाम इस्सिककुल पड़ा, जिसका अर्थ है गर्म झील. इसे दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित झीलों में गिना जाता है. यह दक्षिण अमेरिका की टिटिकाका झील के बाद बड़ी पर्वतीय झीलों में शामिल है. इसके बारे में अक्सर कई रोचक दावे किए जाते हैं, लेकिन इसे कैस्पियन सागर के बाद दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की पर्वतीय झील कहना सही नहीं होगा. कैस्पियन स्वयं समुद्र कहलाता है और उसका भूगोल अलग है. इस्सिककुल के किनारे पर्यटन का बड़ा केंद्र हैं. यहां लोग तैराकी, बोटिंग, बीच कैम्पिंग और घुड़सवारी का आनंद लेते हैं. दूर दिखते बर्फीले पहाड़ झील के दृश्य को और खूबसूरत बना देते हैं.

इस्सिककुल झील. फोटो: Wikipedia

4 अर्सलानबोब यानी अखरोटों का विशाल जंगल

किर्गिस्तान का अर्सलानबोब क्षेत्र दुनिया भर में अपने अखरोट के जंगलों के लिए जाना जाता है. इसे दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक अखरोट वन क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां अखरोट के साथ सेब, नाशपाती और दूसरे फलदार पेड़ भी मिलते हैं. पतझड़ के मौसम में यह क्षेत्र खास रूप से जीवंत हो जाता है.

स्थानीय परिवार जंगलों में अखरोट इकट्ठा करते हैं. यह केवल प्राकृतिक संपदा नहीं है. यह लोगों की आय और जीवन से भी जुड़ा है. अर्सलानबोब बताता है कि किर्गिस्तान केवल बर्फ और पहाड़ों का देश नहीं है. यहां हरियाली, जंगल और फलदार पेड़ों की भी समृद्ध दुनिया है. यही विविधता इसे दूसरे मध्य एशियाई देशों से अलग बनाती है.

अर्सलानबोब क्षेत्र.

5 यर्ट: चलताफिरता पारंपरिक घर

किर्गिस्तान की खानाबदोश संस्कृति का सबसे बड़ा प्रतीक है यर्ट. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह गोल आकार का पारंपरिक तंबू होता है. इसे लकड़ी के ढांचे, ऊन की चादरों और कपड़े से बनाया जाता है. यर्ट को आसानी से खोला और दूसरी जगह लगाया जा सकता है. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. पुराने समय में पशुपालक समुदाय मौसम और चरागाह के हिसाब से जगह बदलते थे.

यर्ट उनके साथ चलता था. आज भी किर्गिस्तान में यर्ट संस्कृति जीवित है. पर्यटक भी यर्ट में ठहरने का अनुभव लेते हैं. इसके भीतर कालीन, ऊनी सजावट और पारंपरिक बिस्तर होते हैं. यह केवल रहने की जगह नहीं है. यह परिवार, मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है.

यर्ट गोल आकार का पारंपरिक तंबू होता है. फोटो: Pexels

6 ईगल हंटिंग की सदियों पुरानी परंपरा

किर्गिस्तान में गोल्डन ईगल के साथ शिकार करने की परंपरा बहुत पुरानी है. इसे ईगल हंटिंग कहा जाता है. इस कला में शिकारी बड़े शिकारी पक्षी को प्रशिक्षित करता है. पक्षी को स्थानीय तौर पर बर्कुत भी कहा जाता है. पहले यह शिकार और जीवनयापन का साधन था. आज यह संस्कृति और परंपरा के रूप में ज्यादा दिखाई देता है. खास कार्यक्रमों और खेल आयोजनों में ईगल हंटिंग के प्रदर्शन होते हैं. इस परंपरा में घोड़े, पहाड़, शिकारी और बाज या ईगल का तालमेल दिखाई देता है. यह दृश्य किर्गिस्तान की खानाबदोश विरासत को जीवंत बनाता है. हालांकि, आधुनिक समय में वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण के नियमों का सम्मान भी उतना ही जरूरी है.

खास कार्यक्रमों और खेल आयोजनों में ईगल हंटिंग के प्रदर्शन होते हैं. फोटो: Pexels

7वर्ल्ड नोमैड गेम्स का सांस्कृतिक मंच

वर्ल्ड नोमैड गेम्स मध्य एशिया की पारंपरिक खेल संस्कृति का बड़ा उत्सव है. इसमें घुड़सवारी, तीरंदाजी, कुश्ती, पारंपरिक शिकार कला और स्थानीय खेलों का प्रदर्शन होता है. किर्गिस्तान इन खेलों की आत्मा को दुनिया तक पहुंचाने वाले देशों में रहा है. साल 2026 के खेल बिश्केक में आयोजित हो रहे हैं. यह आयोजन 31 अगस्त से शुरू हो रहा है. ये खेल आधुनिक स्टेडियमों की चमक से अलग हैं. यहां परंपरा, घोड़े, ताकत, कौशल और समुदाय की भावना केंद्र में रहती है. यह आयोजन दुनिया को बताता है कि खानाबदोश संस्कृति आज भी प्रासंगिक है.

8 स्नो लेपर्ड का घर

किर्गिस्तान के ऊंचे पहाड़ बर्फीले तेंदुए यानी स्नो लेपर्ड का महत्वपूर्ण आवास हैं. यह दुर्लभ और बेहद शर्मीला जीव है. इसे देख पाना आसान नहीं होता. यह अक्सर दुर्गम, बर्फीले और चट्टानी इलाकों में रहता है. स्नो लेपर्ड पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा है. इसके संरक्षण का मतलब पूरे पर्वतीय पर्यावरण की रक्षा करना है.

किर्गिस्तान के बर्फीले तेंदुए. फोटो: Pexels

किर्गिस्तान में संरक्षित क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों की भूमिका इस दिशा में महत्वपूर्ण है. इस जीव की मौजूदगी देश की जैव विविधता की ताकत दिखाती है. लेकिन जलवायु परिवर्तन, आवास में कमी और अवैध शिकार जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं. इसलिए यह केवल पर्यटन का विषय नहीं, बल्कि संरक्षण की बड़ी जिम्मेदारी भी है.

9 मार्को पोलो भेड़ और दुर्लभ वन्यजीव

किर्गिस्तान में मार्को पोलो भेड़ भी मिलती है. यह अपने बहुत बड़े और घुमावदार सींगों के लिए जानी जाती है. इसका नाम प्रसिद्ध यात्री मार्को पोलो के नाम पर पड़ा है. यह जीव ऊंचे पहाड़ी और ठंडे इलाकों में पाया जाता है. इसे देखना कठिन होता है. इसके अलावा देश में आइबेक्स, भेड़िए, लोमड़ी, शिकारी पक्षी और कई अन्य पहाड़ी जीव भी पाए जाते हैं. किर्गिस्तान का वन्यजीवन उसके भूगोल से जुड़ा है. बर्फीले पहाड़, खुले चरागाह और दूरस्थ घाटियां इन प्रजातियों को घर देती हैं. यही कारण है कि यहां इकोटूरिज्म की बड़ी संभावनाएं हैं.

पीएम मोदी की सोशल मीडिया पोस्ट

Met a group of people who have a close association with India.

This includes prominent diaspora members, those passionate about the environment, Yoga enthusiasts, academics, ITEC alumni, researchers and more.

Happy to see such continuous engagement with India.

One of the pic.twitter.com/xiwRCoFBE9

— Narendra Modi August 31, 2026

10 भारतीय छात्रों और भारत से बढ़ता जुड़ाव

किर्गिस्तान भारतीय छात्रों के बीच मेडिकल शिक्षा के लिए जानापहचाना नाम बन चुका है. यहां कई भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए जाते हैं. कम लागत, विदेशी अनुभव और मेडिकल संस्थानों की उपलब्धता इसके प्रमुख कारणों में गिनी जाती है. लेकिन किसी भी छात्र को दाखिला लेने से पहले विश्वविद्यालय की मान्यता, पाठ्यक्रम, भाषा, हॉस्टल, सुरक्षा और भारत में डिग्री की मान्यता की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए. यह निर्णय केवल फीस देखकर नहीं लेना चाहिए. भारत और किर्गिस्तान के रिश्तों में शिक्षा के साथ संस्कृति, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग भी अहम हैं. प्रधानमंत्री मोदी की बिश्केक यात्रा इसी संपर्क को नई चर्चा देती है. पहाड़ों और झीलों से भरा यह देश भारत के लिए केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि मध्य एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार भी है.

किर्गिस्तान से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य

  • किर्गिस्तान का आधिकारिक नाम किर्गिज गणराज्य है.
  • किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक देश का सबसे बड़ा शहर है.
  • यहां की आधिकारिक मुद्रा किर्गिजस्तानी सोम है.
  • किर्गिज राष्ट्रीय भाषा और रूसी आधिकारिक भाषा है.
  • देश का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,99,951 वर्ग किलोमीटर.
  • इसकी सीमाएं कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और चीन से लगती है.
  • देश का लगभग 94 फीसदी हिस्सा पर्वतीय है, जो मुख्य रूप से तिआन शान पर्वत शृंखला में आता है.
  • कुल जनसंख्या लगभग 73 लाख है.
  • किर्गिस्तान की जीडीपी लगभग 17.5 अरब से 22.6 अरब डॉलर है.
  • यहां प्रति व्यक्ति आय लगभग 2,400 से 3,000 डॉलर है.
  • भारत और किर्गिस्तान के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार लगभग 80 मिलियन से 130 मिलियन डॉलर है.