फुकेट से नई दिल्ली आ रहे एयर इंडिया विमान के हवा में अचानक तीन सौ फुट नीचे आने के कारणों से पर्दा हटता हुआ नजर आ रहा है. विमान के मुख्य पायलट के गांजा फूंककर विमान चलाने की पुष्टि दूसरे डोप टेस्ट में भी हुई है. पायलट का एक टेस्ट पहले भी हुआ था. उसमें भी पुष्टि हुई थी. इस हादसे में करीब दर्जन भर यात्री और कुछ क्रू मेम्बर भी घायल हुए थे. विमान में सवार यात्री डर गए थे. चीखपुकार मच गई थी. इस घटना के वीडियो भी वायरल हुए थे. आइए, जानते हैं कि नशे में हवाई जहाज उड़ाने वाले पायलट के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई संभव है?

पायलट की नौकरी सीधे यात्रियों की जान से जुड़ी होती है. इसलिए भारत में पायलट के लिए नशा, गांजा, सेडेटिव और नींद की दवाओं के मामले में नियम बहुत सख्त हैं. अगर कोई पायलट गांजा या ऐसी दवा लेने के बाद विमान उड़ाता है, तो उसकी नौकरी जा सकती है. उसका लाइसेंस निलंबित या रद्द हो सकता है. गंभीर स्थिति में आपराधिक मामला भी बन सकता है.

DGCA का मुख्य सिद्धांत क्या है?

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए उड़ान सुरक्षा को सबसे ऊपर रखता है. नियमों का मूल सिद्धांत साफ है. कोई भी पायलट ऐसे पदार्थ के प्रभाव में उड़ान नहीं भर सकता, जिससे उसकी सोच, निर्णय, प्रतिक्रिया या विमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो. इसमें शराब, गांजा, अफीम, कोकीन, सेडेटिव, बेंजोडायजेपाइन और कुछ नींद की दवाएं शामिल हो सकती हैं. केवल नशे में दिखना जरूरी नहीं है. यदि जांच में प्रतिबंधित पदार्थ मिलता है, तो भी कार्रवाई संभव है.

गांजा का सीधा असर निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ सकता है. फोटो: Pexels

गांजा मिलने पर क्या हो सकता है?

गांजा एक मनोसक्रिय पदार्थ है. इसका असर ध्यान, प्रतिक्रिया समय और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है. उड़ान के दौरान यह जोखिम बहुत गंभीर माना जाता है. यदि पायलट का ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट संदिग्ध आता है, तो उसे पहले ड्यूटी से हटाया जा सकता है. इसके बाद नमूने की पुष्टि के लिए लैब टेस्ट कराया जाता है. केवल शुरुआती स्क्रीनिंग को अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता. कन्फर्मेटरी टेस्ट पॉजिटिव आने पर मेडिकल रिव्यू ऑफिसर यह देखता है कि परिणाम का कोई वैध मेडिकल कारण तो नहीं है. गांजे के मामले में वैध उपचार का दावा आम तौर पर कठिन हो सकता है, क्योंकि भारत में इसके सेवन और कब्जे पर एनडीपीएस कानून भी लागू होता है.

पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर कैसी कार्रवाई?

डीजीसीए की गाइडलाइन के मुताबिक, पहली बार ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने पर पायलट को तुरंत ड्यूटी से हटाया जा सकता है. उसे उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाती. आगे उसे विशेषज्ञ डॉक्टर, मनोचिकित्सक, काउंसलर या नशामुक्ति कार्यक्रम के पास भेजा जा सकता है. पायलट को पुनर्वास प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है. फिर नेगेटिव ड्रग टेस्ट और मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट की जरूरत हो सकती है. इस अवधि में वह उड़ान ड्यूटी नहीं कर पाएगा. एयरलाइन अपनी सेवा शर्तों के अनुसार निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई या नौकरी समाप्त करने का निर्णय भी ले सकती है.

पहली बार ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने पर पायलट को तुरंत ड्यूटी से हटाया जा सकता है. फोटो: Pexels

दूसरी और तीसरी गलती पर क्या होगा एक्शन?

दोबारा पॉजिटिव पाए जाने पर मामला बहुत गंभीर हो जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी बार उल्लंघन होने पर लाइसेंस को तीन साल तक निलंबित किया जा सकता है. तीसरी बार उल्लंघन होने पर लाइसेंस रद्द होने का खतरा है. लाइसेंस रद्द होना पायलट के करियर के लिए बेहद बड़ा झटका है. इसके बाद कमर्शियल फ्लाइंग में वापसी मुश्किल हो सकती है. एयरलाइन भी सेवा समाप्त कर सकती है.

ड्रग टेस्ट से इनकार करने पर अलग से सजा

टेस्ट से इनकार करना भी गंभीर उल्लंघन माना जाता है. इसे केवल प्रशासनिक देरी नहीं माना जाता. यह सुरक्षा नियमों की अवहेलना है. पहली बार टेस्ट से इनकार करने पर पायलट को ड्यूटी से हटाया जा सकता है. उसे तय समय के भीतर जांच करानी पड़ सकती है. फुकेटदिल्ली की फ्लाइट के पायलट का दो बार टेस्ट होने की जानकारी सार्वजनिक है. नियमों के उल्लंघन पर एक वर्ष तक लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई संभव है. दोबारा इनकार करने पर निलंबन अधिक लंबा हो सकता है. बारबार इनकार या दोबारा पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है.

एयरलाइंस को हर साल दस फीसदी क्रू मेंबर्स का रैंडम डोप टेस्ट करना अनिवार्य है. फोटो: Getty Images

नींद की दवाओं का मामला अलग कैसे है?

हर नींद की दवा गैरकानूनी नहीं होती. कुछ दवाएं डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पायलट दवा लेकर उड़ान भर सकता है. नींद की कई दवाएं सुस्ती पैदा करती हैं. वे प्रतिक्रिया समय धीमा कर सकती हैं. उनसे याददाश्त, संतुलन और निर्णय क्षमता पर असर पड़ सकता है. यही कारण है कि पायलट को बिना डॉक्टर या एविएशन मेडिकल एक्सपर्ट की सलाह के ऐसी दवा नहीं लेने की सलाह दी जाती है. यदि दवा डॉक्टर ने लिखी है, तो पायलट को एयरलाइन और संबंधित मेडिकल अधिकारी को इसकी जानकारी देने का भी नियम है. उसे दवा लेने के बाद तय समय तक खुद को उड़ान ड्यूटी से दूर रखना पड़ सकता है.

प्रिस्क्रिप्शन होने पर क्या राहत मिल सकती है?

किसी दवा के लिए वैध प्रिस्क्रिप्शन होना महत्वपूर्ण तथ्य है. मेडिकल रिव्यू ऑफिसर यह जांच सकता है कि टेस्ट में मिला पदार्थ डॉक्टर की लिखी हुई दवा से जुड़ा है या नहीं. लेकिन प्रिस्क्रिप्शन अपने आप बचाव नहीं बनता. असली सवाल यह होगा कि दवा लेने के समय पायलट उड़ान के लिए फिट था या नहीं. अगर दवा के कारण सुस्ती, चक्कर, धीमी प्रतिक्रिया या मानसिक असर था, तो पायलट को उड़ान नहीं भरनी चाहिए थी. इसलिए वैध दवा लेने वाला पायलट भी डीजीसीए की कार्रवाई से पूरी तरह नहीं बच सकते. उन्हें मेडिकल फिटनेस और सुरक्षित ड्यूटी के नियमों का पालन करना होता है.

भारतीय कानून के तहत गांजे पर सजा

गांजे के कब्जे में मिलने, खरीद, बिक्री, परिवहन या सेवन पर एनडीपीएस एक्ट 1985 लागू हो सकता है. सजा पदार्थ की मात्रा और आरोप की प्रकृति पर निर्भर करती है. गांजे के सेवन के मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 के तहत छह महीने तक की जेल, दस हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. यह प्रावधान सामान्य रूप से अन्य नशीले पदार्थों के सेवन के लिए लागू होता है. यदि गांजा बरामद होता है, तो कब्जे की मात्रा के आधार पर सजा बढ़ सकती है. छोटी मात्रा पर एक वर्ष तक की जेल या दस हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. मध्यम मात्रा के मामले में सजा अधिक हो सकती है. वाणिज्यिक मात्रा के मामले में न्यूनतम दस वर्ष की कठोर कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान हो सकता है.

दुर्घटना या यात्रियों को नुकसान होने पर क्या होगा?

यदि नशे या दवा के प्रभाव में पायलट की गलती से विमान हादसा होता है, यात्री घायल होते हैं या किसी की मृत्यु होती है, तो मामला और गंभीर बन सकता है. तब केवल डीजीसीए की लाइसेंस कार्रवाई नहीं होगी. पुलिस जांच, विमान दुर्घटना जांच और अन्य आपराधिक धाराएं भी लग सकती हैं. आरोप लापरवाही, जीवन को खतरे में डालना, गंभीर चोट या मृत्यु से संबंधित हो सकते हैं. सजा घटना के परिणाम और जांच में सामने आए तथ्यों पर निर्भर करेगी.

अनिवार्य है उड़ान से पहले पायलट का टेस्ट

विमान और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डीजीसीए के नियम कड़े हैं. इनमें प्रीफ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य जांच है. पायलट के विमान के कॉकपिट में जाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसने शराब का सेवन न किया हो. अगर रीडिंग 0.000 से ऊपर आती है, तो उसे तुरंत ड्यूटी से हटा दिया जाता है. भारत से उड़ान भरने वाली सभी कमर्शियल उड़ानों के लिए यह टेस्ट अनिवार्य है.

नियमों के अनुसार, एयरलाइंस को हर साल अपने कम से कम दस फीसदी क्रू मेंबर्स का रैंडम डोप टेस्ट करना अनिवार्य है. इसमें यूरिन का नमूना लिया जाता है ताकि गांजा, कोकीन, या नींद की दवाओं जैसे पदार्थों की उपस्थिति का पता लगाया जा सके. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पायलट को स्वयं भी एक घोषणा पत्र देना होता है कि उसने पिछले 12 घंटों के भीतर किसी भी प्रकार की शराब का सेवन नहीं किया है. वह किसी भी ऐसी दवा का सेवन नहीं कर रहा है जिससे उसकी एकाग्रता प्रभावित हो.