: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जंतरमंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने के मामले में दोनों की न्यायिक हिरासत 2 दिन और बढ़ा दी गई है।

5 दिन जेल में रहने के बाद कोर्ट में हुई थी पेशी

पांच दिन की जेल अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को दोनों को मंदिर रोड के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। दोनों को पहले तिहाड़ जेल भेजा गया था।

Saurabh Dasऔर Ashutosh Ranka की कस्टडी 2 दिन बढ़ी, कोर्ट का फैसला!

सौरभ दास और आशुतोष रांका मामले में दिल्ली पुलिस को बड़ी अदालत से राहत मिली है। दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल की गई याचिका और मांग को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने दोनों आरोपियों की पुलिस हिरासत 2 दिन के… pic.twitter.com/tQFa2sljNb

— Bansal News Official October 19, 2026

जंतरमंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने का मामला

13 अक्टूबर की सुबह सख्त नाकेबंदी के बावजूद , और अजिंक्य शिंदे अपने 11 समर्थकों के साथ जंतरमंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुस गए थे। इसके बाद संसद मार्ग थाना पुलिस ने CJP के तीनों नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की अलगअलग धाराओं में केस दर्ज किया था।

बेल बॉन्ड की शर्त तोड़ने पर भेजे गए थे जेल

14 अक्टूबर को तीनों नेताओं को SEM कोर्ट में पेश किया गया था। पिछली जमानत की शर्तें नहीं मानने पर कोर्ट ने आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया था। यह कार्रवाई 11 अक्टूबर के बेल बॉन्ड की शर्तें नहीं मानने पर की गई थी।

कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच हुई बहस

19 अक्टूबर को 5 दिन की जेल अवधि पूरी होने के बाद दोनों को दोबारा SEM कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान मामले की सुनवाई कर रहे SEM यानी ACP ऋतुराज को धमकी मिलने का मुद्दा भी उठा। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पुलिस ने कोर्ट में लंबी बहस की और दोनों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। बचाव पक्ष के वकीलों ने इसका विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने हिरासत 2 दिन और बढ़ा दी।

SEM को धमकी मिलने पर दर्ज हुई NCR

इस मामले की सुनवाई कर रहे SEM को धमकी मिलने की बात सामने आई है। इस संबंध में उन्होंने संसद रोड थाने में NCR दर्ज कराई है।

क्या होती है NCR ?

उन मामलों में दर्ज की जाती है, जिन्हें कानून के तहत कम गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं कर सकती और न ही आरोपी को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है। आगे की कार्रवाई के लिए शिकायतकर्ता को न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में जाना होता है और अदालत के आदेश के बाद पुलिस जांच शुरू कर सकती है।

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दिल्ली में ही ठहरे हैं CJP संस्थापक अभिजीत दिपके

आशुतोष रांका और सौरव दास के जेल में रहने के कारण के संस्थापक अभिजीत दिपके अभी में ही ठहरे हुए हैं। दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत 2 दिन बढ़ाए जाने के बाद अब वे 2 दिन और जेल में रहेंगे।

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