ओडिशा के कंधमाल जिले की 22 वर्षीय महिला ने ब्रह्मपुर स्थित सरकारी एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज में दुर्लभ जुड़े हुए जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है. दोनों बच्चे लड़के हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों के दो सिर और दो गर्दन हैं, लेकिन शरीर का धड़ एक ही है. जन्म के समय दोनों का कुल वजन 2.250 किलोग्राम था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बच्चों की हालत गंभीर है और उन्हें नवजात गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया है.

एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. मानस रंजन साहू ने बताया कि दोनों बच्चों का शरीर कई मायनों में अलग है, जबकि कुछ महत्वपूर्ण अंग साझा हैं. बच्चों के दो सिर और दो गर्दन हैं. उनके शरीर का धड़ एक है, लेकिन रीढ़ की हड्डियां दो हैं.

डॉक्टरों के अनुसार, दोनों बच्चों का हृदय और लिवर भी एक ही है. उनके हाथ और पैर एकएक जोड़ी हैं. इसके अलावा, दोनों का जननमूत्र मार्ग भी साझा है. बच्चों के बाहरी जननांग पुरुषों जैसे हैं, लेकिन उनके शरीर में गुदा का छिद्र नहीं है. डॉक्टरों ने इस स्थिति को बेहद दुर्लभ और जटिल बताया है. शरीर के महत्वपूर्ण अंग साझा होने के कारण बच्चों के इलाज में कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं.

सांस लेने में परेशानी, बचने की संभावना बेहद कम

डॉ. मानस रंजन साहू के मुताबिक, दोनों बच्चों को सांस लेने में परेशानी हो रही है. उनकी जटिल स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जीवित बचने की संभावना बेहद कम बताई गई है. फिलहाल उन्हें एनआईसीयू में रखकर लगातार निगरानी की जा रही है.

ऐसे मामलों में बच्चों की स्थिति का आकलन करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है. खासकर जब हृदय और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग साझा हों, तो इलाज और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के लिए विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है. हालांकि, अस्पताल की ओर से बच्चों के इलाज और उनकी स्थिति पर नजर रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है.

इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम बनाई गई

एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की अधीक्षक डॉ. सुदीपा दास ने बताया कि बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टरों की एक विशेष टीम बनाई गई है. उन्होंने कहा कि इस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में संभवतः इस तरह का मामला पहली बार सामने आया है.

डॉक्टरों की टीम बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए इलाज कर रही है. फिलहाल उनकी सांस लेने में हो रही परेशानी और शरीर के साझा अंगों से जुड़ी जटिलताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

क्या होते हैं जुड़े हुए जुड़वा बच्चे?

जुड़े हुए जुड़वा बच्चे तब विकसित होते हैं, जब गर्भ में एक ही निषेचित अंडाणु से बनने वाले जुड़वा भ्रूण पूरी तरह अलग नहीं हो पाते. इसके कारण जन्म के समय उनके शरीर के कुछ हिस्से या अंग आपस में जुड़े रह जाते हैं. इसे एक दुर्लभ चिकित्सकीय स्थिति माना जाता है.

जुड़े हुए जुड़वा बच्चों की स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि उनके शरीर के कौनकौन से अंग साझा हैं और उनकी संरचना कैसी है. कुछ मामलों में सर्जरी के जरिए उन्हें अलग करना संभव हो सकता है, लेकिन जब हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंग साझा हों, तो इलाज बेहद जटिल हो जाता है.