Saturday, February 21, 2026
Dharam

सिर्फ रात कोˈ ही क्यों निकाली जाती है किन्नरों की शव यात्रा, वजह जानकर चौंक जायेंगे आपˌ

सिर्फ रात कोˈ ही क्यों निकाली जाती है किन्नरों की शव यात्रा, वजह जानकर चौंक जायेंगे आपˌ
सिर्फ रात कोˈ ही क्यों निकाली जाती है किन्नरों की शव यात्रा, वजह जानकर चौंक जायेंगे आपˌ

किन्नरों को हमारे समाज में तीसरे लिंग यानी ‘थर्ड जेंडर’ का दर्जा प्राप्त है। हम सभी ने देखा है कि इनकी जिंदगी हमारी तरह सामान्य नहीं होती। इनके जीवन जीने के तरीके, रहन-सहन सब कुछ अलग-अलग होते हैं। शायद आप इनकी रहस्यमयी दुनिया के बारे में जानते भी न हों, इसलिए आज हम आपको इनकी दुनिया से रूबरू कराएंगे जहां बहुत से रिवाज है। क्या आप जानते हैं जन्म से लेकर मरण तक इनके अलग-अलग नियम है। जी हां, आपने इनके जन्म की खबरें देखी होंगी या इन घटनाओं से वाकिफ होंगे लेकिन क्या कभी आपने किसी किन्नर की शव यात्रा देखी है..?

शायद नहीं। है न… ऐसा क्यों है यह हम आपको बताते हैं। शव को सभी से छुपा कर रखा जाता है। जी हां, जहां ज्यादातर शव यात्रा दिन में निकाली जाती है, वहीं किन्नरों की शव यात्रा रात में निकाली जाती है। दरअसल, किन्नरों की शव यात्रा रात में इसलिए निकाली जाती है ताकि कोई इंसान इनकी शव यात्रा ना देख सके। ऐसा क्यों किया जाता है यहां जान लें… किन्नर समाज में ऐसा रिवाज रहा है। साथ में ये भी मान्यता है कि इस शव यात्रा में इनके समुदाय के अलावे दूसरे समुदाय के किन्नर भी मौजूद नहीं होने चाहिए। किन्नर समाज में किसी की मौत होने पर ये लोग बिल्कुल भी मातम नहीं मनाते, क्योंकि इनका रिवाज है कि मरने से उसे इस नर्क वाले जीवन से छुटकारा मिल गया।

इसलिए ये लोग चाहे जितने भी दुखी हों, किसी अपने के चले जाने से मौत पर खुशियां ही मनाते हैं। ये लोग इस खुशी में पैसे भी दान में देते हैं। ये कामना करते हैं कि ईश्वर जाने वाले को अच्छा जन्म दे। सबसे अजीब बात तो ये है कि ​किन्नरों के समाज में किसी की मौत होने पर ये लोग शव को अंतिम संस्कार से पहले जूते-चप्पलों से पीटते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा करने से मरने वाले के सारे पापों का प्रायश्चित हो जाता है। हालांकि किन्नर हिन्दू धर्म को मानते हैं, लेकिन ये लोग शव को जलाते नहीं हैं बल्कि उन्हें दफनाते हैं।

ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।
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