Himachal Se: तकिया का इस्तेमाल लगभग हर घर में किया जाता है। अच्छी नींद और गर्दन को आराम देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग तकिया को काफी लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि तकिया कितने समय के बाद बदल लेना चाहिए। दरअसल, कई बार ऊपर से साफ और ठीक दिखने वाली तकिया के अंदर धूल, पसीना, एलर्जी पैदा करने वाले कण और बैक्टीरिया जमा होने लगते हैं। जिसके चलते पुराना तकिया धीरेधीरे आपकी नींद और सेहत दोनों पर असर डाल सकता है।

रात में सोते समय शरीर से निकलने वाला पसीना, बालों का तेल और त्वचा की मृत कोशिकाएं तकिए में समा जाती हैं। समय के साथ इनमें धूल के कण और कीटाणु पनपने लगते हैं। ऐसे में तकिया एलर्जी, गर्दन दर्द और स्किन प्रॉब्लम्स की वजह भी बन सकता है। कई लोगों को सुबह उठते ही गर्दन में अकड़न, छींक आना या सिरदर्द जैसी समस्या भी रहती है, जिसकी वजह आपका पुराना तकिया भी हो सकता है। समय के साथ तकिया की रूई भी खराब होने लगती है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कितने समय बाद तकिया को बदल लेना चाहिए:
कितने साल में बदलना चाहिए तकिया
वैसे तो माना जाता है कि तकिया को हर 1 से 2 साल के बीच बदल देना चाहिए। हालांकि, यह इस बार पर भी निर्भर करता है कि तकिया किस मटेरियल का बना है और उसका इस्तेमाल कितना ज्यादा हो रहा है। कॉटन और फाइबर वाले तकिया थोड़े जल्दी खराब हो सकते हैं। वहीं, मेमोरी फोम या लेटेक्स वाले तकिए थोड़े ज्यादा समय तक चलते हैं।
यह भी ध्यान रखें
इसके अलावा अगर कुछ संकेत दिखे तो भी तकिया बदल लेना चाहिए। जैसे
तकिया दबाने पर वापस अपनी शेप में न आए
तकिया में जगहजगह गांठें पड़ जाएं
अगर सोने के बाद गर्दन या कंधे में दर्द महसूस हो तो भी बदल लेना चाहिए
अगर तकिए से बदबू आए तो तुरंत बदल लें
तकिया लगाकर सोने के बाद बारबार एलर्जी या छींक की समस्या हो तो भी बदल लेना चाहिए।
कैसे करें सफाई
तकिया को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने के लिए उसकी नियमित सफाई बेहद जरूरी है। इसके लिए कवर को 23 दिनों में बदल देना चाहिए और तकिए दो हफ्ते में एक बाद धूप जरूर दिखाएं। इससे नमी और बैक्टीरिया कम हो सकते हैं। वहीं, तकिया से धूल निकाले के लिए धूप में रखकर डंडे से थोड़ी देर तक थप थपा दें। इससे धूल और अन्य छोटे कड़ों को निकल सकते हैं।



