DelhiDehradun Expressway: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में दिल्लीदेहरादून एक्सप्रेसवे एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवादों में आ गया है. हाल ही में हुई बारिश के बाद बागपत के गांगनौली गांव के पास एक्सप्रेसवे के किनारे बनाए गए मिट्टी के पुस्तों में कई जगह बड़ेबड़े गड्ढे बन गए हैं. मिट्टी के कटाव के कारण कुछ स्थानों पर सुरक्षा रेलिंग भी धंस गई है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बढ़ गई है.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
स्थानीय ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त हिस्सों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया. वीडियो वायरल होने के बाद NHAI के अधिकारियों में हड़कंप मच गया. मौके की स्थिति का जायजा लेने की प्रक्रिया शुरू की गई.
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
यह पहली बार नहीं है, जब इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं. इससे पहले शामली जिले की सीमा में भी बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े गड्ढे मिलने का मामला सामने आया था. उस समय NHAI ने मामले की जांच कर निर्माण एजेंसी और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी. लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए थे और विभागीय कार्रवाई भी की गई थी.
करीब 12 हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार 213 किलोमीटर लंबा, छह लेन वाला एक्सेस कंट्रोल्ड दिल्लीदेहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर देश की प्रमुख सड़क परियोजनाओं में शामिल है. इसका उद्घाटन 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय लगभग छह घंटे से घटकर करीब तीन घंटे रह गया है.
NHAI ने दी सफाई, जल्द होगा सुधार कार्य
मामले पर NHAI के एक्सईएन अंकित कुमार ने बताया कि जहां मिट्टी का कटाव हुआ है, वहां स्लोप प्रोटेक्शन का कार्य अभी पूरा नहीं हुआ था. लगातार बारिश के कारण मिट्टी बह गई, जिससे यह स्थिति बनी. उन्होंने कहा कि प्रभावित स्थानों पर जल्द ही मिट्टी भराई, स्लोप प्रोटेक्शन और कंक्रीट का कार्य पूरा कराया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो.
हालांकि, लगातार दूसरी बार सामने आई ऐसी घटनाओं ने एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी और महंगी परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह सीधे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है.



