Nepal Flood Update: में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के 10 दिन बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अब भी 5,300 से ज्यादा लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,259 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि राहत और बचाव टीमों ने 12,038 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।

मुश्किल वक्त में भारत लगातार नेपाल की मदद कर रहा है। गुरुवार रात भारत ने राहत सामग्री की एक और खेप नेपाल भेजी। दो C130J विमानों के जरिए करीब 21.5 टन मानवीय सहायता काठमांडू पहुंचाई गई। इसमें मेडिकल सामान के साथ फोरेंसिक किट और दूसरे जरूरी उपकरण भी शामिल हैं।
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के नौ दिन बाद राहत और बचाव अभियान में बड़ी कामयाबी मिली है। त्रिशूली3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाल लिया गया है। रेस्क्यू किए गए लोगों की पहचान मैकेनिकल फोरमैन संजय साह और मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महार्जन के रूप में हुई है। शुक्रवार को पहले संजय साह को सुरंग से बाहर निकाला गया। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने कबीर महार्जन को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
सुरंग के अंदर से सुनाई दी इंसानी आवाज
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान टीम को सुरंग के अंदर से इंसानी आवाजें सुनाई दीं। इसके बाद बचाव दल ने अंदर फंसे लोगों से संपर्क करने की कोशिश की। टीम ने उन्हें भरोसा दिलाया कि घबराने की जरूरत नहीं है और उन्हें बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अंदर से जवाब मिलने के बाद नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने बचाव अभियान और तेज कर दिया। काफी मशक्कत के बाद दोनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में जुटे
नेपाल के के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 21,402 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। ये टीमें लगातार लापता लोगों की तलाश, बचाव अभियान, राहत सामग्री पहुंचाने और बरामद शवों के प्रबंधन में जुटी हुई हैं।
चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद
बाढ़ के बाद कई इलाकों में शवों की तलाश का अभियान अभी भी जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद किए गए हैं। अब तक मिले शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है। प्रशासन और बचाव दल एक तरफ लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बरामद शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
UN में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठा सकते हैं नेपाल PM
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जलवायु परिवर्तन और इसके कारण पर्वतीय क्षेत्रों पर पड़ रहे असर का मुद्दा उठा सकते हैं। रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शाह ने महासभा में शामिल होने की इच्छा जताई है। इसे लेकर नेपाल के विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पहले शाह ने महासभा में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद कैबिनेट ने विदेश मंत्री शिशिर खनाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया था।
भारत की नई राहत खेप में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण
भारत की ओर से भेजे गए छठे और सातवें राहत विमान गुरुवार रात काठमांडू पहुंचे। दोनों C130J विमानों में कुल 21.5 टन राहत सामग्री थी। इसमें फोरेंसिक किट, मेडिकल उपकरण और दूसरी जरूरी सामग्री शामिल है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि यह सहायता रसुवा फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत और बचाव प्रयासों में भारत के लगातार सहयोग का हिस्सा है।
26 अगस्त से लगातार मदद भेज रहा भारत
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत ने 26 अगस्त को पहला राहत विमान भेजा था। इस विमान से 10 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई थी। इसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं। इसके बाद 27 अगस्त को 37.5 टन, तीसरे विमान से 10 टन और 30 अगस्त को चौथे विमान से 11 टन राहत सामग्री भेजी गई। चौथी खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरणों के साथ DNA विश्लेषण में मदद के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी भेजी गई थी। 2 सितंबर को भारत ने पांचवां राहत विमान नेपाल भेजा। इसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और करीब 5.5 टन जरूरी दवाइयां शामिल थीं।
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बाढ़ की वजहों का पता लगा रहे विशेषज्ञ
भोटेकोशी आपदा के पीछे की वजहों को समझने के लिए नेपाल में जलवायु वैज्ञानिकों, पर्वतीय विशेषज्ञों और हिमनद विशेषज्ञों की टीमें अध्ययन कर रही हैं। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अचानक आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक परिस्थितियों के साथ जलवायु परिवर्तन की कितनी भूमिका रही। वहीं, नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के वितरण के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है। लोगों से मिलने वाली आर्थिक मदद को प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में जमा कराने की व्यवस्था भी की गई है।
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