Fake Currency Racket Busted in Meerut: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को छिन्नभिन्न करने में जुटे एक बेहद खौफनाक और अंतरराज्यीय जाली करेंसी सिंडिकेट का सबसे बड़ा भंडाफोड़ हुआ है, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों, खुफिया महकमों और रिजर्व बैंक तक की रातों की नींद उड़ा दी है. सहारनपुर में मिले जाली नोटों का खतरनाक नेटवर्क अभी सुलझा भी नहीं था कि अब मेरठ के पॉश इलाके सिविल लाइन स्थित एक्सिस बैंक की मुख्य शाखा से 4 लाख रुपये से भी अधिक मूल्य के फर्जी नोटों का जखीरा मिलने से पूरे प्रशासनिक महकमे में मानों भूचाल आ गया है.

जालसाजों के दुस्साहस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सिर्फ 200 और 100 रुपये के जाली नोट ही नहीं, बल्कि 20 और 10 रुपये जैसे छोटे नोटों की फर्जी खेप भी बेधड़क होकर सीधे बैंक के कैश काउंटर तक पहुंचा दी. लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और खौफनाक सवाल यह है कि आखिर इस पूरे खेल के पीछे का मास्टरमाइंड कौन है ?

कौन चला रहा है जाली नोटों का यह नेटवर्क?

कौन है वो ‘अदृश्य आका’ जो पर्दे के पीछे बैठकर जाली नोटों का यह नेटवर्क चला रहा है और पश्चिमी यूपी को जाली करेंसी की आग में झोंक रहा है? क्या रोजमर्रा के लेनदेन में अनजाने में आम जनता को इस सिंडिकेट का शिकार बनाया जा चुका है? इस बात की पूरी आशंका जताई जा रही है कि बैंक की तिजोरी तक यह जखीरा पहुंचने से पहले, जाली करेंसी का एक बड़ा हिस्सा बेखबर जनता तक भी पहुंचा दिया गया हो.

एक्सिस बैंक के शाखा प्रबंधक की शिकायत पर FIR

एक्सिस बैंक के शाखा प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए सिविल लाइन थाने में संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है. मामले की संवेदनशीलता और बड़े रैकेट की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने एक स्पेशल जांच टीम का गठन कर दिया है. सहारनपुर और मेरठ के मामलों का आपस में जुड़ना इस बात का सीधा प्रमाण है कि सीमावर्ती जिलों में किसी बड़े देशविरोधी और संगठित इकोनॉमिक सिंडिकेट की जड़ें बहुत गहराई तक फैल चुकी हैं.

गठित स्पेशल टीम अब बैंक के चप्पेचप्पे के सीसीटीवी फुटेज, कैश डिपॉजिट स्लॉट, अकाउंट डिटेल्स और उन संदिग्ध जमाकर्ताओं की पूरी कुंडली खंगालने में दिनरात जुट गई है, ताकि इस पूरे नेटवर्क के असली मास्टरमाइंड को बेनकाब किया जा सके.


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