फेफड़ों के कैंसर को आमतौर पर धूम्रपान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हर मरीज का धूम्रपान करना जरूरी नहीं है. लंबे समय तक घर की रसोई में खाना पकाने वाली महिलाओं में भी धुएं और प्रदूषकों के संपर्क को लेकर चिंता जताई जाती रही है. क्या आप जानते हैं कि किचन में खाना पकाते हुए ऑयल से निकलने वाले धुएं से महिलाओं को फेफड़ों का कैंसर अपनी चपेट में ले सकता है. इस टॉपिक पर टीवी9 ने डॉ. जे.बी. शर्मा से बात की.

डॉक्टर कहते हैं कि खासतौर पर जब रसोई में पर्याप्त वेंटिलेशन न हो और खाना पकाते समय तेल तेज तापमान पर गर्म होकर धुआं छोड़ता रहे, तो सांस के साथ कई सूक्ष्म कण और रासायनिक पदार्थ शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं. कुकिंग ऑयल को बहुत ज्यादा गर्म करने पर निकलने वाला धुआं आंखों और गले में जलन के साथसाथ सांस की नली को भी प्रभावित कर सकता है.
क्यों होता है ऐसा?
लगातार और लंबे समय तक ऐसे धुएं के संपर्क में रहने से श्वसन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि केवल खाना पकाने के तेल का धुआं ही फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है. कैंसर का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें तंबाकू का सेवन, वायु प्रदूषण, सेकेंड हैंड स्मोक, कुछ व्यावसायिक रसायनों का संपर्क और आनुवंशिक कारण शामिल हैं.
रसोई में किन बातों का रखें ध्यान?
खाना बनाते समय रसोई की खिड़कीदरवाजे खुले रखना और एग्जॉस्ट फैन या चिमनी का इस्तेमाल करना धुएं के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है. तेल को बारबार तेज आंच पर गर्म करने से बचना चाहिए. अगर तेल से लगातार धुआं निकल रहा है तो आंच कम करना बेहतर है. तड़का या डीप फ्राई करते समय भी रसोई में उचित वेंटिलेशन रखना जरूरी है.
लंबे समय तक रहने वाली खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द, आवाज में बदलाव, बारबार सांस से जुड़ा संक्रमण, बिना वजह वजन कम होना या खांसी के साथ खून आना जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण कई दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं, लेकिन लगातार बने रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.
धूम्रपान न करने वालों को भी सावधानी
धूम्रपान न करने का मतलब यह नहीं है कि फेफड़ों से जुड़ी हर बीमारी का जोखिम पूरी तरह खत्म हो गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। घर के अंदर का वायु प्रदूषण, बाहर का प्रदूषण और लंबे समय तक धुएं के संपर्क जैसे कारक भी श्वसन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए रसोई में बेहतर वेंटिलेशन और धुएं को बाहर निकालने की व्यवस्था महिलाओं के साथ पूरे परिवार के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है.
खाना पकाने के तेल का धुआं फेफड़ों के कैंसर का अकेला या निश्चित कारण नहीं माना जा सकता, लेकिन लगातार धुएं के संपर्क से बचना श्वसन स्वास्थ्य के लिए बेहतर है. खासकर घर में रोज कई घंटे खाना बनाने वाली महिलाओं को रसोई में पर्याप्त हवा का आवागमन और धुआं बाहर निकालने की व्यवस्था जरूर रखनी चाहिए.



