वैश्विक प्राइवेट इक्विटी दिग्गज बैन कैपिटल इंडियन इंश्योरेंस मार्केट में अपना पहला बड़ा निवेश करने की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है. बैन कैपिटल इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस में लगभग 25 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए अंतिम दौर की बातचीत कर रही है. यह डील भारतीय इंश्योरेंस और प्राइवेट इक्विटी स्पेस में इस साल के सबसे बड़े सौदों में से एक साबित हो सकता है. आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि इस डील का गणित क्या है, इंडसइंड इंश्योरेंस की वैल्यूएशन कितनी आंकी गई है और वैश्विक निवेशकों की भारतीय बीमा क्षेत्र में इतनी रुचि क्यों बढ़ रही है.

इंश्योरेंस सेक्टर की सबसे बड़ी डील

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि अमेरिका की बड़ी प्राइवेट इक्विटी कंपनी ‘बेन कैपिटल’ , ‘इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस’ में 25% तक हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत के आखिरी दौर में है. इस डील में इंश्योरेंस कंपनी की वैल्यूएशन 16,000 करोड़ या उससे ज्यादा हो सकती है. अगर यह डील पूरी हो जाती है, तो हिंदुजा ग्रुप की मॉरीशसबेस्ड इन्वेस्टमेंट कंपनी ‘इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स’ से हिस्सेदारी खरीदना भारत के जनरल इंश्योरेंस सेक्टर में बेन का पहला सीधा निवेश होगा.

सूत्रों के मुताबिक, बेन इस हिस्सेदारी के लिए 4,0005,000 करोड़ रुपए का निवेश कर सकती है, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन उसके लगभग 12,000 करोड़ रुपए के ग्रॉस रिटन प्रीमियम का 1.3 से 1.7 गुना हो जाएगी. बेन ने फाइनेंशियल, कानूनी और ऑपरेशनल ड्यू डिलिजेंस पूरी कर ली है और उम्मीद है कि अगस्त के आखिर या सितंबर की शुरुआत में डील साइन हो जाएगी. एक व्यक्ति ने कहा कि अब बातचीत वैल्यूएशन और फाइनल कमर्शियल शर्तों पर हो रही है. माना जा रहा है कि बेन इस निवेश को मीडियम से लॉन्गटर्म के मौके के तौर पर देख रही है.

डिस्काउंट पर वैल्यूएशन

बातचीत में शामिल लोगों ने ईटी रिपोर्ट में कहा कि यह जल्दी एग्जिट के मकसद से किए जाने वाले फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट से अलग है. एक व्यक्ति ने कहा कि वे दो या तीन साल में एग्जिट करने के बारे में नहीं सोच रहे हैं. उन्हें इस फ्रैंचाइजी में ऑपरेशनल तौर पर काफी संभावनाएं दिख रही हैं. लोगों ने बताया कि बार्कलेज इस प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री पर IIHL को सलाह दे रहा है.

IIHL, बेन कैपिटल और बार्कलेज की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लिस्टेड कंपनियों के उलट, जिनकी वैल्यूएशन उनके ग्रॉस रिटन प्रीमियम का लगभग तीन गुना होती है, इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस की वैल्यूएशन डिस्काउंट पर होने की उम्मीद है क्योंकि इसमें ऑपरेशनल सुधार की जरूरत है.

ऊपर बताए गए व्यक्ति ने कहा कि कंपनी की फ्रैंचाइज़ी मज़बूत है, लेकिन अभी भी इसमें काम करने की जरूरत है. इसीलिए इसकी वैल्यूएशन लिस्टेड कंपनियों के ट्रेड प्राइस के बजाय टॉप लाइन के डेढ़ गुना के करीब है. इंश्योरेंस कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में ग्रॉस रिटन प्रीमियम में 2.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की और यह 12,236 करोड़ रुपए रहा, जबकि पूरी जनरल इंश्योरेंस इंडस्ट्री में 9 फीसदी की ग्रोथ हुई थी.

कितना है कंपनी का मार्केट शेयर?

मार्च 2026 तक इसका मार्केट शेयर 3.64 फीसदी था. यह रिटेल, कमर्शियल और क्रॉप इंश्योरेंस के क्षेत्र में काम करती है. पिछले एक साल से यह हेल्थ और फायर इंश्योरेंस सेगमेंट को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस ने मार्च 2026 में 450 करोड़ रुपए जुटाए जिसमें 300 करोड़ रुपए का सबऑर्डिनेटेड डेट और अपनी पैरेंट कंपनी से 150 करोड़ रुपए का कैपिटल इन्फ्यूजन शामिल था ताकि अपनी सॉल्वेंसी स्थिति को मजबूत किया जा सके, जो 1.60 गुना से ऊपर है. केयर रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमोटर्स ने मार्च तक बिजनेस में 300 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया.

देश की कई कंपनियों में है निवेश

बोस्टन में हेडक्वार्टर वाली बेन दुनिया भर में प्राइवेट इक्विटी, क्रेडिट, वेंचर कैपिटल, रियल एस्टेट और अन्य वैकल्पिक एसेट्स में लगभग 225 बिलियन डॉलर की एसेट्स मैनेज करती है. भारत में, इसने एक्सिस बैंक, 360 ONE WAM , अडानी कैपिटल, अडानी हाउसिंग, L&T फाइनेंस और मन्नापुरम फाइनेंस जैसी कंपनियों में निवेश के ज़रिए फाइनेंशियल सर्विसेज का पोर्टफोलियो बनाया है. फिलहाल, इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स, रिलायंस कैपिटल के जरिए इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस में 73.98 फीसदी हिस्सेदारी रखती है, जबकि एशिया एंटरप्राइजेज LLP के पास 24.67 फीसदी हिस्सेदारी है.

बाकी हिस्सेदारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के पास है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। IIHL ने मार्च 2025 में इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस के जरिए 9,650 करोड़ रुपए के रिजॉल्यूशन प्लान के साथ रिलायंस कैपिटल का अधिग्रहण किया. इसके साथ ही रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस, रिलायंस सिक्योरिटीज, रिलायंस एसेट रिकंस्ट्रक्शन और अन्य फाइनेंशियल सर्विस बिजनेस भी उसके दायरे में आ गए.