Kashmir Viral Video: जम्मूकश्मीर में 12 साल के एक स्कूली बच्चे का सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस समय घाटी में एक बड़े विवाद का कारण बन गया है. वीडियो में बच्चा जम्मूकश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इटू की नीतियों की तीखी आलोचना करता नजर आ रहा है.

इस मामले ने शुक्रवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब कश्मीर के मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने बच्चे के इस व्यवहार को बदतमीजी करार दिया. वहीं, सरकार की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए उस न्यूज पोर्टल को समन जारी कर दिया है, जिसने इस वीडियो को सबसे पहले इंटरनेट पर अपलोड किया था. CWC ने पुलिस को तुरंत इस वायरल क्लिप को हटाने और मामले में FIR दर्ज करने के कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
‘मंत्री जी AC में बैठी हैं…’ गर्मी की छुट्टी न मिलने पर फूटा था गुस्सा
दरअसल, कश्मीर घाटी में इस समय तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चल रहा है. चिलचिलाती धूप और गर्मी के बावजूद स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियों की घोषणा न होने से यह बच्चा बेहद नाराज था. वायरल वीडियो में बच्चे को यह कहते सुना जा सकता है कि, मुझे लगता है कि मंत्री जी के अपने बच्चे स्कूल नहीं जाते होंगे, इसीलिए वह खुद तो AC कमरे में बैठी हैं और हमें इस गर्मी में तपने के लिए छोड़ दिया है. बता दें कि कश्मीर घाटी में आमतौर पर जुलाईअगस्त के दौरान मौसम के मिजाज को देखते हुए अधिकारियों द्वारा लगभग दो हफ्ते की गर्मियों की छुट्टियों की घोषणा की जाती है.
इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया दो गुटों में बंट गया. जहां कुछ लोग इसे बच्चे की ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ बताते हुए उसकी बेबाकी की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरा पक्ष इसे ‘बुनियादी परवरिश और सामाजिक मूल्यों में गिरावट’ मानकर इसकी निंदा कर रहा है.
मीरवाइज फारूक ने जताई चिंता, कहा बच्चों का इस्तेमाल बंद हो
घाटी के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इस घटना पर गहरी बेचैनी जाहिर की है. शुक्रवार की नमाज के बाद ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने कहा कि हमारे समाज को अब यह सोचना होगा कि क्या नाबालिग बच्चों को इस तरह सोशल मीडिया के सामने घसीटा जाना चाहिए? बिना अंजाम सोचे, उन्हें पब्लिक रिएक्शन के लिए इस्तेमाल करना बेहद चिंताजनक है.
CWC का कड़ा एक्शन: स्कूल प्रिंसिपल और पत्रकारों को समन
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है. CWC के नोटिस के मुताबिक, न्यूज पोर्टल के प्रतिनिधियों ने बच्चे का इंटरव्यू लेते समय उसके मातापिता या कानूनी अभिभावकों की सहमति नहीं ली थी और न ही स्कूल प्रशासन को इसकी कोई जानकारी थी. CWC की चेयरपर्सन खैरउलनिसा ने बताया कि वीडियो को जो अटेंशन मिल रहा है, उसके चलते शायद वह बच्चा अब डर के मारे स्कूल भी न जा पाए.
पत्रकारों को इसे अपलोड करने से पहले समझदारी दिखानी चाहिए थी. CWC चीफ के मुताबिक, उन्होंने वीडियो में बच्चे की यूनिफॉर्म देखकर उसके स्कूल की पहचान कर ली है और स्कूल के प्रिंसिपल को शनिवार को फैक्ट्स वेरिफिकेशन के लिए पेश होने का आदेश दिया है. इस घटना के बाद CWC ने एक नई सख्त एडवाइजरी भी जारी की है, जिसके तहत बच्चों के इंटरव्यू लेने, उनकी फिल्मिंग करने या ऐसे वीडियो शेयर करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है जिससे उनकी प्राइवेसी, सम्मान, सुरक्षा या मानसिक भलाई को कोई खतरा पहुंचता हो.



