नई दिल्ली. कभी सिर्फ बिटकॉइन माइनिंग के दम पर बड़ा मुनाफा कमाने का सपना दिखाने वाली अमेरिकन बिटकॉइन कॉर्प अब खुद भारी मुश्किल में फंस गई है. यह कंपनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप की है. पिछले 10 महीनों में इसके शेयर 95 फीसदी से ज्यादा टूट चुके हैं. इसका असर सीधे एरिक ट्रंप की दौलत पर पड़ा है. उनकी हिस्सेदारी की बाजार कीमत करीब 600 मिलियन डॉलर यानी लगभग 5722 करोड़ रुपये कम हो गई है.

हालात इतने खराब हो गए कि कंपनी को नैस्डैक स्टॉक एक्सचेंज में अपनी लिस्टिंग बचाए रखने के लिए रिवर्स स्टॉक स्प्लिट करना पड़ा. इसके तहत 15 पुराने शेयरों को मिलाकर 1 नया शेयर बनाया गया. इसके बावजूद कंपनी का शेयर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इसके बावजूद कंपनी का शेयर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. यानी एरिक अपने साथ कंपनी के हजारों इन्वेस्टर्स की संपत्ति भी ले डूबे हैं.
आखिर ऐसा क्या हुआ?
जब यह कंपनी शुरू हुई थी, तब इसकी पूरी रणनीति बिटकॉइन माइनिंग पर टिकी थी. कंपनी का मानना था कि ज्यादा से ज्यादा बिटकॉइन निकालकर और उसे जमा करके आगे बड़ा फायदा होगा. लेकिन पिछले कुछ महीनों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई. बिटकॉइन की कीमतों में बड़ी गिरावट आ गई. दूसरी तरफ AI का कारोबार तेजी से बढ़ने लगा. ऐसे में निवेशकों ने उन कंपनियों को पसंद करना शुरू कर दिया, जिन्होंने अपनी बिजली, जमीन और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल AI डेटा सेंटर बनाने में शुरू कर दिया. यहीं पर अमेरिकी बिटकॉइन पीछे रह गई.
दूसरी कंपनियां बदल गईं, यह नहीं बदली
रायट प्लेटफॉर्म्स , मारा होल्डिंग्स , सिफर डिजिटल और टेरावुल्फ जैसी कई अमेरिकी कंपनियों ने बिटकॉइन माइनिंग के साथ साथ AI डेटा सेंटर का कारोबार भी शुरू कर दिया. इसका फायदा उन्हें मिला और इस साल उनके शेयर औसतन 60 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए. इसके उलट अमेरिकी बिटकॉइन सिर्फ बिटकॉइन पर ही भरोसा करती रही. इसी वजह से कंपनी के शेयर लगातार टूटते गए.
AI में क्यों नहीं उतर पाई कंपनी?
असल में कंपनी के पास सिर्फ बिटकॉइन माइनिंग मशीनें और बिटकॉइन हैं. जबकि बिजली, जमीन, डेटा सेंटर और दूसरी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं उसकी साझेदार कंपनी हट 8 के पास हैं. हट 8 ने अपनी रणनीति बदलते हुए AI डेटा सेंटर के कारोबार पर बड़ा दांव लगाया और उसके शेयर इस साल दोगुने से ज्यादा चढ़ गए. लेकिन अमेरिकी बिटकॉइन के पास ऐसा करने की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी.
फिर भी बिटकॉइन पर भरोसा कायम
इतनी गिरावट के बावजूद कंपनी पीछे हटने को तैयार नहीं है. एरिक ट्रंप का कहना है कि कंपनी अपने बिटकॉइन नहीं बेचेगी, जब तक कोई बेहद गंभीर स्थिति पैदा न हो जाए. इतना ही नहीं, कंपनी ने हाल ही में बाजार से 500 और बिटकॉइन खरीद लिए. उसका मानना है कि जब बाकी कंपनियां AI की तरफ जा रही हैं, तब बिटकॉइन नेटवर्क में प्रतिस्पर्धा कम होगी और भविष्य में ज्यादा बिटकॉइन कमाने का मौका मिलेगा.
कंपनी को कितना नुकसान हुआ?
वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी को 118.2 मिलियन डॉलर का ऑपरेटिंग लॉस हुआ. इसमें सबसे बड़ा कारण उसके पास मौजूद बिटकॉइन की कीमत घटने से हुआ करीब 117.2 मिलियन डॉलर का नुकसान रहा.
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क्या आगे रिकवरी हो सकती है?
बाजार के कई जानकारों का मानना है कि बिटकॉइन अपने इस चक्र के निचले स्तर के आसपास हो सकता है. अगर आने वाले महीनों में इसकी कीमत दोबारा तेजी से बढ़ती है तो अमेरिकी बिटकॉइन को भी फायदा मिल सकता है. हालांकि फिलहाल कंपनी का पूरा भविष्य लगभग एक ही चीज पर टिका है. अगर बिटकॉइन की कीमत बढ़ी तो कंपनी संभल सकती है. लेकिन अगर गिरावट जारी रही तो एरिक ट्रंप की इस बड़ी क्रिप्टो कंपनी के सामने मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.



