Bihar Banka News: भगवान राधाकृष्ण की भक्ति में सराबोर होकर बांग्लादेश से भारत आए एक हिंदू परिवार की यात्रा बिहार के बांका जिले में आकर थम गई. यहां आस्था और कानून आमनेसामने खड़े नजर आए. मंदिरों में सेवापूजा करते हुए अपने देश लौटने की तैयारी कर रहा यह बांग्लादेशी परिवार जब जमदाहा ठाकुरबाड़ी पहुंचा, तो वैध दस्तावेज न होने के कारण पुलिस ने पूरे परिवार को गिरफ्तार कर लिया. इस घटना का सबसे मार्मिक और भावुक पल तब देखने को मिला, जब अदालत के आदेश पर दो मासूम बच्चों को उनके मातापिता से अलग कर बाल गृह भेज दिया गया, जबकि मातापिता को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. बच्चों से बिछड़ते समय दंपति फूटफूटकर रोता रहा.

यह पूरा मामला बांका जिले के कटोरिया प्रखंड अंतर्गत जमदाहा ओपी क्षेत्र का है. यहां स्थित श्रीश्री 108 पतित पावन राधाकृष्ण मंदिर में बांग्लादेश के बरिशाल जिले के रहने वाले मिल्टन हल्दर अपनी पत्नी झुमारानी दास और दो नाबालिग बच्चों के साथ पहुंचे थे. उन्होंने मंदिर के संचालक विजय राय से कहा कि वे भगवान राधाकृष्ण के अनन्य भक्त हैं और कुछ दिनों तक मंदिर में रहकर सेवापूजा करना चाहते हैं.
राहत की बात यह थी कि इस परिवार ने अपनी पहचान छिपाने की कोई कोशिश नहीं की. उन्होंने खुद ही मंदिर प्रबंधन को बताया कि वे बांग्लादेश के निवासी हैं. दिनभर मंदिर की सेवा करने के बाद वे मंदिर परिसर अथवा धर्मशाला में ही रात गुजारते थे.
दलाल को दिए थे 20 हजार रुपये, वृंदावन में भी की सेवा
जब मंदिर प्रबंधन ने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी, तो मौके पर पहुंची पुलिस ने परिवार से पूछताछ की. जांच में सामने आया कि यह परिवार भारत में प्रवेश और निवास से संबंधित कोई भी वैध पासपोर्ट, वीजा या अन्य जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा सका. इसके बाद पुलिस ने दंपति को हिरासत में ले लिया.
पूछताछ के दौरान दंपति ने बताया कि करीब ढाई महीने पहले उन्होंने एक दलाल को 20 हजार रुपये देकर अवैध रूप से भारतबांग्लादेश सीमा पार की थी. सीमा पार करने के बाद वे पश्चिम बंगाल पहुंचे, लेकिन पकड़े जाने के डर से वहां ज्यादा समय नहीं रुके. इसके बाद वे उत्तर प्रदेश के वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने कई मंदिरों में भगवान राधाकृष्ण की सेवा और पूजाअर्चना की. वृंदावन से लौटते समय वे बिहार के बांका स्थित प्रसिद्ध जमदाहा ठाकुरबाड़ी पहुंचे थे. उनका कहना था कि वे बांग्लादेश लौटने वाले थे, लेकिन उससे पहले कुछ दिन यहाँ भगवान की सेवा करना चाहते थे.
कमरा खंगालने पर मिले ये दस्तावेज
पुलिस ने जब परिवार के ठहरने वाले कमरे की तलाशी ली, तो वहां कपड़ों के अलावा बिना सिम कार्ड वाला एक मोबाइल फोन मिला. महिला के पास से बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र की फोटोकॉपी बरामद हुई, जबकि पुरुष ने अपने मोबाइल में बांग्लादेशी पासपोर्ट की तस्वीर दिखाई. हालांकि, भारत में वैध रूप से रहने के लिए आवश्यक कोई भी दस्तावेज़ उनके पास नहीं था. पुलिस को उनके पास से कोई अन्य आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली है.
मासूम बच्चों का मातापिता से बिछड़ना बना सबसे भावुक पल
कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों नाबालिग बच्चों को भी न्यायालय में पेश किया गया. अदालत के निर्देश पर बच्चों को बाल गृह भेज दिया गया, जबकि मातापिता को जेल भेज दिया गया. बच्चों से अलग होते समय मातापिता की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे. उन मासूम बच्चों को समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर उन्हें उनके मातापिता से क्यों दूर किया जा रहा है.
यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया. जमदाहा ओपी पुलिस ने अवैध रूप से भारत में प्रवेश और निवास करने के आरोप में दंपति के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस अब उस दलाल और पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी है, जिसकी मदद से यह परिवार अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था.



