Himachal Se: Husband Wife Eating Habits :आज भी जब महाभारत की चर्चा होती है तो भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा, उनका त्याग और उनका ज्ञान सबसे पहले याद किया जाता हैं। उनकी कहानी हर युग में लोगों को यह सिखाती है कि सच्चा योद्धा वही है जो अपने कर्तव्य को सबसे ऊपर रखता हैं।

पति-पत्नी को एक ही थाली में क्यों नहीं खाना चाहिए? जानिए भोजन के नियम और माता लक्ष्मी की कृपा का संबंध​
पति-पत्नी को एक ही थाली में क्यों नहीं खाना चाहिए? जानिए भोजन के नियम और माता लक्ष्मी की कृपा का संबंध​

धर्म शास्त्रों में भोजन करने के कई नियम बताए गए हैं, लेकिन मान्यता है कि खाना खाते वक्त भीष्म का फॉर्मूला अपना लिया तो कभी दरिद्रता नहीं आएगी। आइए जानते है भीष्म पितामह ने भोजन को लेकर क्या बातें बताई हैं?

हिंदू शास्त्रों और महाभारत में भीष्म पितामह द्वारा भोजन से जुड़े कुछ सख्त नियम बताए गए हैं, जिन्हें अपनाने से घर में दरिद्रता दूर होती है और मां लक्ष्मी का वास होता है।

भीष्म पितामह के अनुसार भोजन की थाली के मुख्य नियम

  • पैर लगी थाली

भीष्म पितामह के अनुसार, जिस भोजन की थाली को किसी का पैर लग जाए, वह भोजन अशुद्ध माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में ऐसे भोजन को नाले की गंदगी या कीचड़ के समान बताया गया है। इसलिए ऐसी थाली का भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए और भोजन के प्रति हमेशा सम्मान और शुद्धता का भाव रखना चाहिए।

  • पतिपत्नी की एक थाली में भोजन

आज के दौर में पतिपत्नी का एक थाली में आम बात है, मान्यता के अनुसार भले ही इसे दांपत्य जीवन में मिठास बनाए रखने का तरीका माना गया हो लेकिन भीष्ण ने इसे अनुचित माना है। भीष्म के अनुसार, पतिपत्नी को एक ही थाली में भोजन करने से बचना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से घरपरिवार में कलह और विवाद बढ़ सकते हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मान्यता है कि भोजन हमेशा मर्यादा, शुद्धता और सकारात्मक भाव के साथ ग्रहण करना चाहिए, जिससे परिवार में सुखशांति बनी रहे।

  • थानी में बाल गिर जाए

भीष्म पितामह के अनुसार, जिस भोजन में बाल गिर जाए वह भोजन खाने योग्य नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि ऐसे भोजन का सेवन करने से नकारात्मकता और दरिद्रता का प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए भोजन की शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

  • एक साथ भोजन करना

भीष्म पितामह के अनुसार, जिस घर में परिवार के लोग प्रेम और एकता के साथ मिलजुलकर भोजन करते हैं, वहां कभी धन और अन्न की कमी नहीं होती। मान्यता है कि ऐसे घर में का वास बना रहता है और परिवार में सुखशांति का वातावरण रहता है। धार्मिक दृष्टि से एकता और अपनापन से ग्रहण किया गया भोजन अमृत के समान माना गया है।