
इन दिनों क्रिकेट के गलियारों में बॉल टेम्परिंग शब्द एक बार फिर चर्चा में है. क्रिकेट की दुनिया में यह शब्द नया नहीं है. इसका अपना इतिहास है. बॉल टेम्परिंग से जुड़ी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं. ताजा मामला पाकिस्तान सुपर लीग 2026 से सामने आया है, जहां हाल ही में लाहौर कलंदर्स टीम के खिलाड़ी फखर जमान बॉल टेम्परिंग में दोषी पाए गए हैं और उन्हें 2 मैचों के लिए बैन कर दिया गया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बेईमानी का यह दाग उस भारतीय दिग्गज पर भी लग चुका है, जिसे इस खेल का सबसे ईमानदार क्रिकेटर कहा जाता है.
आज से 20 साल पहले जब इस दिग्गज पर बॉल टेम्परिंग के लिए 1 मैच का बैन लगा था, तो फैंस ने सड़कों पर उतरकर बवाल मचा दिया था. आइए जानते हैं आखिर कौन है ये दिग्गज और क्या था पूरा मामला…
ये वही सचिन तेंदुलकर हैं, जिनकी क्रिकेट की दुनिया में अनुशासन और ईमानदारी की मिसाल दी जाती है. उन्होंने प्रोफेशनल करियर में कुल 142 शतक ठोके हैं. वो ‘बॉल टेम्परिंग’ जैसा गंभीर आरोप में एक मैच का बैन भी झेल चुके हैं. ये मामला आज से 25 साल पुराना है. बात साल 2001 की है, जब दक्षिण अफ्रीका दौरे पर एक मैच रेफरी के फैसले ने पूरे क्रिकेट जगत में भूचाल ला दिया था और ‘क्रिकेट के भगवान’ यानी सचिन तेंदुलकर को एक मैच के लिए बैन कर दिया गया था.
आखिर सचिन के साथ क्या हुआ था?
दरअसल, 2001 में पोर्ट एलिजाबेथ में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच दूसरा टेस्ट मैच खेला जा रहा था. उस मैच के तीसरे दिन महान सचिन तेंदुलकर गेंदबाजी करने आए थे. उनकी गेंद अन्य गेंदबाजों से ज्यादा घूमने लगी, तो हर कोई हैरान रह गया. ऐसे में कैमरामैन ने सचिन के हाथ की तरफ कैमरा फोकस किया, जिसमें सचिन बॉल की सीम को साफ करते हुए दिख रहे थे. हर कोई हैरान था कि उस फुटेज में मैच रेफरी माइक डेनिस को ऐसा क्या दिखा कि उन्होंने सचिन पर गेंद के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाकर उन्हें 1 मैच के लिए बैन कर दिया था. इस फैसले पर काफी बवाल मचा था.
सड़कों पर उतरे थे लोग
जब मीडिया में यह खबर आई कि सचिन तेंदुलकर पर बेईमानी का आरोप लगा है और वो बैन हो गए हैं, तो फैंस भड़क गए थे. उन्होंने सड़कों पर उतरकर ICC और मैच रेफरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. उस मामले में BCCI ने भी अपने खिलाड़ी का पूरा साथ दिया था. उधर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहा था और इधर सचिन के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला था, तो फिर उन पर से बैन हटा लिया गया था. गौर करने वाली बात ये भी थी कि मैच के दौरान ऑन-फील्ड अंपायर्स को भी सचिन की गेंदबाजी के दौरान कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन फिर भी मैच रेफरी ने सिर्फ वीडियो क्लिप देकर सचिन पर बॉल टेम्परिंग का आरोप मढ़ दिया था.
क्रिकेट में बॉल टेम्परिंग क्या है?
क्रिकेट में बॉल टेम्परिंग (Ball Tampering) एक गंभीर अपराध माना जाता है. क्रिकेट की गेंद जब एक तरफ से खुरदरी (Rough) और दूसरी तरफ से चमकदार (Shiny) होती है, तो वह हवा में ज्यादा स्विंग करती है, जिसे ‘रिवर्स स्विंग’ कहा जाता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। गेंदबाज अपनी उंगलियों या पसीने से एक तरफ को चमकाते हैं (जो वैध है), लेकिन जब कोई खिलाड़ी अवैध तरीके अपनाकर दूसरी तरफ को ज्यादा खुरदरा करने की कोशिश करता है, तो वह बॉल टेम्परिंग कहलाती है. सरल शब्दों में कहें तो, जब कोई खिलाड़ी क्रिकेट की गेंद की नेचुरल स्थिति (Natural Condition) के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ करता है, तो वह बॉल टेम्परिंग मानी जाती है.
ICC के नियमों के मुताबिक, बॉल टेम्परिंग ‘खेल भावना’ के खिलाफ है. अंपायर तुरंत गेंद बदल देते हैं और विपक्षी टीम को 5 पेनल्टी रन दिए जाते हैं. दोषी खिलाड़ी की 100% तक मैच फीस काटी जा सकती है. गंभीर मामलों में खिलाड़ी पर कुछ मैचों से लेकर 1 साल तक का बैन लग सकता है (जैसा कि 2018 में स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर के साथ हुआ था).






