Himachal Se: आज के समय में पानी को फिल्टर करने के लिए कई तरह के उपकरण मौजूद हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सदियों पहले जब कोई उपकरण नहीं होते थे तो लोग पानी को सालों साल कैसे फिल्टर करते थे। भारत में सदियों से कुओं, तालाबों और पानी के बड़े जलाशयों को साफ रखने के लिए जामुन की लकड़ी का उपयोग किया जाता रहा है। आज के समय में भी, लोग अपनी प्लास्टिक या कंक्रीट की छतों पर रखी पानी की टंकियों में जामुन के पेड़ के तने या टुकड़े डालते हैं ताकि पानी को साफ रखा जा सके। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि पानी की टंकी को कैसे साफ कर सकते हैं।

पानी की टंकी में जामुन की लकड़ी डालने से क्या होता है?​
पानी की टंकी में जामुन की लकड़ी डालने से क्या होता है?​

1. पानी का प्राकृतिक शुद्धिकरण
जामुन की लकड़ी में प्राकृतिक रूप से एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। जब इसे पानी की टंकी में डाला जाता है, तो यह पानी में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया, फंगस और कीटाणुओं को नष्ट करने में मदद करते हैं। यह बिना किसी केमिकल के पानी को प्राकृतिक रूप से शुद्ध रखने का एक बेहतरीन तरीका है।

2. एल्गी और दुर्गंध से छुटकारा
गर्मियों के दिनों में या लंबे समय तक पानी जमा रहने से टंकी की दीवारों पर हरी काई जमने लगती है, जिससे पानी से बदबू आने लगती है। जामुन की लकड़ी पानी में मौजूद एक्सट्रा पोषक तत्वों को सोख लेती है, जिससे काई को पनपने का मौका नहीं मिलता। इसके इस्तेमाल से पानी हमेशा फ्रेश रहता है और उससे आने वाली सड़न या दुर्गंध दूर हो जाती है।

3. भारी धातुओं और अशुद्धियों को सोखना
जामुन की लकड़ी एक प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करती है। यह पानी में घुले भारी तत्वों, धूलमिट्टी के कणों और अशुद्धियों को धीरेधीरे अपनी ओर आकर्षित करके टंकी की तली में बैठा देती है। इससे ऊपर का पानी बिल्कुल साफ रहता है।

4. पानी का pH सुधारे
आयुर्वेद के अनुसार, जामुन की लकड़ी के संपर्क में रहने से पानी के गुण बढ़ जाते हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह पानी के pH लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है। इस पानी से नहाने पर त्वचा संबंधी बीमारियों में आराम मिलता है और यदि यह पानी पीने योग्य है, तो यह पेट के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।

5. लकड़ी का न सड़ना
जामुन की लकड़ी की सबसे खास बात यह है कि यह पानी में सालोंसाल रहने के बाद भी सड़ती नहीं है। बल्कि समय के साथ यह और अधिक मजबूत और काली होती जाती है। यही कारण है कि पुराने जमाने में कुओं के तलवे बनाने में जामुन की लकड़ी का ही इस्तेमाल किया जाता था।