Himachal Se: नौतपा का अर्थ होता है ‘नौ दिनों की तपीश’ जो 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। नौतपा में तापमान बढ़ जाता है, गर्मी तेज पड़ने लगती है, लू चलने लगती है और सूरp की किरणें तेज हो जाती हैं। इस दौरान बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, खासकर दोपहर के समय। सुबह 78 बजे से लेकर शाम के 56 बजे तक तापमान काफी अधिक रहता है। लेकिन क्या आपको पता है कि नौतपा क्या होता है और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं क्या हैं। किसानों के लिए 9 दिनों तक भीषण गर्मी पड़नी क्यों जरूरी है। आइए विस्तार से इस बारे में जानते हैं:

सनातन धर्म में ऋतु परिवर्तन का महत्व
आगे बढ़ने से पहले बता दें कि सनातन धर्म में प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और ग्रहनक्षत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इन्हें केवल भौतिक तत्व नहीं, बल्कि जीवन और सृष्टि के संतुलन का आधार माना जाता है। वेदपुराणों में मनुष्य को प्रकृति का हिस्सा माना गया है, इसलिए पेड़पौधे, सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों की गतिविधियों का सीधा संबंध हमारे जीवन से जोड़ा गया है। भारतीय संस्कृति में माना गया है कि प्रकृति पंचतत्व से मिलकर बनी है और हमारा शरीर भी इन्हीं तत्वों से मिलकर बना है। यही वजह है कि मौसम बदलने पर शरीर, मन और हमारी दिनचर्या पर भी प्रभाव पड़ता है। आयुर्वेद में तो ऋतु परिवर्तन के बारे में खास तरह से बताया गया है। इस दौरान स्वस्थ और बेहतर जीवन के लिए खान पान और जीवन शैली में बदलाव करने की सलाह दी जाती है। गर्मी, ठंडी, बरसात या फिर क्यों न नौतपा हो हर मौसम में आयुर्वेद जीवन शैली और खान पान में बदलाव की सलाह देता है। ज्योतिष शास्त्र में भी नौतपा का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यता
सूर्य जब धरती के करीब आता है तो तापमान बढ़ जाता है, जिससे गर्मी अधिक पड़ने लगती है। ज्योतिष शास्त्र में इसे सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करना बताया गया है। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पहुंचती है। हालांकि, सूर्य इस नक्षत्र में कुल 15 दिनों तक रहते हैं लेकिन शुरुआती नौ दिनों तक सबसे ज्यादा प्रभाव रहता है। इसके बाद धीरेधीरे प्रभाव कम होने लगता है।
किसानों के लिए क्यों जरूरी है नौतपा में भीषण गर्मी
भारतीय किसान पुराने समय से ही गर्मी, ठंडी और बारिश का अनुमान लगाने के लिए कई तरह के देसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। सूर्य को देखकर समय का पता लगाना, टिटहरी पक्षी के अंडे से मानसून का अनुमान लगाना। इसी तरह छोटीछोटी चीजों से मौसम बदलने का अनुमान लगाया जाता है। नौतपा भी इसमें शामिल है। यह किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। नौतपा की गर्मी के आधार पर किसान मानसूनी बारिश का अनुमान लगाते हैं। कहा जाता है कि इन नौ दिनों में जितनी अधिक तपन होगी मानसून उतना ही अच्छा रहेगा। किसान नौतपा के अनुसार ही मानसून का अंदाजा लगाते हैं और इसी के अनुसार खेती और किसानी करते हैं। नौतपा में चूहे, कीड़ेमकोड़े और टिड्डी बड़ी संख्या में मरते हैं, जिसके चलते किसानों की फसल सुरक्षित रहती है। इसका अप्रत्यक्ष रूस से खेती से कनेक्शन जोड़ा जाता है।
नौतपा में क्या करें और क्या न करें
जो भी काम हो सुबह जल्दी करें या फिर शाम को करें।
शरीर में पानी की कमी न होने दें।
इस दौरान तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और सत्तू का सेवन अधिक करना चाहिए।
इस दौरान हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए
ज्योतिष शास्त्र में नौतपा को सेवा, दान और आत्मशुद्धि का समय माना गया है। इस दौरान जलदान का विशेष महत्व है।
पशुपक्षियों के लिए साफ पानी और दाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
नौतपा में क्या नहीं करना चाहिए
दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीधी धूप में निकलने से बचना चाहिए।
बाहर निकलते वक्त सिर और कान को सूती कपड़े या छाते से ढककर निकलें।
इन नौ दिनों में मांस और शराब के सेवन से बचना चाहिए।
इन नौ दिनों तक मसालेदार, तलाभुना, बासी या भारी भोजन करने से बचना चाहिए।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक हीट वेव जारी रहने का अलर्ट जारी किया है और लोगों को दोपहर में 12 बजे से लेकर शाम 4 बचे तक धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच चुका है।



