मध्य प्रदेश के उज्जैन में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का आज दूसरा दिन है. इस यात्रा में उनकी पत्नी अमृता राय भी शामिल हैं. उन्होंने सनातन धर्म को सत्य, गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक बताया. अमृता राय ने कहा कि सनातन धर्म ही परम सत्य है और यही हमारा गौरव और स्वाभिमान है. हम इसी विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि शिव एक दर्शन का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि राम हमारे आदर्शों और आचरण की मर्यादा का प्रतीक हैं.

अमृता राय के मुताबिक, इस यात्रा का उद्देश्य शिव के दर्शन को राम के आदर्शों के साथ जोड़ना है. साथ ही समाज की उन स्थापित संस्थाओं के साथ विश्वास बनाए रखना भी है, जिनमें लोग आस्था रखते हैं और जो उनके लिए श्रद्धा के केंद्र हैं. उन्होंने कहा कि यात्रा के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि समाज की आस्था से जुड़ी संस्थाओं के साथ धोखा नहीं होना चाहिए. सनातन धर्म, उसके दर्शन और आदर्शों को साथ लेकर आगे बढ़ना ही इस यात्रा की सोच है.
उज्जैन से अयोध्या तक की यात्रा
दिग्विजय सिंह की मौजूदा सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा उज्जैन से अयोध्या तक करीब 950 किलोमीटर की पदयात्रा है. इसकी शुरुआत 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से हुई. यात्रा में उनकी पत्नी अमृता राय भी साथ हैं. इसे करीब 70 दिन में पूरा करने की योजना है और रोज लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने का कार्यक्रम है. यात्रा का समापन अयोध्या में राम मंदिर तक पहुंचकर होना है.
कहांकहां से होकर जाएगी यात्रा?
यात्रा का पहला चरण 20 अक्टूबर से 5 नवंबर तक मध्य प्रदेश में तय किया गया है. इस दौरान यह उज्जैन, तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खजनेर, राजगढ़ और चाचौड़ा होते हुए राघौगढ़ के पाटई आश्रम तक जाएगी. इसके बाद दीपावली के आसपास पांच दिन का विराम रखा गया है. आगे का प्रस्तावित रास्ता मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश की ओर है. यात्रा गुना, अशोकनगर और चंदेरी की तरफ से तालबेहट और ओरछा पहुंचेगी.
ओरछा में रामराजा सरकार मंदिर के दर्शन के बाद चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचने की योजना है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इससे पहले दिग्विजय सिंह ने नर्मदा परिक्रमा यात्रा की थी. उन्होंने 30 सितंबर 2017 को पत्नी अमृता राय के साथ यह यात्रा शुरू की थी. करीब 3,300 किलोमीटर की इस यात्रा में वे नर्मदा नदी के किनारेकिनारे पैदल चले. यात्रा करीब छह महीने चली और अप्रैल 2018 में पूरी हुई. उस समय उन्होंने इसे धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा बताया था.



