Social Withdrawal:कभीकभी ऐसा होता है कि फोन पर किसी का मैसेज आता है, लेकिन जवाब देने का मन नहीं करता। दोस्तों का कॉल देखकर भी बात करने की इच्छा नहीं होती। यहां तक कि जिन लोगों से पहले घंटों बातें होती थीं, उनसे भी दूरी अच्छी लगने लगती है। कई बार इसके पीछे नाराजगी नहीं, बल्कि मन की थकान और जिंदगी में चल रहा तनाव हो सकता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मनोविज्ञान में लोगों से इस तरह दूरी बनाने की स्थिति को कहा जाता है।

Social Withdrawal क्या होता है?

Social Withdrawal का मतलब है लोगों से धीरेधीरे दूरी बनाने लगना। व्यक्ति बातचीत कम कर देता है, मिलनेजुलने से बचता है और अकेले रहना पसंद करने लगता है। कभीकभी यह कुछ समय के लिए होता है, लेकिन अगर लंबे समय तक ऐसा बना रहे तो इसकी वजह समझना जरूरी है।

हर समय बात करने का मन क्यों नहीं करता?

लगातार काम, जिम्मेदारियां, घर की परेशानियां और दूसरों की उम्मीदें इंसान को मानसिक रूप से थका सकती हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को लगता है कि अब किसी से बात करने की ऊर्जा नहीं बची। वह कुछ समय शांति से बिताना चाहता है। इसे मानसिक थकान कहा जा सकता है।

अपनों से भी दूरी बनाने की क्या वजह है?

कई बार व्यक्ति अपनी परेशानी किसी को बताना नहीं चाहता। उसे लगता है कि कोई उसकी बात नहीं समझेगा या उसे बारबार अपनी स्थिति समझानी पड़ेगी। कुछ लोग पुराने झगड़ों, रिश्तों में तनाव या बारबार निराश होने के कारण भी बातचीत कम कर देते हैं। धीरेधीरे वे अपने करीबी लोगों से भी दूरी बनाने लगते हैं।

क्या अकेले रहना हमेशा गलत है?

नहीं, हर समय लोगों के बीच रहना जरूरी नहीं है। कभीकभी खुद को समय देना, फोन से दूर रहना और पसंद का काम करना मन को आराम दे सकता है। लेकिन अगर अकेले रहने की इच्छा के साथ उदासी, चिड़चिड़ापन, किसी काम में मन न लगना और पहले पसंद आने वाली चीजों से दूरी भी बढ़ने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Social Withdrawal से बाहर कैसे आएं?

अगर किसी से बात करने का मन नहीं करता, तो खुद पर तुरंत बातचीत करने का दबाव न डालें। अपनी दिनचर्या ठीक रखें, थोड़ी देर टहलें और पसंद का काम करें। किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति से अपनी परेशानी साझा करना भी मददगार हो सकता है। अगर यह स्थिति कई हफ्तों तक बनी रहे या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

ध्यान दें: कभीकभी चुप रहना और अकेले समय बिताना सामान्य है। लेकिन जब यही आदत आपको अपनों से काटने लगे और जिंदगी के दूसरे कामों पर भी असर डालने लगे, तो अपने मन की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। हर दूरी नाराजगी की वजह से नहीं होती, कभीकभी इंसान अंदर से थका हुआ भी हो सकता है।