जम्मूकश्मीर में आतंक के पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय करने की साजिश सामने आई है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI कश्मीर में करीब ढाई दशक से निष्क्रिय पड़े आतंकी संगठन अलउमर मुजाहिदीन को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रही है. इस काम के लिए संगठन के संस्थापक और कंधार विमान अपहरण कांड के बाद रिहा किए गए आतंकी मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ लटरम का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है.

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, ISI की कोशिश केवल अलउमर को सक्रिय करने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए घाटी में स्थानीय युवाओं की नई भर्ती, हथियारों की सप्लाई और पुराने ओवरग्राउंड नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की योजना बताई जा रही है. साथ ही लश्करएतैयबा और जैशएमोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के नेटवर्क का भी इस्तेमाल किए जाने की आशंका है.
कौन है जरगर?
मुश्ताक जरगर उर्फ लटरम उन तीन आतंकियों में शामिल था, जिन्हें 1999 के IC814 कंधार विमान अपहरण कांड के बाद यात्रियों की रिहाई के बदले भारत सरकार ने छोड़ा था. उसके साथ मसूद अजहर और उमर शेख को भी रिहा किया गया था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कंधार पहुंचने के बाद जरगर पाकिस्तान चला गया. बाद में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से अपनी गतिविधियां चलाता रहा.
1989 में कश्मीर में आतंकी संगठन की स्थापना
जरगर का नाम कश्मीर में आतंकवाद के शुरुआती दौर से ही रहा है. वह अलउमर मुजाहिदीन का संस्थापक और प्रमुख कमांडर रहा है. 1989 में संगठन की स्थापना के बाद उसने कश्मीर में आतंकी नेटवर्क खड़ा करने में भूमिका निभाई थी. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, बाद में उसने पाकिस्तान और PoK स्थित आतंकी प्रशिक्षण शिविरों के जरिए कश्मीरी युवाओं को प्रशिक्षण दिलाने में भी भूमिका निभाई.
श्रीनगर में था अलउमर का मजबूत नेटवर्क
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, एक समय श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में अलउमर मुजाहिदीन का मजबूत नेटवर्क था. संगठन के कैडर ने अलगअलग मौकों पर लश्कर और जैश समेत दूसरे आतंकी संगठनों के साथ मिलकर भी काम किया. हालांकि पिछले करीब दो दशकों में अलउमर की गतिविधियां लगभग खत्म हो गई थीं. वर्ष 2006 के बाद संगठन की कोई बड़ी प्रत्यक्ष गतिविधि सामने नहीं आई. उसके ज्यादातर सक्रिय सदस्य या तो सुरक्षा बलों के अभियानों में मारे गए या गिरफ्तार कर लिए गए.
इसके बावजूद खुफिया एजेंसियों का मानना है कि संगठन का पुराना ओवरग्राउंड नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. श्रीनगर, पुलवामा और बारामुला में मौजूद पुराने संपर्कों को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की जा सकती है.
लश्करजैश के सहारे फिर पैर जमाने की तैयारी
खुफिया इनपुट के मुताबिक, ISI अलउमर को शुरुआत में लश्करएतैयबा और जैशएमोहम्मद के सहारे मजबूत करना चाहती है. इसके बाद संगठन को घाटी में एक अलग स्थानीय आतंकी संगठन के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे एक वजह यह भी है कि कश्मीर में स्थानीय आतंकियों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम हुई है. ऐसे में पाकिस्तान की कोशिश किसी ऐसे पुराने संगठन को आगे करने की है, जिसकी पहचान कश्मीर की स्थानीय जमीन से जुड़ी रही है.
NIA ने 2023 में लटरम की संपत्ति की थी अटैच
मुश्ताक जरगर के खिलाफ भारत में सुरक्षा एजेंसियां लगातार कार्रवाई करती रही हैं. 2023 में NIA ने श्रीनगर के नौहट्टा इलाके में उसकी संपत्ति को अटैच किया था. जरगर को भारत सरकार ने UAPA के तहत नामित आतंकवादी भी घोषित किया है.
आतंकी गतिविधियों को एक्टिव करने की कोशिश
अब करीब 26 साल बाद एक बार फिर उसी आतंकी नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिश की जानकारी सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर अलउमर मुजाहिदीन और उसके पुराने नेटवर्क पर है. एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि घाटी में संगठन के पुराने संपर्कों में से कौनकौन से लोग अभी सक्रिय हैं और क्या उन्हें दोबारा आतंकी गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.



