फॉर्म6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक तरफ जहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुसीबत बढ़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ फॉर्म6 को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति भी पैदा हो गई है. इसके दो मुख्य कारण हैं. पहला, चुनाव आयोग बारबार कह रहा है कि कोर्ट की अनुमति के बाद ही इसमें किए गए बदलाव को बरकरार रखा गया. दूसरा, दो चुनाव आयुक्तों ने पहले ही इस पर आपत्ति जताई थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान साफ कर दिया कि कोर्ट ने अपने किसी भी आदेश में फॉर्म6 में बदलाव की मंजूरी नहीं दी है.

पहले समझिए फॉर्म6 का पूरा बवाल क्या है?

वोटर्स लिस्ट में नए वोटरों का नाम जोड़ने के लिए फॉर्म6 का इस्तेमाल किया जाता है. इस फॉर्म में जो 3 बदलाव किया गया है, उसको लेकर सवाल उठ रहे हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके तहत

  • नए वोटर्स को यह बताना होगा कि पहले किसी लिस्ट में उसका नाम था या नहीं. अगर था तो उसकी जानकारी देनी होगी.
  • अगर उसका नाम नहीं था, तो क्या उसके मातापिता या दादादादी/नानानानी का नाम उस पुरानी SIR लिस्ट में था?
  • न तो उसका और न ही उसके मातापिता/दादादादी का नाम उस पुरानी SIR लिस्ट में था?

इसके अलावा जिन मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं, उन्हें फिर से जुड़ने के लिए फॉर्म6 का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है. इस पर भी सवाल उठ रहे हैं.

फॉर्म6 पर बवाल की शुरुआत कैसे हुई?

सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमने अपने फैसले में फॉर्म6 में किसी भी तरह के बदलाव को अप्रूव नहीं किया है. दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस ने पिछले दिनों एक रिपोर्ट की है. इसके मुताबिक 2 चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 महीने में 14 आपत्तियां दर्ज कराई. इनमें एक आपत्ति फॉर्म6 में बदलाव को लेकर भी दर्ज कराई गई.

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने सार्वजनिक बयान जारी किया. इसमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद ही फॉर्म6 में बदलाव का फैसला लिया गया. ऐसे में चीफ जस्टिस की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठने लगे.

फॉर्म6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या था?

मई 2026 में बिहार एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था. इसी में सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म6 का जिक्र किया है. 124 पन्नों के फैसले में 3 बार फॉर्म6 का जिक्र है. पूरे फैसले को आसानी से समझिए

1. याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान फॉर्म6 के एनेक्सरडी के बदलाव का मुद्दा उठाया. याचिकाकर्ता का कहना था कि चुनाव आयोग ने अपने असीमित अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अलग से एनेक्सर जोड़ दिया. याचिकाकर्ता के वकीलों ने एनेक्सरडी को जोड़ने वाले उस ऑर्डर का जिक्र किया, जिसमें लिखा है

Any new voter was required to submit Form 6 along with a Declaration Form in Annexure D of the Impugned Order. यानी नए वोटर को फॉर्म 6 के साथ एनेक्शर D में दिया गया घोषणापत्र भी जमा करना जरूरी था.

2. याचिकाकर्ता का कहना था कि इस पर रोक लगाने की जरूरत है. यह नागरिकता का प्रमाण मांग रहा है. चुनाव आयोग दायरे से बाहर जाकर फॉर्म6 का इस्तेमाल कर रहा है. कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया.

3. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा आयोग के पास ‘विशेष गहन संशोधन’ की जरूरतों के हिसाब से एक सही डॉक्यूमेंटेशन फ्रेमवर्क बनाने का कुछ अधिकार सुरक्षित है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यह अधिकार असीमित नहीं है. ऐसा फ्रेमवर्क बनाते समय, आयोग को मौजूदा कानूनी व्यवस्था का ध्यान रखना होगा और अगर उससे कोई अलग रास्ता अपनाया जाता है, तो उसका उस मकसद से तार्किक संबंध होना चाहिए जिसे हासिल किया जाना है.

बड़ा सवाल अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने राकेश सिंह की याचिका पर मुख्य चुनाव आयुक्त, दोनों चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार को नोटिस दिया है. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कुछ चीज रिकॉर्ड में है, तो उसे पेश करने की जरूरत है.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम पहले सब कुछ देखेंगे. इसके बाद कोई फैसला देंगे. सुनवाई के दौरान जस्टिस जे बागची ने कहा कि अगर कुछ गलत लगा तो हम फैसला पलट देंगे.