VB G Ram G Yojana: मनरेगा की जगह 1 जुलाई 2026 से लागू हुई वीबीजी राम जी योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को हर वित्त वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती है। अब इस योजना में फर्जी हाजिरी और मजदूरी के गलत दावों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल निगरानी व्यवस्था मजबूत कर ली है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 23 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली ऐप का उन्नत संस्करण लॉन्च किया। इसमें AI आधारित Face verification, सुरक्षा जांच और नेटवर्क नहीं होने पर ऑफलाइन हाजिरी दर्ज करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
क्या है वीबीजी राम जी योजना?
वीबीजी राम जी का पूरा नाम विकसित भारतगारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन है। इस कानून ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह ली है। इसके तहत ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य शारीरिक श्रम करने के लिए तैयार हों, तो उन्हें एक वित्त वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करना, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और गांवों में उपयोगी संपत्तियों का निर्माण करना है।
NMMS ऐप में क्याक्या नए बदलाव किए गए हैं?
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, आईआईटी मद्रास और अन्य तकनीकी एजेंसियों के सहयोग से ऐप का उन्नत संस्करण तैयार किया गया है। इसमें डिवाइस की सुरक्षा जांच, एआई आधारित चेहरे का सत्यापन , सजीवता पहचान और ऐप की नकल या उसके साथ छेड़छाड़ रोकने के उपाय शामिल हैं।
सजीवता पहचान की मदद से यह जांचने का प्रयास किया जाता है कि कैमरे के सामने वास्तविक व्यक्ति मौजूद है या किसी पुरानी तस्वीर अथवा नकली छवि का इस्तेमाल किया जा रहा है। चेहरे की पहचान की व्यवस्था को अलगअलग राज्यों और भौगोलिक क्षेत्रों में होने वाले अंतर को ध्यान में रखते हुए भी बेहतर बनाया गया है।
इन बदलावों का मकसद किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर हाजिरी लगाने और फर्जी तस्वीरों के जरिए मजदूरी का दावा करने जैसी गड़बड़ियों को रोकना है। अगर कोई फर्जीवाड़ी करते पाया गया तो जांच पूरी होने तक उसकी संबंधित मजदूरी सूची और फंड ट्रांसफर ऑर्डर रोके जा सकते हैं।
नेटवर्क नहीं होने पर मजदूरों की हाजिरी कैसे लगेगी?
ग्रामीण क्षेत्रों में कई कार्यस्थलों पर मोबाइल नेटवर्क कमजोर रहता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में मजदूरों की हाजिरी दर्ज करने में परेशानी हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए NMMS ऐप में ऑफलाइन हाजिरी की सुविधा भी दी गई है।
नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑफलाइन हाजिरी दर्ज की जा सकेगी। मस्टर रोल बंद होने के बाद मोबाइल डिवाइस को नेटवर्क मिलने पर दर्ज जानकारी अपलोड की जा सकती है। इससे नेटवर्क की समस्या के कारण वास्तविक श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज होने में आने वाली परेशानी कम करने में मदद मिलेगी।
क्या सरकार ने किसान आईडी बनाने का लक्ष्य भी पूरा कर लिया है?
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, देशभर में 10.997 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ किसान आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। इस आंकड़े के अनुसार, लक्ष्य पूरा करने के लिए लगभग 30,000 और किसान आईडी बनाने की जरूरत थी।
सरकार का कहना है कि डिजिटल निगरानी का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना, वास्तविक श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रखना और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकना है।
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