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देश में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी विवाद के बीच विपक्षी दलों की एकजुटता बढ़ती दिखाई दे रही है. कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच भी नजदीकियां बढ़ रही हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले अहम विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने राजनीतिक चुनौतियां बढ़ने की चर्चा है.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, BJP के कई नेताओं का मानना है कि युवाओं का गुस्सा केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या SIR प्रक्रिया तक सीमित नहीं है. इसके पीछे महंगाई, बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं जैसे कई मुद्दे भी हैं. देश के अंदर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुई परिस्थितियों ने इन चिंताओं को और बढ़ाया है. बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियां भी लोगों की चिंता की वजह बन रही हैं.

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BJP के लिए चिंता की बात यह है कि इन मुद्दों को लेकर लोगों में बढ़ता असंतोष अब सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन रहा है. पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इससे विपक्ष को राजनीतिक रूप से रणनीतिक बढ़त मिल सकती है.

क्या गुजरात में इन विरोध प्रदर्शनों का हुआ असर?

पार्टी के अंदर के कुछ लोगों का कहना है कि गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में BJP की हालिया चुनावी सफलताओं पर भी इन विरोध प्रदर्शनों की वजह से उतना ध्यान नहीं जा रहा है. इन प्रदर्शनों को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां मिल रही हैं और जनता का ध्यान उनकी ओर जा रहा है.

BJP के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, विपक्ष का लगातार विरोध और सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे कैंपेन से जमीनी हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर भी कोई खास असर पड़ता नहीं दिख रहा है. हालांकि, उन्होंने माना कि इस तरह के अभियान आम लोगों के मन में चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर संदेह पैदा कर सकते हैं. इससे लोग सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाने लग सकते हैं.

क्या साथ आ रहे सीजेपी और कांग्रेस?

बुधवार को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है. इसके लिए युवाओं को जेल में डालना कायरता है.” राहुल गांधी के इस बयान पर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अपने सहयोगियों की कथित अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए राहुल गांधी का धन्यवाद किया.

बीजेपी ने क्या कहा?

दूसरी ओर, BJP के नेता इन प्रदर्शनों को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा अभियान बताते हैं. रिपोर्ट के मतुाबिक, पार्टी के कुछ नेताओं ने यह भी किया कि इन प्रदर्शनों के पीछे कई मुद्दों को लेकर लोगों की नाराजगी है. इनमें कुछ ऐसे मुद्दे भी हैं, जिन पर पार्टी या सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं है.

आखिर बीजेपी से क्यों परेशन हैं लोग?

BJP के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी जरूर है, लेकिन उनके मुताबिक यह नाराजगी मुख्य रूप से SIR प्रक्रिया की वजह से नहीं है. उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान के बावजूद मतदाताओं ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जबकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर जोरदार प्रचार किया था.

सांसद के अनुसार, युवाओं को बेरोजगारी की चिंता है. वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह चिंता और बढ़ गई है. वहीं, मध्यम वर्ग बाजार में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव से परेशान है. उसे डर है कि उसके निवेश से अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पाएगा. इसके अलावा महंगाई भी एक बड़ी समस्या है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई तरह की परेशानियां हैं.

सरकार पर कैसे पड़ रहा है असर?

मौजूदा राजनीतिक माहौल और विपक्षी दलों के बीच बढ़ती एकजुटता का असर सरकार के विधायी एजेंडे पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है. इसमें महिला आरक्षण को 2029 तक लागू करने की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक और लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा परिसीमन बिल भी शामिल है.

सरकार ने लोकसभा में सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव रखा था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके साथ महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को आगे बढ़ाने की कोशिश भी की गई थी. हालांकि, अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में यह विधेयक पारित नहीं हो सका. इसके अलावा दो अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी लंबित हैं. इनमें 130वां संविधान संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) विधेयक, 2025 शामिल हैं.

रिपोर्ट्स की मानें तो जब मानसून सत्र शुरू हुआ था, तब विपक्षी दल कई अलग-अलग गुटों में बंटे हुए थे. लेकिन अब स्थिति बदल गई है. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के बीच मौजूदा तालमेल सरकार के विधायी एजेंडे के लिए अच्छी खबर नहीं है.

एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के सरकार और राज्यसभा, दोनों से इस्तीफा देने के बाद मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. BJP के कुछ नेताओं का मानना है कि मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने से पार्टी और सरकार पर बन रहे राजनीतिक दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है. उनके मुताबिक, इससे विधानसभा चुनावों से पहले जनता के बीच सरकार की छवि को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का मुकाबला करने में भी मदद मिल सकती है. उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत जिन राज्यों में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनसे पहले BJP के लिए जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा.

कुल मिलाकर, SIR विवाद को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन, विपक्षी दलों की बढ़ती एकजुटता और महंगाई, बेरोजगारी तथा ग्रामीण समस्याओं जैसे मुद्दों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है. BJP के कुछ नेताओं को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान विरोध प्रदर्शनों की रफ्तार कम हो सकती है, लेकिन संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इन मुद्दों पर फिर से राजनीतिक टकराव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.